Navratri in Hindi – नवरात्री पूजा विधि और इसका महत्त्व

Navratri in Hindi – नवरात्री पूजा विधि और इसका महत्त्व

1 नवरात्री कैसे मनाये
2 नवरात्री पूजा विधि
3 नवरात्री का महत्त्व क्या है
4 नवरात्री में माँ को कौन कौन से फूल चढ़ाए जातें है
5 नवरात्री में माता को क्या क्या भोग लगाए
6 नवरात्री साल में दो बार क्यों आता है
7 नवरात्री नौ दिन क्यों मनाते है
8 नवरात्री के रंग
9 नवरात्री पूजा में कौन सा दिन सबसे महत्वपूर्ण है
10 नवरात्री में उपवास / व्रत क्यों रखते है
11 उपवास रखने के फायदे
12 नवरात्री में क्या नहीं करना चाहिए
13 इस व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए
14 इस व्रत में क्या खाना चाहिए
15 किस रंग के वस्त्र पहनना चाहिए

नवरात्री कैसे मनाये – How to celebrate Navratri

नवरात्री खुशियों और उमंगो का त्यौहार है । यह त्यौहार वर्ष मैं दो बार आता है । चैत्र मॉस के शुक्ल (March-April) पक्ष में और आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष में (September-October) । इस समय वातावरण में काफी गहमगहमी होती है, बड़े बड़े सजे हुए पंडाल और माँ की भव्य प्रतिमा चारों और नज़र आतें है । लोग भी सजधज कर माँ के दर्शन हेतु निकलते है । चैत्र नवरात्री का त्यौहार राम के विजय के उपलक्ष में मनाया जाता है । इस समय माँ के नौ रूपों की विधिवत पूजा की जाती है । हरेक मंदिर में माँ का पाठ होता है लेकिन कुछ लोग अपने घर पर भी कलश स्थापना करके सप्तशती दुर्गा का पाठ करते है। जो लोग घर पर नहीं कर पाते वह ब्रह्मणो से भी करवाते है ।

नवरात्री पूजा विधि – Navratri Puja Vidhi

आपके घर का मंदिर या एकांत स्थान जहाँ पर लोगो का जमावड़ा न हो । बैठने के लिए शुद्ध आसन , अगरबत्ती , दीपक, घी, हवं सामग्री , हवं कुंड या मिटटी का बर्तन जिस में हम हवं कर सके , समिधा (आम या अशोक की लकड़ी ) ।

रोड़ी, सिंदूर अक्षत, साबुत सुपारी, एक रूपए का सिक्का, हाथ में बढ़ने के लिए कलेवा , मिटटी का ढक्कन वाला कलश, मिटटी के गहरा प्लेट, रेतीली मिटटी, जौ, माँ का सुन्दर फोटो या प्रतिमा , फल फूल मिठाई और माँ की चुनरी ।

महालय के दिन एकदम सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहन ले , जिस स्थान पर आपको कलश स्थापित करनी है उस जगह की साफ़ करले, फिर अपने से थोड़ा ऊंचा जगह पर माँ की प्रतिमा स्थापित कर दे । उसके ठीक निचे प्लेट में रेतीली मिटटी डाले और जौ को थोड़ा पानी दाल कर मिला ले । कलश को धोकर स्वच्छ जल भर ले और उस पर सिंदूर से स्वस्तिक चिन्ह बनाये और ढक्कन के गले पर कलेवा लपेट दें। जल के अंदर सिंदूर, रोड़ी, अक्षत, सुपाड़ी और एक रूपए का सिक्का डाल दे। ढक्कन ढक दें और ढक्कन के ऊपर थोड़ा चावल रखे और कच्चा नारियल जो लाल कपडे में लपेटा हो उस पर रख दें कलश को प्लेट के ऊपर रख दें।

पूजन की तैयारी हो गयी और आप स्वयं आसान पर बैठ जाएं, अपने हाथ पर कलेवा पहन ले और कलश की पूजा करें ।

कलश की पूजन विधि

सब से पहले अपने मस्तक पर टिका लगाएं , अपने हाथ से थोड़ी सी सिंदूर , रोड़ी , अक्षत तथा पुष्प कलश पर चढ़ाए , दीपक और अगरबत्ती जला ले , अपने हाथ को धोकर भोग की थाली माँ ले सामने रख दें और फिर पाठ प्रारम्भ करें ।

नवरात्री का महत्त्व क्या है

नवरात्री पूजा को कई अन्य नामो से भी जाना जाता है , उतर भारतीय राज्यों में इसे दशहरा के नाम से जाना जाता है, जैसे की नाम से भी पता चलता है की दस सर खंडित हो गए । इस समय में माँ की पूजा के साथ साथ दशमी के दिन बहुत बड़ा मेला लगता है और कई जगह रामलीला भी होती है।

पश्चिम बंगाल में इस त्यौहार को दुर्गा पूजा के नाम से जानते है । महिसासुर बहुत बड़ा राक्षस था जिसे वरदान मिला हुआ था की वह किसी स्त्री के द्वारा ही मारा जायेगा इसलिए माँ दुर्गा ने अवतार लेकर माहिससुर का वध किया। इस त्यौहार से यह स्पष्ट होता ही की बुराई पर अच्छे की जीत होती है , ये त्यौहार हम सभी के अंदर दृढ़ संकल्प और वयाचारिक शक्ति उत्पन्न करता है ।

आध्यात्मिक दृष्टिकोण से माँ दुर्गा शक्ति की देवी है , उनके पूजा , उपासना करने से हम सभी को बौधिक, शारीरिक और मानसिक शक्ति मिलती है जिससे समाज एवं परिवार में हमारा मान सम्मान और प्रतिष्टा बढ़ता है ।

नवरात्री में माँ को कौन कौन से फूल चढ़ाए जातें है|

नवरात्री के दिनों में माँ को तरह तरह के फूल चढ़ा कर उन्हें प्रसन्न करना चाहते है। माँ दुर्गा भी इन पुष्पों को स्वीकार कर अपने भक्तो पर प्रसन्न होती है और उन्हें मन इच्छित फल देती है । मैं इन फूलो के नाम और इसे चढ़ाने का महत्त्व बता रही हूँ ।

1 अपराजिता – अपराजिता फूल इसके पत्तो के साथ माँ को चढ़ाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस पुष्प को चढ़ाने से माँ अत्यंत प्रसन्न होती है। कहते है राम चंद्र जी जब लंका पर चढ़ाई करने जा रहे थे तो इस पुष्प को पत्ते के साथ माँ को पूजा की थी और बाद में इसे प्रसाद स्वरुप अपने पास रख लिया था और लंका पर विजय पाई थी ।

2 गुड़हल (जवा-कुसुम) – यह पुष्प माँ को अत्यंत प्रिय है, यह सौभाग्यदायनी पुष्प है । दुष्ट महिसासुर राक्षस का वध करने के लिए सभी देवताओ ने माँ की पूजा की थी और उस पूजा में गुड़हल का पुष्प चढ़ा के माँ को प्रसन्न किया था ।

3  अनार फूल – इस पुष्प से माँ की पूजा करने से सभी कष्ट दूर हो जातें है, इस पुष्प को चिंतामणि भी कहा गया है । लक्ष्मण जब मरणासन्न थे तब श्री राम ने इस पुष्प से माँ का पूजा किया था ।

4 अशोक फूल – जैसा की नाम से ही पता चलता है की इस पुष्प के द्वारा पूजा करने से हमारे सारे शोक माँ हर लेती है और हमें कृषि प्रदान करती है ।

5  शुष्क और जल कमल – कमल पुष्प समर्पित करने से माता हमारे जीवन को कमल के सामान सुन्दर और विकसित कर देती है। कमल लक्ष्मी का प्रतिक होता , इस पुष्प को समर्पित करने से माता लक्ष्मी रूप में हमारे घर में निवास करती है ।

6 कनेर का फूल – यह फूल तरक्की का प्रतिक है , इस पुष्प को समर्पित करने से हर रुके हुए कार्य पूरा होता है और हम तरक्की की और उन्मुख होते है ।

7  बेला और जयंती फूल – इस पुष्प से पूजा करने से माँ अपने भक्तो के मन को शांत और पवित्र कर देती है और अपने भक्त के जीवन को संयम करने में सहयता करती है ।

नवरात्री में माता को क्या क्या भोग लगाए

नवरात्री पूजा भक्तो में उत्साह तो भर्ती ही है साथ में माँ के प्रति अटूट विश्वास और निष्ठा जगाता है। माँ जो पूरे संसार का पालनहार है उन्हें मनुस्य क्या दे सकता है फिर भी पूजा अर्चना और हमारी श्रद्धा के अनुसार माँ को कुछ चीजे जो अत्यंत प्रिय है उनका भोग कगना चाहिए ।
माँ को गोविंदभोग चावल सर्वप्रिय होने के कारन पूरे नौ दिन के भोग में ये शामिल किया जाता है । नौ तरह के फल, बताशा, लड्डू , छोटी इलाइची, लौंग, छैना, सूखा फल का भोग लगाया जाता है ।

अष्टमी के दिन १३ तरह के अनाज से बना भोजन तथा पकवान बनाकर केले के पत्ते पर भोग लगाना चाहिए ।

नवरात्री साल में दो बार क्यों आता है

वैसे तो नवरात्री साल में 4 बार आता है , जिसमे 2 गुप्त नवरात्री होते है और एक चैत्र मॉस की नवरात्री और एक शारदीय नवरात्री होता है।
इस दो नवरात्री को मानाने का अलग अलग कारन है।

चैत्र नवरात्री व बासंती पूजा – इस पूजा को आत्मशुद्धि और मुक्ति का स्वर माना गया है । हिन्दू पंचांग के अनुसार यह पूजा सर्वोत्तम और सर्वश्रेष्ठ माना गया है । कहते है माता की इस मॉस की नवरात्री पूजा श्री राम ने लंका पर विजय पाने के लिए की थी । लंका का राजा रावण जिसने सीता का अपहरण किया और सारे संसार की कष्ट दे रहा था, उसके वध के लिए श्री राम ने नवमी के दिन माँ का पूजा किया और रावण के वध करके वापस लौटें ।

शारदीय नवरात्री पूजा – इस पूजा को वैभव और भोग प्रदान करने का मार्ग बताया गया है । यह सितम्बर और अक्टूबर महीने के बीच में आता है ।महिसासुर नाम का राक्षश जो अत्यंत बलवान और दुष्ट था , उसने ब्रह्मा जी से वरदान पाकर बहुत शक्तिशाली हो गया था , वह अपने छल बल से मायावी रूप धारण कर लेता था । उसने तीनो लोको पर अपना अधिपत्य जमा लिया था , इसके उत्पात को देखकर सभी देवता ने माँ दुर्गा का आह्वान किया और इस राक्षस के वध करने की प्रार्थना की। महिसासुर की वरदान मिला हुआ था की इसकी मृत्यु स्त्री के हाथ होगा, माँ ने इसका वध करके संसार को इससे मुक्त किया। माँ की इसी जीत की ख़ुशी में नवरात्री पूजा की जाती है ।

नवरात्री नौ दिन क्यों मनाते है

वैसे तो माँ के इतने रूप है की उनका गणना करना मनुस्य के वश की बात नहीं ।
माँ आदिशक्ति है , इन्होने पुरे ब्रह्माण्ड की रचा की है, ये निराकार हो कर भी अपने भक्तो की संतुष्टि और प्रसन्नता के लिए समय समय पर अनेक रूपों मैं प्रकट हुई है

नवरात्री में माँ की नौ दिन विशेष रूपों में पूजा की जाती है इसलिए प्रत्येक दिन माँ के अलग अलग नाम से पूजा की जाती है ।
प्रथम दिन माँ की पूजा शैलपुत्री के नाम से की जाती है जो हिमालय की पुत्री कहलाती है । दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है , इस रूप में माँ ने शिवजी को पाने के लिए अत्यंत कठिन तप किया था । तीसरे दिन माँ का चंद्रघंटा के रूप में पूजा की जाती है। चौथे दिन कुष्मांडा के नाम से माता पूजी जाती है ।
पांचवे दिन स्कन्धमाता के रूप में पूजी जाती है जो कार्तिकेय की माता के रूप में जानी जाती है । छटे दिन माँ कात्यानी के रूप में पूजनीय है ।
सातवें दिन कालरात्रि के रूप में इनके भक्त पूजते है । ये सर्वप्रिय माता कहलाती है । आठवें दिन महागौरी के रूप में पूजी जाती है , इस दिन कुमारी कन्याओ को भोजन कराकर तथा उन्हें ओढ़नी के साथ कुछ उपहार देकर माता को प्रसन्न किया जाता है । नौवे दिन माँ सिद्धिदात्री के रूप में पूजी जाती है और अपने भक्तो को दर्शन देकर निहाल कर देती है । इस प्रकार प्रत्येक दिन माँ के नौ रूपों की पूजा की जाती है ।

नवरात्री के रंग

नवरात्री पूजा माँ के नौ रूपों की पूजा होती है इसलिए इस उत्सव में रंग भी माता के अलग अलग रूपों के अनुसार की जाती है । वैसे बहुत से लोग दिन के अनुसार रंग decide करते है लेकिन मेरा जहाँ तक माना है की नवरात्री में माँ के रूप के अनुसार रंग decide करने चाहिए ।

प्रथम दिन –  शैलपुत्री – लाल रंग
दूसरा दिन – ब्रह्मचारिणी – गेरुआ (orange )
तीसरा दिन – चंद्र घंटा – श्वेत
चौथा दिन – कुष्मांडा – पीला
पांचवा – स्कन्धमाता – हरा
छठे – कात्यानी – गुलाबी / purple
सातवां – कालरात्रि – काला या नीला
आठवां – महागौरी – सुनहरा
नौवा – सिद्धिदात्री – गहरा लाल

नवरात्री पूजा में कौन सा दिन सबसे महत्वपूर्ण है ।

नवरात्री में महाष्टमी और महानवमी सबसे श्रेष्ट मन जाता है । इस दिन घर घर और मंदिरो में हवन और पूजा होता है।

नवरात्री में उपवास / व्रत क्यों रखते है

उपवास रखने से आध्यात्मिक , शारीरिक और मानसिक कई फायदे होते है । सबसे पहले यह जाने की व्रत और उपवास कितने तरह के होतें है। यह मुख्य तीन प्रकार के होते है

1 नित्य – इस प्रकार का व्रत प्रतिदिन अर्थात निरंतर किया जाता है जैसे दैनिक जीवन में हम पूजा या meditation करते है ।
2 नैमित्तिक – यह उपवास किसी निमित के लिए करते है ।
3 कामनिक /काम्य – ये व्रत किसी कामना की पूर्ति के लिया किया जाता है ।

उपवास रखने के फायदे

1 व्रत करने से शारीरिक और मानसिक शुद्दिकरण होता है ।
2 हमारी संकल्प शक्ति बढ़ती है ।
3 शरीर और मन अधिक सक्षम और स्वस्थ रहता है
4 पाचन तंत्र को भी आराम मिलता है
5 मोटापे में भी फायदा होता है (निम्बू पानी और लौकी का जूस लेना चाहिए)
6 जुकाम में भी लाभ होता है
7 आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है
8 विचार, बुद्धि और ज्ञान में विकास होता है
9 एकाग्रता की क्षमता बढ़ती है
10 ईश्वर के प्रति हमारी निष्ठा बढ़ती है

नवरात्री में क्या नहीं करना चाहिए

मानव जीवन बड़ा ही अमूल्य धन है । हमारे कई जन्मो में किये गए अच्छे करने का फल है । इस शरीर को पाने के लिए तथा भारत वर्ष की मिटटी में जन्म पाने के लिए ईश्वर भी ललायित रहते है लेकिन हम मानव कई बार अपने महत्ता को भूल कर गलत कार्य कर बैठते है ।
यहाँ पर कुछ ऐसे कार्य है जो अकाटय रूप से निशेध है । वैसे तो ये कार्य कभी भी नहीं करना चाहिए लेकिन नवरात्र में विशेष रूप से नहीं करना चाहिए ।

1 झूठ नहीं बोलना चाहिए
2 किसी की निंदा या चुगली नहीं करना चाहिए
3 घर में कलह नहीं करना चाहिए
4 किसी के धन पर लालच नहीं करना चाहिए
5 सुबह देर से नहीं उठना चाहिए
6 शाम की नहीं सोना चाहिए
7 बिना नहाये भोजन नहीं करना चाहिए
8 हिंसा नहीं करना चाहिए
9 किसी का दिल नहीं दुखाना चाहिए
10 अनैतिक या व्यभिचारिक कार्य न करे
11 नशा न करे

इस व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए

1 छना-तला भोजन नहीं खाना चाहिए
2 प्याज, लहसुन और मांसाहारी भोजन नहीं करना चाहिए
3 मदयापान कदापि न करें
4 जायदा मिर्च मसाले से बना भोजन नहीं करना चाहिए

इस व्रत में क्या खाना चाहिए

1 इस व्रत में फलाहारी करना चाहिए
2 अधिक से अधिक जल और जूस का प्रयोग करना चाहिए
3 दूध, दही और छाछ का अधिक से अधिक प्रयोग करना चाहिए
4 कूटू का आटा , सिंघाड़े का आटा, भगर, रामदाना , सबुदाना और थोड़ा आलू का प्रयोग करना चाहिए

किस रंग के वस्त्र पहनना चाहिए

नवरात्री में नौ रंग जो decide किये गए है उसके अनुसार हम प्रत्येक दिन उस रंग के वस्त्र पहन सकते है या फिर नौ दिन सिर्फ गेरुआ रंग या श्वेत रंग का वस्त्र पहन सकते है , वैसे शास्त्र में वस्त्र के रंग के बारें में विस्तृत रूप में नहीं बताया गया है सिर्फ ये कहा गया है की जो भी वस्त्र पहने उसका रंग शांत होना चाहिए ताकि आपका मन भी अंदर से शांत रह सके।

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