Ravan Vadh – रावण वध के लिए दिग्गज वानरों की उत्पत्ति का रहस्य

Ravan Vadh – रावण वध के लिए दिग्गज वानरों की उत्पत्ति का रहस्य

राम रावण युद्ध में लक्ष्मण (Lakshman) और हनुमान (Hanuman) की भूमिका तो महत्वपूर्ण थी ही, साथ में अनेक तेजस्वी रीछ और वानरों की भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका थी जिनकी सहायता से श्री राम (Shri Ram) ने रावण वध (Raavan Vadh) किया और लंका पर विजय पायी।

रावण (Raavan) को ब्रह्मा ने वरदान दिया था की तुम्हे देवता, यक्ष, गन्धर्व कोई भी नहीं मार सकता । तुम्हारी मृत्यु मनुस्य के हाथ से होगी, रावण मनुष्य जाति को अपने आगे बहुत तुच्छ और दुर्बल समझता था । उसने सोचा मनुस्य स्वयं ही बलहीन होते है वो हमारे बल के आगे क्या टिक पाएंगे । अब क्या .. अब तो मैं अजर अमर हो गया ,तीनो लोको पर राज्य करूँगा और देवताओ को स्वर्ग से खदेड़ दूंगा । रावण का उत्पात बढ़ता ही जा रहा था, वह अपने बल से देवता, ऋषि, गन्धर्व और तीनो लोको को बहुत कष्ट दे रहा था ।

Ravan Vadh

जब राजा दशरथ के यहाँ पुत्र्येष्टि यज्ञ चल रहा था तो सभी देवता गण वहां आएं हुए थे । ब्रह्मा जी अन्य देवताओं के साथ रावण वध की युक्ति बना रहे थे तभी विष्णु जी का  पदार्पण हुआ । ब्रह्मा सहित सभी देवता विष्णु (Vishnu) जी से प्रार्थना करने लगे ..हे प्रभु रावण के उत्पात से हमें बचाएँ , हम सभी बहुत त्रस्त हैं, कृपया करके हम सभी के कष्ट दूर करें। हे नारायण अभी राजा दशरथ पुत्रो के लिए यज्ञ कर रहे है, आपसे विनती है की राजा दशरथ को पिता के रूप में स्वीकार करें और पुत्र रूप में जन्म ले कर तीनो लोको को रावण जैसी दैत्य से मुक्त करें । इनके विनीत भरें शब्दों को सुनकर नारायण द्रवित हो गए और कहा की मैं राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न चारों भाइयों के रूप में मैं अवतार लेकर आप लोगो के कष्ट का निवारण करूँगा ।

ब्रह्मा ने सभी देवता से कहा अब हमारे कष्ट के दिन दूर होने वाले है लेकिन उससे पहले बहुत सी तैयारी करनी है, हम लोग विष्णु की सहायता करने के लिए सभी देवता गण मिलके ऐसे पुत्रो की सृष्टि करेंगे जो शरीर और मन से बलवान हो, जो समय अनुसार रूप धारण करनी में सक्षम हो, शूरवीर व बुद्धिमान, विष्णु तुल्य पराक्रमी , दिव्य शरीर धारी, देवताओं के समान अस्त्र शस्त्र विद्द्या में निपुण था नीतिज्ञ हो।

ब्रह्मा जी सहित सभी देवताओं ने विष्णु के सहायता के लिए वानर यूथपतियो की उत्पत्ति मैं जुट गए।  सभी देवताओं ने अपने अध्भुत पराकर्म से अपने समान महान पराकर्मी वानरों और रीछों की उत्पत्ति की ।

सबसे पहले ब्रह्मा ने जामवंत की उत्पत्ति की जो वयोवृद्ध ज्ञानवान नीतिवान बुद्धिमान और महापराक्रमी रीछ थे ।

देवराज इंद्रा ने वानर राज वाली को उत्पन्न किया जो महेंद्र पर्वत के समान विशालकाय थे , उनमें दस हज़ार हाथियों का बल था।

सूर्य भगवन ने सुग्रीव को जन्म दिया जो महान तेजस्वी और वीर था।

बृहस्पति ने तार नमक वानर उत्पन्न किया जो महाकाय था, बुद्धि और बल में श्रेष्ठ था ।

कुबेर ने गंधमादन वानर की उत्पत्ति की, यह अन्य वानरों से अधिक शूरवीर और तेजवान था

विश्कर्मा ने नल नामक वानर को जन्म दिया।

अग्नि ने अपने सामान महान तेजस्वी और पराकर्मी नील को उत्पन्न किया।
ये दोनों भाई नल और नील यश बल और वीरता में सबसे आगे थे। दोनों अश्विनी कुमारों ने  मयंद और द्विद नाम के वानरों को उत्पन्न किया जो इनके समान रूप और भैभव में संपन्न थे ।वरुण देव ने शुषेण नामक वानर उत्पन्न किया और महाबली पर्जन्य ने शरवः को जन्म दिया।

हनुमान का जन्म वायुदेव से हुआ , यह ऐश्वर्यशाली और गरुड़ के समान तीव्रगामी थे । इनका शरीर वज्र के समान सुदृढ़ था । सभी वानरों में सर्वश्रेष्ठ कुशाग्र  बुद्धि वाले वाक् पटुता में निपुण थे ।

इस प्रकार कई हज़ारों वानरों की उत्पत्ति हुई, इन सभी के परकर्म और सहयोग से श्री राम रावण के ऊपर विजय पा सके ।

हमारे देवताओ तथा पूर्वजो को भी लक्ष्य प्राप्त करने के लिए एक दूसरे के सहयोग की जरुरत पड़ी और एक दूसरे के सहयोग से ही अपना लक्ष्य पा सकें । हम लोगो को भी अपने जीवन में एक दुसरो की सहयता की आवश्यकता पड़ती है। इस तरह आप लोग भी एक दूसरे की सहयता करके अपने Problems solve कर सकतें है और अपना target achieve कर सकतें है ।

More Mythological Stories in Hindi | पौराणिक कथाएं

1 – 51 Shakti Peeth list in Hindi51 शक्ति पीठ
2 – Solah Somvar Vrat Katha in Hindiसोलह सोमवार व्रत कथा
3 – Navratri in Hindi नवरात्री पूजा विधि और इसका महत्त्व
4 – Gayatri Mantra Meaning in Hindiगायत्री मंत्र का अर्थ और महिमा
5 – Hanuman Stories in Hindiवायु पुत्र मारुती का नाम हनुमान कैसा पड़ा
6 – Navadurga Names in Hindiनव दुर्गा के नाम और उनकी कथाएं
7 – Navagraha Mantra – नवग्रह क्या हैं? ये ग्रह मनुष्य के जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं ?
8 – 12 Jyotirlinga Name & Place in Hindi 12 ज्योतिर्लिंग के नाम और विवरण
9 – Satya Harishchandra Story in Hindiसत्यवादी राजा हरिशचंद्र की कथा
10 – Meaning of Om in Hindi ऊँ क्या है इसके स्वरूप का रहस्य क्या है
11 – Vaman Avatar Story in Hindi – विष्णु के वामन अवतार की कथा
12 – Ganga River History in Hindi – Ganga Nadiगंगा जी की उत्पत्ति कैसे हुई
13 – Shiv Ardhnarishwar Story in Hindiशिव अर्धनारीश्वर के रूप में कब प्रकट हुए
14 – Vishnu 20 Avtaar in Hindiविष्णु के 20 अवतारों का रहस्य
15 – Tulsi Story in Hindiतुलसी की महिमा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here