Poem on Father in Hindi – पिता पर कविता

Poem on Father in Hindi –

पिता पर कविता

1 मेरे पिताजी

कभी सम्मान तो कभी स्वाभिमान
कभी धरती तो कभी गगन
वो पिता है हमारे

माँ ने संसार में लाया तो…
जमीं पर जीना सिखाया ..वो पिता है हमारे

कभी साइकिल तो कभी काँधे पर बिठाया
कभी हाथी कभी घोडा बन कर घुमाया
वो पिता है हमारे

माँ ने चलना सिखाया तो …
पैरो पर खड़ा होना सिखाया ….वो पिता है हमारे
कभी भासन तो कभी अनुशासन
कभी गुस्सा तो कभी हसाना…वो पिता है हमारे

माँ मीठी लोरी है तो …..
सुबह पढ़ने की नसीहत देना ..वो पिता है हमारे
कभी जोश तो कभी खामोश
मैं पतंग पिताजी डोर..वो पिता है हमारे

माँ तो मन का कह लेती जो ….
चुप चाप रह जाएं ..वो पिता है हमारे

2 पिताजी

मेरे पापा प्यारे पापा
मेरे मन के प्यारे पापा
अच्छी बातें मुझे सिखाती
माँ डांटती पापा बहलाते

मेरे मन की बात समझतें
बिन कहे सब कुछ ला देतें
अपना दुःख कभी न बताते
प्यार का सागर छलकाते

हर सवाल के जवाब है पापा
मेरी खुशी के इज़हार है पापा
बुरी संगत में न पड़ जाऊँ
इसका रखते ख्याल है पापा

मेरी हर उलझन सुलझातें
दोस्तों से भी सुलह कराते
असमंजस मैं पड़ जाने पर
मेरा आत्मविश्वास जागते

मेरे अच्छे दोस्त है पापा
हर मुश्किल है आसान है पापा
मेरे जीवन के आधार है पापा
सारी खुशियों के सार है पापा

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