Raksha Bandhan Poems in Hindi – रक्षाबंधन पर कविता

Raksha Bandhan Poems in Hindi – रक्षाबंधन पर कविता

श्रावण मास की पूर्णमासी दिन है बड़ी विशेष और खासी
रोड़ी अक्षत चंदन मिठाई बहना थाल सजाकर आई

रेशम धागों में राखी चमके आकाश में जैसे चंदा चमके
तिलक लगा राखी पहनाई सज गई आज भाई की कलाई

भैया का दिल बाग-बाग है बहना उसके साथ-साथ है
पाकर भैया से उपहार बहना झूमे यूँ सावन की फुहार

भाई बहन का प्यारा नाता देख धरती निहाल हुई
मेघ बजाने लगे नगाड़े बादल कजरी- सी स्याह हुई

रक्षाबंधन का त्यौहार अनोखा खुशियां लाए बनके झोंका
एक दूजे का साथ न छूटे चाहे आए ना आए कोई मौका

प्रीत के धागों का यह बंधन पावन पुनीत है रक्षाबंधन
तू दीया मैं बाती भैया बन प्रकाश जग होए सुहइया

हर बहना की यही दुआ है तारों से चमके मेरा भैया
दिन दूनी हो उसकी सदा रात चौगुनी फूलों से भरा

लड़ाई- झगड़ा इस रिश्ते की शान लड़कर भी इसे बनाए महान
एक- दूजे से दूर ना जाएं आओ मिलकर रक्षाबंधन मनाएं

Poem on Brother and Sister  – कविता – भाई बहन

मेरी बहना प्यारी बहना तू तो है इस घर की गहना
बातों में नानी कहलाती मुहल्ले भर की कहानी सुनाती

चोटी खींचो चिढ जाती है छोटी नाक चढ़ा लेती है
मारने को मुझे ऐसे दौड़ती जैसे बिल्ली चूहे को भगाती

मनाने का बस एक तरीका झूले में उसको बैठता
मैं भी उसके संग बैठता परियों की कहानी सुनाता

कभी मेरे कानों को खींचती कभी बालों को सहलाती
कभी आ गले लग जाती अपना प्यार मुझ पर लुटाती

संग संग में खेलना- हंसना संग संग में पढ़ाई
बंसी सी तेरी मधुर आवाज में बुलाना कहकर भाई

ना जाने कब समय बीत गया उसकी विदाई का वक्त आ गया
दिल मेरा टुकड़ों में बंटा सोचा, ना जाने ऐसा क्यों हो गया

परंपरा की रित यही है बहना अपने घर को चली है
रोम-रोम से दुआ है मेरी खुशियों से भरे तेरी झोली

दिल से मेरे दूर ना होना आऊंगा मैं तेरे अंगना
राखी तुझसे ही बँधवाउंगा नहीं दूंगा तुझे कोई खिलौना

यह ना सोचो छोड़ दूंगा एक पर एक जोड़ दूंगा
पहले तुझे अकेला चिढ़ाता था अब जीजू को साथ में लूंगा

हा…. हा….. हा….. हा….. हा…. हा….. हा…. हा !!!

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