Poem on Sun in Hindi – सूरज पर कविता

Poem on Sun in Hindi – सूरज पर कविता

1

नदी किनारे खड़ी थी
आसमान को तकती थी
सूर्यास्त के बेला में
लाली अद्भुत छायी थी

चिड़ियों की चेचाहट
मध्यम हो रही थी
वो भी अपने नन्हो के संग
नीड की और चली थी

बगीचों में खेलना
बच्चो के कम हो गए थे
माता पिता संग बच्चे
घर को लौट रहे थे

पर्वत की ओट से
सूरज झांक रहा था
पेड़ो की झुरमुट से
मैं उसे निहार रही थी

माँ बनकर मैं पुछु , वत्स
पूरे दिन तू जलता है
खुद को नित जला कर
क्या अद्भुत सेवा करता है

जी चाहता है मेरा
तुझे शीतल जल पिलाऊँ
संध्या की शीतल छाया
मैं तुझे अपने अंक मैं सुलाऊँ

2

सूरज आया जागो भाई
काम करने की घडी आयी

चुन्नू मुन्नू चले स्कुल
पापा ऑफिस भागे भाई

मम्मी जुट गयी खाना पकाने
दीदी करने लगी पढाई

छोटू अपने झूले में बैठे
खाने लगा चीनी मलाई

सूरज कहता आलस त्यागो
मुझसे काम करना सीखो

जगत है ये जगती का चक्की
मेहनत करो और खाना खाओ

जी भर कर करो पढाई
तभी पाओगे सुखद मिठाई

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