Poem on Rain in Hindi – वर्षा ऋतु पर कविता

Poem on Rain in Hindi – वर्षा ऋतु पर कविता

सावन बीत गयी वर्षा रानी
भादो भी बिता जाएं रे
तेरी बूंदो की थपकी
कहीं नज़र नहीं आये रे

धरती की प्यास प्यासी ही रह गयी
फसलों की सुगबुगाहट दब गयी
किसानो की आस निराशा में बदली
बच्चों की मुस्कान उदासी में

न बदल का गर्जन है
न झींगुर की सिटी
न मेढक का टर टर है
न मयूर की कूंकीं

हमगर थोड़ा विचार करें
वृक्षों का रोपण करें
न कटे पर्वत टीलों को
जंगल की न बर्बाद करें

होगी विह्वल वर्षा रानी
खुशियों की होगी नयी कहानी
वर्षा की बौछारों से
पावन होगी धरती रानी

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