Poem on Himalaya in Hindi – हिमालय पर्वत पर कविता

Poem on Himalaya in Hindi – हिमालय पर्वत पर कविता

 

नीली है पर्वतो की माला
दूर है तेरा किनारा
मौन है चोटियों की श्रृंखला
पर कुछ न बोलते हुए भी
सब कुछ कह देने वाला

तुम हो देश के प्रहरी मेरे
अडिग होना सिखाते हो
आंधी हो या हो तूफ़ान
सम रहना बताते हो

फूलों से सजी है वादियां तेरी
वृक्षों से सजी कतारे है
पत्ते मनो ऐसे झूलते
करते तेरा श्रृंगार है

सूर्य उदय हो या सूर्यास्त हो
चाहे चांदनी रात हो
बर्फ से देखी चादर तेरी
मनो फैला प्रकाश हो

जड़ी बूटियों से भरा है खजाना
गंगा की उद्गम स्थल हो तुम
देश का मुकुट तुम कहलाती
भारत की शान हो तुम !!!!

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