Poem on Guru in Hindi – गुरु पर कविता

Poem on Guru in Hindi – गुरु पर कविता

कबीर जी का कथन है

सात समुद्र की मसि करुँ, लेखन सब बनराए ।
सब धरती कागद करूँ, गुरु गुन लिखा न जाए||

गुरु का महत्व होगा न कम
चाहे कितनी ही करले उन्नति हम

दीया और बाती जैसा गुरु शिष्य सम्बन्ध
गुरु बाती और दीया है हम

पथ आलोकित करते गुरु
अज्ञान को मिटाते हैं

जीवन पथ पर चलने की
कला हमे सिखाते हैं

जीवन एक अंधकूप है
गुरु है ज्योति पुंज

अज्ञान का तिमिर मिटा दें
आप हो आनंद के कुंज

सतगुरु का सानिध्य
ईश्वरीय उपहार है

कच्ची माटी से
मूरत करते तैयार है

गुरु हमारे जीवन के आधार
उनके हाथ में हमारी पतवार

भवसागर से पार लगाओ
मृत्यु लोक से हमे उबारो

धर्म कर्म की चादर ओढ़े
मन कर्म वचन से एक निष्ट होबे

सत्य पथ पर लेकर चलने वाले
ऐसे गुरु को कोटि सह नमन हमारे

 

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