Story of Ganga – गंगा में उठते तुमुल ध्वनि का रहस्य

Story of Ganga

श्री राम(Ram)विष्णु के अवतार हैं। इन्हें पुरुषोत्तम के रूप में सभी मनुष्य जानते हैं। राजा दशरथ (Dashrath) के चार पुत्र – राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, इन चारों में राम अनमोल रत्न हैं, जो वीर योद्धा के साथ साथ अनुशाशन प्रिय, गुरुजन प्रिय, शांत और व्यव्हार कुशल हैं। इनका चरित्र हम सभी के लिए अनुकरणीय हैं।

एक बार की बात है विश्वामित्र ऋषि राजा दशरथ के घर आएं। दशरथ जी उनको देख कर अत्यंत खुश हुए। उनका आव भगत दशरथ ने इस प्रकार किया जैसे उनके घर साक्षात ब्रह्मा जी आ गयें हो। राजा दशरथ ने विश्वामित्र जी से कहा, आप हमारे यहाँ आएं माने सारे पुण्य क्षेत्रों का दर्शन कर लिया हो। कृपा कर के अब आप के यहाँ आने का शुभ कारण बताए ताकि मैं उसे पूरा कर सकूं।

Story of Ganga

विश्वामित्र ने सब समाचार पूछने के बाद कहा, हे राजन मैं सिद्धि प्राप्ति हेतु एक अनुष्ठान कर रहा हूँ। लेकिन मारीच और सुबाहु राक्षस मुझे उसमें बाधा डाल रहे हैं। वे यज्ञ में रक्त और मांस की वर्षा करके मेरी मेहनत व्यर्थ कर रहे हैं।

अनुष्ठान के समय मैं इनको शापित भी नहीं कर सकता। इसलिए मेरी हार्दिक इच्छा है की आप अपने बड़े पुत्र राम को 11-12 दिनों के लिए ले जाने दें।
राम दोनों राक्षसों को मारने में समर्थ हैं। राम पराक्रमी हैं ये मैं, वशिष्ठ जी और अन्य तपस्वी भी जानते हैं। कृपा करके आप अपने मन को दुखी न करें।

यह सब सुनकर राजा दशरथ अत्यंत दुखी हो गए और बेहोश हो कर पृथ्वी पर गिर पड़े। जब होश आया तो विश्वामित्र को कहने लगे – हे देव मेरा पुत्र राम तो अभी सिर्फ 16 वर्ष का ही है। मैं इसे राक्षसों को मारने के लिए कैसे भेज सकता हूँ। मैं अपनी पूरी सेना के साथ आपके साथ चलता हूँ और उन रक्षासों को मार दूंगा।

राजा दशरथ के कुल गुरु वशिष्ठ मुनि ने राजा दशरथ को बहुत समझाया और कहा की परशुराम के कहे अनुसार आप राम और लक्ष्मण को भेज दें।
बड़ी मुश्किल से राजा दशरथ तैयार हुए और दोनों भाइयों को विश्वामित्र के साथ भेज दिया।

दोनों भाई गुरु विश्वामित्र के साथ सरयू (Saryu River) तट पर रात में विश्राम किया। सुबह पूजा अर्चना करके विश्वामित्र के साथ जाने को तैयार हो गए।
सबसे पहले दोनों भाइयों ने गंगा (Ganga river) जी और सरयू के संगम पे पहुँच कर उन्हें प्रणाम किया। उसी तट पैर एक सुन्दर आश्रम था। राम ने आश्रम देख पूछा, हे गुरुदेव इतना सुन्दर आश्रम किसका है?

विश्वामित्र ने कहा हे पुत्र इस आश्रम में शिव जी एकाग्र होकर तपस्या करते थे। एक बार शिव अपने गणों के साथ जा रहे थे। तभी कामदेव ने उनपर हमला कर दिया। इससे शिव बहुत क्रोधित हुए और कामदेव की और देखा जिससे उसके शरीर की अंग गिर गए और वो अंगहीन हो गया।
इसलिए इस जगह को अंगदेश भी कहा जाता है।

इस कहानी की बाद राम, लक्ष्मण और विश्वामित्र नाव पर सवार होकर गंगा पार करने लगे। जब नाव गंगा की बीचों बीच पहुंची तो दोनों भाइयों ने जलों टकराने की बड़ी भारी आवाज़ सुनी। ऐसा लगता था मनो कोई दो बड़ी शक्ति आपस में टकरा रही हो। श्री राम तथा लक्ष्मण दोनों ने गुरु विश्वामित्र से पूछा, की ये गंगा में उठती तुमुल (भयंकर) ध्वनि क्या है? ऐसी भयंकर ध्वनि हमने आज तक नहीं सुनी है।

गुरु विश्वामित्र ने कहा – हे पुत्र राम, कैलाश पर्वत पर एक सुन्दर सरोवर है, जिसे मानसरोवर (Maansarover) कहते हैं। ब्रह्मा ने इसे अपने मानसिक संकल्प से प्रकट किया है। यह अत्यंत बलशाली है। उस सरोवर से एक नदी निकली है जो आयुष्य से सट कर बहती है। इस नदी को सरयू नदी कहते हैं। उसी का जल गंगा (Ganga) जी में मिल रहा है। इन नदियों की जलों की टकराव से ही ये भयंकर आवाज़ उठ रही है। इसे ही तुमुल ध्वनि कहते हैं।

विश्वामित्र ने कहा-आप इन नदियों की प्रणाम करें और संगम जल को अपने शीश पैर छीटें।

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