Poem on Clouds in Hindi – बादल पर कविता

Poem on Clouds in Hindi – बादल पर कविता

घनर घनर बादल गरजे
चम-चम-चम बिजुलिया चमके
तड़ तड़ तड़ तड़िता के तड़के
घर आँगन तरु पादप झूमे

घुमड़ घुमड़ के बादल डोले
आंधी के संग पत्ते बोले
आरसे से धरती प्यासी थी
जन जीवन थे ओले बोले

आंधी के संग बारिश आयी
सूखे वृक्षों ने नव जीवन पायी
लता कुसुम खिल गए उपवन में
मोर पपीहा नाचन लगे वन में

तप्ती धरती शीतल होय गयी
हर चेहरे पर मुस्कान आयी गयी
रिमझिम रिमझिम वर्षा पानी
होटों पर है गीत पुरानी

सोंधी सोंधी मिटटी की खुशबू
उमंग तन मन में भर देती
मस्त पवन करती मनमानी
नवऋतु की है मौसम सुहानी

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