Poem on School in Hindi – मेरा विद्यालय पर कविता

Poem on School in Hindi – मेरा विद्यालय पर कविता

जीवन में कुछ पाना है तो
विद्यालय जाना है
बिना विद्यालय गुरु कहाँ
बिना गुरु ज्ञान कहाँ

अनुशाशन में रहकर पढ़ना
हर नियम का पालन करना
कैसे बैठना कैसे बोलना
भाई चारे के साथ में रहना
सब कुछ यहाँ सिखाते है
जीने के कला बताते है

इंग्लिश हिंदी गणित विज्ञानं
हमें पढ़ाते और बनाते विद्वान
कला और संगीत का भी
उतना ही रखते है ध्यान
हमारे सब शिक्षक विद्वान
देते नित नव विद्या दान

देशभक्ति का पाठ पढ़ाते
खेल कूद का नियम सिखाते

Poem on School – स्कूल पर कविता

न जाने कब हम बड़े हो गये
स्कूल के मस्ती भरे लम्हे
न जाने कहाँ गम हो गए

दोस्तों की पेंसिल चुराकर लिखना
और अपनी पेंसिल बेग मैं डाल देना
वो दोस्ती वो यारी
वो निश्छल प्रेम और लड़ाई
न जाने कहाँ गम हो गयी

शर्ट की बटन खोल के चलना
दोस्तों के सामने हीरोगिरी जताना
टीचर की नज़र पड़ने पर घंटो लेक्चर सुनना
न जाने कहाँ गम हो गए

स्कूल देर से पहुंचने से
क्लास में छुप छुप कर आना
दोस्त के होमवर्क को अपना होमवर्क बताना
डॉट पड़ने पर छुप छुप के हसना
न जाने कहाँ गम हो गए

काली हरी चटनी के चटकारे लगाना
पानी पूरी देखकर मुंह में पानी भर आना
स्कूल के गार्डन से फूल चुराना
और फिर माली काका से मिन्नते मांगना
न जाने कहाँ गम हो गए

मैथ्स, S S T के क्लास में पीछे बैठना
गेम्स के पीरियड का बेसब्री से इंतज़ार करना
दोस्तों का चेयर खिचकें गिराना
जोर जोर से हसना
न जाने कहाँ गम हो गए

कास वो मस्ती भरे दिन वापस आजाते
अपने दोस्तों से आँखें चार हो जातें
थोड़े देर के लिए ही सही
फिर से खूब मौज मस्ती उड़ाते

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