Sachin Tendulkar Biography in Hindi – सचिन तेंदुलकर का जीवन परिचय

Sachin Tendulkar Biography in Hindi – सचिन तेंदुलकर का जीवन परिचय

 

सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) क्रिकेट की दुनिया के एक महान हस्ती है। इन्होंने क्रिकेट का बल्ला अपनी 5 वर्ष की आयु से संभाला। इन्होंने ऐसे कई वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए जिससे ये क्रिकेट की दुनिया में बेताज बादशाह बन गए। इनके पिता ने सचिन का नाम अपने मनपसंद संगीतकार सचिन देव बर्मन के नाम पर रखा था। सचिन ने अपने बल्ले की भाषा के द्वारा पूरे विश्व में अपना और भारत का नाम रोशन किया। इन्हें गॉड ऑफ क्रिकेट भी कहा जाता है।

नाम- सचिन रमेश तेंदुलकर
जन्म- 24 अप्रैल 1973
जन्म स्थान- मुंबई
पिता का नाम- रमेश तेंदुलकर
माता- रजनी तेंदुलकर
पत्नी- अंजलि तेंदुलकर
बच्चे- अर्जुन (बेटा) और सारा (बेटी )

प्रारंभिक जीवन– सचिन का पूरा नाम सचिन रमेश तेंदुलकर (Sachin Ramesh Tendulkar) है । इनका जन्म मुंबई में एक मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। सचिन 24 अप्रैल 1973 को जन्म लिए थे। इनके पिता का नाम रमेश तेंदुलकर (Ramesh Tendulkar) तथा इनकी माता का नाम रजनी तेंदुलकर (Rajni Tendulkar) है। सचिन के दो बड़े भाई हैं एक का नाम अजीत तेंदुलकर (Ajit Tendulkar) और दूसरे का नाम नितिन तेंदुलकर (Nitin Tendulkar) है ।ये तीनों भाइयों में सबसे छोटे हैं। इनकी बहन का नाम सविता तेंदुलकर है। इनके पिता प्रोफेसर और लेखक थे और उनकी माता इंश्योरेंस कंपनी में काम करती थी।

बचपन– 5 साल का बच्चा जिसे केवल एक ही धुन था क्रिकेट क्रिकेट क्रिकेट। बचपन से ही वे एथलीट की तरह व्यवहार करते थे ।अपनी आयु से बड़े बच्चों के साथ क्रिकेट खेलते तो खूब छक्के लगाते इसे देखकर उनके बड़े भाई अजित तेंदुलकर हैरान रह जाते ।अजीत भी अपने टाइम में क्रिकेट खेलते थे। लेकिन जो वह अचीव करना चाहते थे वह उन्हें नहीं मिला। लेकिन उनके छोटे भाई सचिन तेंदुलकर ने इसे पूरा कर दिया।1984 में जब यह 11 वर्ष के थे तो अजित तेंदुलकर महाराष्ट्र के रमाकांत आचरेकर (Ramakant Achrekar) जिन्हें क्रिकेट का द्रोणाचार्य कहा जाता है उनके पास ले कर गए। पहली बार अपने शर्मीले स्वभाव के कारण रमाकांत के सामने सचिन ठीक से परफॉर्म नहीं कर पाए। लेकिन बाद में जब उन्होंने अपना परफॉर्मेंस दिखाया तो रमाकांत को यह विश्वास हो गया कि यह बच्चा आगे चलकर एक बड़ा क्रिकेटर बनेगा। जब पहली बार रमाकांत को अपना परफॉर्मेंस देकर आए थे तो अपने बड़े भाई को लौटते समय कह रहे थे- मैं अन्य लोगों से बेहतर खेल सकता हूं। यह था 11 वर्ष के बच्चे का आत्मविश्वास।

शिक्षा– सचिन ने अपनी शिक्षा मुंबई के शारदा आश्रम विद्या मंदिर से ग्रहण किया इसके बाद सचिन ने मुंबई के कीर्ति कॉलेज में एडमिशन लिया जहां कि उनके पिता प्रोफ़ेसर थे।

अपने गुरु रमाकांत के साथ क्रिकेट का अभ्यास– सचिन के गुरु रमाकांत का क्रिकेट अभ्यास कराने का तरीका औरो से बिल्कुल निराला था। जिस तरीके से सचिन बैट पकड़ा करते थे रमाकांत को वह सही नहीं लगता था। उन्हें बार-बार अपने तरीके से बैठ पकड़ने की बात पर जोर देते थे। पर सचिन शुरू से ही बैट नीचे की ओर से पकड़ते थे और उसी में उन्हें कंफर्ट महसूस होता था। इसलिए उन्होंने अपने गुरु से निवेदन किया कि उन्हें Bat ऐसे ही पकड़ने दिया जाए। इनके गुरु इनकी प्रतिभा निखारने के लिए हमेशा नए नए तरीके ढूंढते थे।इसबार रमाकांत जी ने या अनूठी तरकीब निकली। वे प्रतिदिन या रुपए का सिक्का अपने पास रखते और अन्य बच्चो से कहते की सचिन को जो हराएगा उसे यह सिक्का दे दिया जाएगा और अगर नहीं हरा पाया तो यह सिक्का सचिन का हो जाएगा । सचिन के पास गुरु के दिए हुए ऐसे 13 सिक्के हैं । ये सिक्के उनकी संवेदना से जुड़े हैं ।

बचपन की उपलब्धियां– जब सचिन 14 साल के थे तब अपने समय के महान क्रिकेटर “सुनील गावस्कर”  (Sunil Gavaskar) ने उनका परफॉर्मेंस देखकर अपना लाइट पैड उन्हें दे दिया जिससे उनको बहुत प्रोत्साहन मिला यद्यपि इस मैच में वे जीते नहीं थे। संयोग की बात 20 साल के बाद सचिन तेंदुलकर ने गावस्कर के टेस्ट मैच में 34 सेंचुरीज के रिकॉर्ड को तोड़ दिया।

15 वर्ष की उम्र में सचिन को मुंबई टीम में चुना गया। 1988 में सचिन ने गुजरात के खिलाफ पहली शतक बनाकर नाबाद पारी खेली। इसी साल इन्होंने दिलीप ट्रॉफी रंजित ट्रॉफी इत्यादि में लगातार शतक लगाया और ऐसे इकलौती खिलाड़ी बन गए जो इस मुकाम तक पहुंच पाए।

1988 में ही हॉरीस शील्ड मैच के दौरान सचिन अपने सहपाठी विनोद कांबली (Vinod Kambli) के साथ 664 रनों की साझेदारी की । इस अद्वितीय और धाकड़ जोड़ी के प्रदर्शन से एक गेंदबाज तो रोने ही लगा और विरोधी पक्ष ने मैच खेलने से आगे मना कर दिया। सचिन ने इस मैच में 320 रन बनाए।

सुपरस्टार की ओर बढ़ते कदम -अब तक सचिन क्रिकेट की दुनिया में काफी प्रसिद्ध हो चुके थे। इन्हें लिटिल मास्टर- ब्लास्टर (Little Master Blaster) के नाम से जाना जाता हैं। 1989 में सचिन ने पहली बार इंटरनेशनल मैच पाकिस्तान के खिलाफ खेला जो उस समय की सबसे जबरदस्त टीम के रूप में जानी जाती थी। इस सीरीज में सचिन ने पहली बार वनडे मैच खेला। 1990 में सचिन ने इंग्लैंड के खिलाफ पहला टेस्ट सीरीज खेला। जिसमें 119 रनों की पारी खेली। दूसरे नंबर के शतक मारने वाले सबसे छोटे प्लेयर के रूप में सचिन तेंदुलकर मशहूर हो गए।

1996 के वर्ल्ड कप के समय सचिन को कप्तान बना दिया गया । कप्तानी के दौरान इनका परफॉर्मेंस स्लो हो गया । इन्हें कप्तानी रास नहीं आई। इस दौरान सचिन 25 में से सिर्फ चार मैच जीते थे। इसके बाद से सचिन ने कप्तानी न करने का फैसला लिया ।

सबसे अधिक रन स्कोर करने वाले– 2001 में सचिन ऐसे पहले खिलाड़ी बने जिन्होंने वनडे में 10,000 रन बनाए। 2003 के वर्ल्ड कप (World Cup) में सचिन सबके प्रिय बन गए। 11 मैचों में 673 रन बनाकर भारत को जीत के करीब ले आए थे। वर्ल्ड कप फाइनल में इंडिया का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया से हुआ था जिसमें इंडियन टीम हार गई थी। सचिन को मैन ऑफ द टूर्नामेंट (Man of the Tournament) से सम्मानित किया गया।

बुरा वक्त- इसके बाद सचिन बहुत से मैच खेले लेकिन सफल ना होने के कारण लोग इनके बारे में बहुत गलत गलत बातें करने लगे। पर सचिन की एक खासियत हमेशा रही कि उनकी आलोचना करने वालों को भी उन्होंने ना तो व्यक्तिगत तौर पर कुछ कहा, ना पीछे या फिर ना ही मीडिया के सामने। अगर इसका कभी जवाब दिया तो अपने बल्ले के द्वारा ही दिया ।

2011 के वर्ल्ड कप में एक बार फिर से वे चमके। उन्होंने 483 रन बनाएं जिसमें 2 शतक भी शामिल थे। इस में इंडिया और श्रीलंका ने खेला था। इसमें इंडिया की जीत हुई थी। सचिन का बरसों का सपना पूरा हो गया। वे वर्ल्ड कप जीत गए। वे अत्यधिक प्रसन्न थे । इस वर्ल्ड कप में सचिन ने एक और कीर्तिमान स्थापित किया। सचिन ऐसे पहले बैट्समैन बन गए जिन्होंने सारे वर्ल्ड कप को मिलाकर 2000 रन बनाए जिसमें 6 सेंचुरी भी शामिल है। इतना बड़ा मुकाम आज तक सचिन के अलावा किसी खिलाड़ी ने नहीं पाया।

क्रिकेट से सन्यास– दिसंबर 2012 में सचिन ने वनडे मैच से सन्यास लिया और 16 नवंबर 2013 में क्रिकेट से सन्यास ले लिया। सचिन ने अपने कैरियर में 34000 रन बनाएं जिसमें 100 सेंचुरी भी शामिल है। इतने बड़े मुकाम तक शायद ही कोई खिलाड़ी पहुंच सकता है। 2012 में सचिन राज्यसभा के सदस्य चुने गए।ये भी उनकी अलग तरह की उपलब्धि है।

व्यक्तिगत स्वाभाव- सचिन तेंदुलकर क्रिकेट की दुनिया में तो महान थे ही लेकिन वे अपने निजी जीवन में भी एक अच्छे इंसान हैं। इतने बड़े खिलाड़ी होने के बावजूद उनको अहंकार कभी स्पर्श भी नहीं कर पाया। इतने ऊंचे मुकाम पर पहुंच कर Ego से दूर रहना कोई आसान बात नहीं होता पर यह एक ऐसे धरातल पर रहने वाले इंसान हैं जिन्होंने अपनी महानता से ऊपर उठकर अपनी इंसानियत को अपने साथ हमेशा रखा ।

सम्मान -सचिन तेंदुलकर को 2008 में पद्मभूषण (Padma Bhushan) से सम्मानित किया गया और 2014 में भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न (Bharat Ratna )से सम्मानित किया गया।

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