Poem on Summer Season in Hindi – ग्रीष्म ऋतु पर कविता

Poem on Summer Season in Hindi – ग्रीष्म ऋतु पर कविता

बसंत ऋतु के जाते ही
गर्मी का मौसन आते ही
हाल बेहाल हो जाता है
बेचैनी बढ़ जाता है

गर्मी का मौसम आता है
सब को बड़ा सताता है
आसमान से सूरज भी
तपती आग बरसता है

मई जून महीना आता
गर्मी का पारा ऊपर चढ़ जाता
गरम हवा के झोकें चलते
अंगारे से सड़क है तपते

बहार निकलना मुश्किल होता
टप टप टप पसीना चलता
खाने की कुछ जी न करता
कुल्फी लस्सी मन को भाता

नदी तालाब पोखर सुख जातें
पेड़ पौधे सभी मुरझाते
पंछी की कहीं छाँव न मिलते
इधर उधर वे दुबके फिरते

पर …. गर्मी के कारन बादल बनते
जो बारिश बन के आते है
सूरज की तपती किरणों से
कीड़े मकोड़े मर जाते है

ईश्वर की रचना को समझो
हर मौसम एन्जॉय करों
फलो का राजा आम मिला है
प्रभु का धन्यवाद् करो

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