Poem On Nature in Hindi – प्रकृति पर हिंदी कविता

1 Poem On Nature in HindiPoem On Nature in Hindi

प्रकृति के हैं छवि निराले
क्षण क्षण अपना मुखड़ा बदले
तपती सूरज की किरणों से
धरती के तन को दहकाये
गरम हवा से सागर का जल
भाप बन उड़ उड़ जाए
उमड़ घुमड़ कर बादल बनते
तड़-तड़-तड़ बिजिल चमकाते
काले काले नभ के बादल
छम-छम-छम बरसा करते
वर्षा धरती की प्यास बुझाती
चरों ओर हरियाली छाती
तरह तरह के हम सब्ज़ी पाते
फल फूलों से घर भर जातें
पृथ्वी जब थर्राती जाड़े से
सूरज की किरणे उसे बचाती
घर बगिया में बिखर बिखर
खेतों में वो फसल पकाती
सौरभ की शीतल छाया में

चंचल पग से धरती पर चलती

2 Poem on Nature in Hindi

मेरी आत्मा हो तुम , परमात्मा भी तुम हो
आराधना हो मेरी , अराध्या भी हो तुम
तेरे विस्तार में ही हमारे प्राण है
नाना रूप तेरे नैनो में बसें हैं
तेरे बिच रहकर ही सारी जनमना हैं
ऋतुओ की तू महामना हैं
तेरी गोद में पलकर हम बड़े हुए ,
तेरी हवाओं में हमारी सांस चलें
फिर भी न जानें मानव क्यों न समझे
तुझे ही बर्बाद करने पर तुले हुए
तुम सौम्य हो शालीन हो
अनुपम छठा की कला काष्ठा हो
प्रचंड रूप जिसने तेरा देखा
बर्बरता की पराकाष्ठा हो
बारिश की बुँदे जब झरती
धरती दुल्हन बन सज जाती
कवि हृदय पुलकित हो जाता
तरुपल्लव सब शीश झुकाता
वसंत ऋतु जब आ जातें

भक्ति का उमंग जगाते

चहुँ प्रहर सुवासित हो जातें
धुप दीप नैवेद्य सजाते
पावस ऋतु झलमल करती
पर्वत रानी हिम से ढक जाती
श्वेत शीतल पवन बह चलती
पर्यटकों को खूब लुभाती

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