Story for Kids in Hindi – बुद्धिमान राजा

Story for Kids in Hindi – बुद्धिमान राजा

यह कहानी उस समय की है जब हमारे भारत देश को सोने की चिड़िया कहा जाता था। हमारे यहां अकूत धन संपदा थी। कहानी इस प्रकार है-

चीन के राजा को जब यह पता चला कि भारत के उड़ीसा राज्य में बहुत सोना है तो चीन के राजा ने आक्रमण करने की घोषणा कर दी । चीन के पास अच्छी सैन्य शक्ति थी, जिसके कारण चीन को बड़ा घमंड था। उसने अपने कुछ सेना को भारत की ओर रवाना कर दिया। इधर उड़ीसा के राजा ने जब यह बात सुनी तो उसने अपने कुछ विद्वान लोगों के साथ मीटिंग की। उसने सलाह मशवरा किया कि इस युद्ध को कैसे जीता जा सकता है। वैसे तो उड़ीसा के राजा के पास चीन से भी अधिक सैन्य शक्ति थी और सेना प्रशिक्षित भी थी ।लेकिन हमारे सैनिकों के पास एक गुण नहीं था जो चीनी सेनाओं के पास था। चीन के सेना में छल कपट धोखा कूट -कूट कर भरे थे जो हमारे भारतीय सेना में नहीं था ।
उड़ीसा का राजा सोच रहे थे कि चीन के आक्रमण से हमारा संपूर्ण राज्य की व्यवस्था तहस-नहस हो जाएगा और संभव है हम चीनी सेना के सामने युद्ध में परास्त हो भी जाएं। इस युद्ध को जीतने के लिए कोई दूसरी नीति अपनानी पड़ेगी। उनके बुद्धिमान सलाहकारों में से कुछ बुजुर्ग सलाहकार थे। जो बुद्धिमान के साथ-साथ अनुभवी भी थे। उन्होंने राजा से कहा कोई जरूरी नहीं कि युद्ध हमेशा अस्त्र-शस्त्र से ही जीता जाए। बुद्धि बल से भी जीता जा सकता है।

Story for Kids in Hindi Intelligent King

चार पांच वृद्ध व्यक्तियों ने राजा को अपनी योजना बताई । राजा को उनकी योजना बहुत पसंद आई ।उन्होंने इस योजना के लिए अपनी हामी भर दी। उस समय में हवाई जहाज नहीं हुआ करते थे। पानी के जहाज चलते थे।

उधर पता चला कि चीन के सैनिक समुद्री भारतीय समुद्री तट तक पहुंच चुके हैं। इधर हमारे भारतीय वृद्धों ने योजना के मुताबिक अपने पास कुछ अद्भुत लेकिन मामूली चीजें रखीं । एक वृद्ध ने 2 – 3 सुईया रखी और किसी ने सूखे सेब की टोकरी । वे सभी समुद्र की तट की ओर चल दिए। जब चीनी सेना को पता चला कि कुछ भारतीय इधर की ओर आ रहे हैं तब तो वे अत्यधिक खुश हो गए। उन्हें अपने पांचों उंगलियां घी में नजर आने लगी।बस वे इस ताक में थे कि भारतीयों को देखते ही उन्हें बंदी बना लेंगे और उन्हें डरा-धमकाकर सारी जानकारी निकाल लेगें ।

थोड़ी देर के बाद ही चीनी सैनिकों को भारतीय नजर आ गए । उन्होंने भारत से आए सभी भारतीयों को कैद कर लिया और उन्हें खूब डराने धमकाने लगे । उन्हें मार तो सकते नहीं थे क्योंकि एक तो वे लोग बुजुर्ग थे, वृद्ध थे और दूसरी बात अगर मार देते तो उन्हें जानकारी कहां से मिल सकती थी।

उन्होंने थोड़ा धैर्य रखकर पूछा , अच्छा , बताओ यहां से भारत कितना दूर है ? तपाक से एक वृद्ध ने कहा हुजूर जब हम चले थे तो हम 15 – 16 वर्ष के थे लेकिन आप तक पहुंचते -पहुंचते बूढ़े हो गए । इसी से आप अंदाज लगा सकते हैं की …………..| तब तक दूसरे ने सुईयां दिखाते हुए कहा sir जब हम अपने देश से चले थे तो ये लोहे के मोटे -मोटे छड़ थे ,लेकिन इतने लंबे समय तक हवा पानी और तूफान में गलकर सुइयां मात्र रह गई है। तभी तीसरे ने कहा हुजूर जैसे ही हमारे राजा ने आप लोगों की आने की खबर सुनी तो उन्होंने हमारे तरफ का एक विशेष फल जिसे सेब कहते हैं भेंट में देने के लिए कहा था। लेकिन रास्ते में यह सुखकर बीज मात्र ही रह गया है।ऐसा बोल कर उसने सेब की टोकरी सेनाओं के सामने रख दिया।

तीनों जोर जोर से रोने लगे ।कहने लगे कि शायद इस जन्म में अपनी मातृभूमि का दर्शन नहीं कर पाएंगे। अगर उन्हें पता होता तो वे राजा की बात मानकर इतनी दूर कभी नहीं आते । चीनी सेना उनकी बातें सुनकर सकते में आ गए और गुस्से में उन्हें पीटने भी लगे। उन बुजुर्गों ने कहा अच्छा है ! हमारा जीवन लीला यहीं खत्म हो जाए तो बहुत उचित होगा, क्योंकि अब हम जीते जी अपने देश तो पहुंच नहीं सकते। इससे अच्छा है हमें मार डालो।

चीन का सेनापति तथा सैनिक आपस में विचार- विमर्श करने लगे कि जब यहां से भारत इतना दूर है तो जाने से क्या फायदा ।चीनी सेनापति ने कहा जाते-जाते हम में से अधिकांश तो मर जाएंगे और जो कुछ वहां पहुंचेंगे भी तो वे सारे बुड्ढे हो चुके होंगे ।वे युद्ध करने लायक बचेंगे ही नहीं तो फिर वहां जाने से क्या फायदा है ? अब तो भलाई इसी में है कि हम सब यहां से वापस लौट चलें । चीनी सैनिक वापस लौट गए।

प्रिय मित्रों आपने देखा कि किस तरह से हमारे भारतीय बुद्धिमान वृद्ध ने बिना किसी खून-खराबे से अपने बुद्धि बल से देश को बचा लिया।

इस कहानी के माध्यम से हम यही सीखते हैं की अपनी बुद्धि और विवेक का सही इस्तेमाल करके जीत हासिल कर सकते हैं ।

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