Poem on Koyal in Hindi – कोयल

Poem on Koyal in Hindi
Poem on Koyal in Hindi

Poem on Koyal in Hindi

मीठे मीठे धुन में काली कोयल बोल उठी
बच्चो के मन में मधुर बंसी बज उठी
जब जाड़ा कम हो जाता हैं सूरज थोड़ा गरमाता है
जो पंचम सुर में गाती हैं वो कोयल कहलाती है

 

आमों में जब बोरियां पड़ती
कोयल आप खींची चली आती
आमों के डाली पर फिरती
कुक कुक कर मिश्री घोलती

 

समां सुहाना बंध जाता है
ह्रदय आनंदित हो जाता है
तुम्हे देखने को
मन व्याकुल हो जाता है

 

कहाँ छुपी हो कोयल रानी ??
किससे पायी मीठी वाणी
अपना राज मुझे बताओ
में भी चाहूँ इसे अपनानी

 
More Hindi Poems | हिंदी कवितायेँ 

1 – Poem On Nature in Hindiप्रकृति पर हिंदी कविता
2 – Poem on Mother in HindiHindi Kavita on Maaमाँ पर कविता
3 – Poem on Cleanliness in Hindiस्वच्छता पर कविता
4 – Hindi Poem on Shivratriशिवरात्रि पर कविता
5 – Poem on Peacock in Hindiमोर पर कविता
6 – Hindi Poem on Unityएकता पर कविता
7 – Poem on Corruption in HindiBhrashtachar par Kavitaभ्रष्टाचार पर कविता
8 – Kids Poem in Hindiबच्चो की कविता
9 – Desh Bhakti Poem in HindiDesh Bhakti Kavita in Hindiदेश भक्ति गीत
10 – Poem on Flowers in Hindiफूल पर कविता
11 – Holi Poem in Hindiहोली पर कविता

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here