Poem on Yoga Diwas in Hindi – योग दिवस पर कविता

Poem on Yoga Diwas in Hindi – योग दिवस पर कविता

योग का इतिहास 5000 साल पुराना है
इसका रिश्ता पतंजलि से पुराना है
अष्टांग योग का पाठ पढ़ाता
आत्मदर्शन का द्वार है खुलवाता

इड़ा पिंगला सुषनना में जाकर
प्राण वायु को सहस्त्रार में बैठाता है
ध्यान के चैतन्य स्वरूप में
परमात्मा से आत्मा को मिलाता है

योग के करिश्मा को मोदी जी ने है पहचाना
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसका अलग पहचान बनाया
21 जून का यह उत्सव गिनीज बुक में रिकॉर्ड बनाया
रामलीला मैदान में योग का अभ्यास कराया

खोई ख्याति वापस आई भारत योगगुरु कहलाया
पुलकित हो उठे भारतवासी ऐसा कोई नेता आया
योग का अर्थ जोड़ना है इसका अलग अर्थ समझाया
2015 में योग का अलख जगाया

स्वास्थ्य और अध्यात्म को योग ऐसा जोड़ता है
एक सूत्र में बांध कर दोनों को चमकाता है
योग हमारे जीवन को देता है एक नया आयाम
तभी तो पूरे विश्व ने योग को दिया सम्मान


Poem on Yoga – योग पर कविता

जीवन सफल बनाना है तो
योग करो और रोग मिटाओ
तन मन को स्वस्थ बनाना है तो
योग करो और रोग भगाओ

नर तन पाया योग आया
कैसे पाओगे सुंदर काया ?
रोग ग्रसित हो जीवन अपना
यह संसार लगे सब सूना

धनबल यश को पाना है तो
योग करो और रोग मिटाओ

स्फूर्ति जीवन में आता
तंदुरुस्ती तन में ले आता
मन की चंचलता निरस्त कर
ध्यान की ओर हमें ले जाता

अंतर्मन चमकाना है तो
योग करो और रोग मिटाओ

सूरज से है चेहरा दमकता
उन्मुख अपना जीवन करता
रामदेव जी के राह पर चलके
जो कपालभारती और भस्त्रिका करता

हर उलझन सुलझाना है तो
योग करो और रोग मिटाओ

हर कोई योग कर सकता है
जाति लिंग धर्म सब समा सकता है
सकारात्मक ऊर्जा पाकर
सुख की बगिया महका सकता है

पावन जीवन बनाना है तो
योग करो और रोग मिटाओ
योग करो और रोग मिटाओ

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