Saraswati Puja Mantra in Hindi – सरस्वती पूजा विधि मंत्र और उसका महिमा

Saraswati Puja Mantra in Hindi – सरस्वती पूजा विधि मंत्र और उसका महिमा

सरस्वती देवी (Ma Saraswati ) की पूजा की विधि अनुपम है। उसका महत्व भी उतना ही है जितना कि दुर्गा पूजा का। कहा जाता है मां सरस्वती की कृपा से मूर्ख भी पंडित हो जाते हैं। संसार में कवि, लेखक, व्याख्यान सभी मां सरस्वती की कृपा से ही सम्मान प्राप्त करते हैं।

सृष्टि की रचना में मुख्य 5 देवियां मानी गई है। ये 5 देवियां इस प्रकार है- दुर्गा, राधा, लक्ष्मी, सरस्वती और सावित्री। इनकी पूजा से मानव जीवन पर अद्भुत प्रभाव पड़ता है।

श्री कृष्ण ने मां सरस्वती की पूजा (Saraswati Puja )सर्वप्रथम की थी । इनका रूप कुंदन की तरह शोभायमान होता है। इनकी मीठी मुस्कान पूरे जग को लुभाता है। सफेद वस्त्र में माता इस प्रकार शोभायमान होती हैं मानो चारों तरफ अपनी शांति का पवन फैला रही हो। एक हाथ में पुस्तक और दूसरे में वीणा से सुशोभित हो रही हैं । मां शारदा देवी सबके पाप हरण कर सद्बुद्धि दात्री कहलाती है।

इनकी पूजा माघ शुक्ल पंचमी को होती है। ये विद्या की आराध्य देवी कहलाती हैं। जिस किसी को भी माँ की कृपा पानी हो निचे लिखे श्लोक का नित्य एक माला जप करें और मनवांछित फल पाएं –

श्लोक – जेहि पर कृपा करहिं जनजानि ,
कवि और अजिर नचावहिं वाणी ,
मोरे हित माँ सम नहीं केहू,
कृपा करहूँ मोहि पर महरानी !

पूजा विधि- सबसे पहले भक्तों को स्नान करके श्वेत वस्त्र धारण करना है। मन पवित्र करके स्वयं कुश के आसन पर बैठ जाएं। जल से भरा कलश स्थापित करें। यह कलश पीतल या तांबे का होना चाहिए। सिंदूर या रोड़ी से स्वस्तिक का चिह्न बनाएं ।कलश के गर्दन पर कलेवा धागा बाँध दें । पांच पत्तों वाला आम्र पल्ल्व रखे । कलश के अंदर एक रुपए का सिक्का और थोड़ा सा चावल डाल दें । फिर लाल कपड़े से लपेट कर पानी वाला नारियल रख दें ।

सबसे पहले गणेश की पूजा करें। कलश की पूजा करें ।तब मां सरस्वती की पूजा प्रारंभ करें ।मन को स्थिर कर देवी का आवाहन करें। उनके लिए अच्छी- सी स्तुति करें। उनका षोडशोपचार कराएं।

पूजा के लिए नैवेद्य में- दही, दूध, धान, मक्खन, खीर, तिल का लड्डू, सफेद मिठाई, घी से बना नमकीन, बेर, नारियल इत्यादि एकत्र करें ।सुगंधित सफेद फूल , सफेद चंदन, सफेद वस्त्र एकत्रित करें। मां सरस्वती की पूजन विधि में शंख का होना विशेष रुप से अनिवार्य माना गया है। पूजा तथा नैवेद्य , फल फूल चढ़ाकर देवी को साष्टांग प्रणाम करें। इसके बाद माँ के वैदिक अष्टाक्षरी मन्त्र का 108 बार जप करें ,जो इस प्रकार है –

“श्रीं ह्रीं सरस्वतैय स्वाहा “ यह मन्त्र बहुत गूढ़ माना गया है । इस मन्त्र का 40 लाख जप करने से मन्त्र की सिद्धि हो जाती है । इसका जप करने से मनुष्य, गुरुबृहस्पति के समान प्रखर बुद्धि वाला हो जाता है ।

सबसे पहले इस मन्त्र का उपदेश नारायण ने वाल्मीकि मुनि को दिया था । कोइ चाहे कितना भी मूर्ख हो इस जप से वह निश्चय ही बुद्धिमान हो जाता है ।

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