Savitri and Satyavan Story – सावित्री अपने पति सत्यवान को यमराज से कैसे वापस ले आयी

Savitri and Satyavan Story – सावित्री अपने पति सत्यवान को यमराज से कैसे वापस ले आयी

सावित्री को वेदो की जननी और ब्रह्मा जी की पत्नी कहा जाता है । कहते है भारत वर्ष में इनकी पूजा और उपासना राजा अश्वपति ने की थी। अश्वपति ने अपनी पत्नी के साथ माँ सावित्री की उपासना अपने संतान के लिए बहुत दिनों तक की थी। लेकिन उस समय उनको सफलता नहीं मिली। कुछ दिनों के बाद सिर्फ राजा ने स्वयं संतान की इच्छा से सावित्री की आराधना किया तो माँ ने स्वयं कहा हे राजन गायत्री मंत्र का दस लाख जाप करो। सावित्री माता के कथनानुसार उन्होंने माता गायत्री का जाप खूब तन्मयता से किया और माँ प्रसन्न होकर कहने लगी हे राजन तुम पति पत्नी की अभिलाषा से परिचित हूँ। तुम दोनो की मनोकामना अवश्य पूरी करुँगी मैं।

माँ सावित्री ने कहा की तुम्हे एक बात और कहना चाहती हूँ की तुम्हारी पत्नी पुत्री चाहती है और तुम पुत्र। क्रम से दोनों ही होंगे।

भगवती सावित्री की अनुकम्पा से अश्वपति राजा को कन्या हुई जिसका नाम उन्होंने सावित्री रखा। पुत्री का रूपवान चेहरा देखकर ऐसा लगता मानो साक्षात लक्ष्मी जी हो । इनके बड़े होने पर इनके माता पिता ने सत्यवान के साथ इनकी शादी तय करवाई। एक साल देखते देखते बीत गया । सत्यवान बड़े ही सत्यवादी और पराक्रमी थे ।

एक बार पिता के कहने पर वे जंगल से लकड़ी लाने गए। सावित्री भी उनके साथ थी। भीषण गर्मी पड़ रही थी , अचानक सत्यवान लकड़ी काटते काटते उनके सर में भयानक पीड़ा होने लगी । वे लकड़ी काटते हुए धम से गिर पड़े । यह देख कर सावित्री व्याकुल हो उठी । क्षण भर के अंदर ही सत्यवान की मृत्यु हो गई । यमराज सत्यवान की लेने पहुँच गए ।

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सावित्री पहले तो यमराज से अपने पति की छोड़ने की विनती करती रही । कहती रही हे प्रभु आप इनको माँ ले जाये लेकिन यमराज अपने धर्म से बंधे हुए थे । उन्होंने कहा हे पुत्री तुम्हारा दुख की मैं अच्छी तरह समझता हूँ पर इसकी उम्र इतनी ही थी इसलिए इसको तो यमलोक ले जाना ही पड़ेगा ।

देखो बेटा तुम्हारी उम्र अभी बहुत छोटी है, तुम यहाँ से वापस लौट जाओ, पर सावित्री ने तो जैसे प्रण ही कर लिया था की वह अपने पति को लिए बिना नहीं लौटेगी । सावित्री यमराज से अशंख्य प्रसन्न पूछ रही थी और यमराज उसके प्रसन्नो का उत्तर दे देकर थक रहे थे। उन्हें आस्चर्य भी हो रहा था की इतनी छोटी उम्र की बालिका को इतना अधिक ब्रह्म ज्ञान कैसे हो सकता है ।

यमराज ने कहा बेटी सशरीर यमलोक कोई नहीं जा सकता , तुम्हारा जन्म माँ सावित्री के वरदान से हुआ है, तुम उन्ही देवी की कला हो । कृपया अब वापस लौट जाओ पर सावित्री एक न मानी। अंत मैं यमराह बोले मैं तुम्हारे ज्ञान बुद्धि और मधुर वाणी से बड़ा प्रसन्न हूँ, तुम जो चाहो वर मांगो। इतना सुनते ही सावित्री झट से बोली हे देव मेरे ससुर के आँखों मैं रौशनी आ जाये, मेरे पिता अश्वपति सौ पुत्रो के पिता बने और मैं सत्यवान से सौ पुत्रो की माता बनु। धर्म राज यमराज ने जैसे ही एवमस्तु कहा, सत्यवान जिन्दा हो गए। अब तो यमराज सावित्री की चतुर वाणी के भी कायल हो गए और उन्होंने सावित्री को सहस्त्रो वर्षो तक सुहागन रहने का वर दिया ।

इस प्रकार सावित्री अपने पति सत्यवान को अपने बुद्धिमता और चतुराई से मृत्यु के मुख से वापस ले आयी ।

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