Moral Stories in Hindi – बुद्धिमान मेढ़क

Moral Stories in Hindi – बुद्धिमान मेढ़क

किसी जंगल में एक तालाब था। उस तालाब में एक बहुत बड़ा मेंढक रहता था। मेंढक प्रायः पानी में ही रहता था। बहुत कम तालाब से बाहर निकलता। एक दिन धूप देखकर उसका मन किया की वह हरी- भरी घास पर बैठ धूप का आनंद लें। ऐसा सोचकर वह बाहर निकला और धूप का आनंद लेने लगा । तभी अचानक एक कौवा बगल वाले पेड़ पर बैठ गया। उसकी नजर उस मेंढक पर पड़ी। उसे मेंढक को देख कर लालच आ गया। वह सोचा, इतना मोटा ताजा मेंढक का मांस खाने में बहुत मजा आएगा। उसने उसे पकड़ने की योजना बनाई ।

Moral Stories in Hindi

कौआ उस समय वहां से उड़कर कहीं दूसरे पेड़ पर चला गया और दूर से उसकी हरकतों का जायजा लेने लगा । फिर वह मेंढक के पास गया दोस्ती करने का ढोंग रचाया लेकिन मेंढक उससे दोस्ती करना बिल्कुल नहीं चाहता था। थोड़ी देर के बाद ही मेंढक पानी के अंदर चला गया। सर्दी का मौसम था इसलिए मेंढक बीच-बीच में बड़ी सावधानी से बाहर निकलता था लेकिन कौआ बहुत ही दुष्ट था। वह मेंढक पर नजर बनाए रखता था।

दोपहर का टाइम था मेढ़क धूप की आनंद में मग्न था। तभी कौआ धीरे-धीरे दबे पांव से उसके नजदीक पहुंचा और उसको अपने पंजों से धर दबोचा। पहले तो वह बहुत घबराया । सोचने लगा अब तो यह दुष्ट हमें मार डालेगा । बचने का कोई रास्ता दिखाई नहीं देता। मेढ़क अपने आपको वह बड़ा असहाय महसूस कर रहा था। तभी अचानक उसके मन ने कहा, डरो मत ऐसे समय में डरना नहीं चाहिए बल्कि अपने अंदर के विवेक को जगाओ। किसी भी तरीके से अपने आप को बचाने के लिए उपाय निकालो। कुछ सोचो, रास्ता जरूर निकल आएगा । डरना नहीं, डरने से हमारा मस्तिष्क काम करना बंद कर देता है ।अपने आप को मजबूत करो, रास्ता जरुर मिलेगा।

अब तो मेंढक का दिमाग तेजी से चलने लगा। कौवे ने कहा मेंढक अब तो तू गया काम से। मैं तो तुझे मार कर खा ही लूंगा ।मेंढक ने कहा, कौवा मामा एक कहावत सुनी है तुमने- जाको रखे साइयां मर सके न कोई ।

कौआ ने कहा, ठीक हैं तुम अपना काम करो और मैं अपना करूंगा। कौवा उड़ता हुआ एक बहुत अंधेरे घर में पहुंचा और उसने बहुत ऊपर थे मेंढक को नीचे पटक दिया । दुष्ट कौआ उसके चारों तरफ उड़ना शुरू किया। यह सब वह मेढ़क को डराने के लिए कर रहा था। उसने कहा मेढ़क अब तुम्हें मरने से कोई नहीं बचा सकता। इस अंधेरे कमरे में हमारे और तुम्हारे सिवा कोई भी नहीं है ।मेंढक ने जोर से हंसते हुए कहा, हा… हा… हा… तुम्हें पता है इस कमरे में एक बहुत पुराना नाग रहता है । नाग हमारा मित्र है। देखो इस कमरे में एक बड़ा सा छेद है। इसी छेद के अंदर मेरा नाम मित्र रहता है ।तुमने मुझे जैसे ही मारने की कोशिश की वह बाहर निकल कर तुम्हें नोच-नोच कर खा जाएगा ।नाग का नाम सुनते ही कौवा डर गया। उसके हाथ- पाव फूलने लगे। फिर भी अपने डर को छुपाने के लिए मेंढक से बोला, अरे झूठे ! क्या फालतू की बात बोलता है। यहां कोई नाग -वाग नहीं रहता ।मेंढक ने कहा तुम्हें टेस्ट करना है क्या ? तो रुको मैं अभी अपने मित्र को बुलाता हूँ । कौआ डर गया ।

उसने तुरंत मेंढक को जोर से दबोचा और वहां से उड़ चला। उड़ता गया, उड़ता गया बहुत दूर लेकर गया। एक बहुत विशाल पेड़ था । पेड़ के अंदर बहुत बड़ा छेद था ।उसी छेद में कौवे ने उसे ज़ोर से धक्का दिया । ताकि मेढक बुरी तरीके से घायल हो जाए ।और डर भी जाए। पर मेंढक अब डरने वाला नहीं था। कौवे ने कहा ,अब यहां अपने नग मित्र को बुला । देखता हूँ तुझे यहां कौन बचता हैं ? मेढ़क फिर ठहाका लगाया , कहा यहां तो मेरे ऐसे मित्र हैं जो मेरी आवाज़ सुनते ही तेरे नामो निशाँ मिटा देगें । मेढ़क ने कौए से कहा अपनी नजर ऊपर उठा ,जितने भी चील ,गिद्ध पक्षी हैं सब हमारे बंधू हैं । कौए ने देखा की मेढ़क की बात में सच्चाई हैं ।उसे गुस्सा आया पर कुछ कर नहीं पाया ।

वहां से मेढ़क को दबोच कर फिर उड़ा।पहुंच गया एक पुराने खंडर पर ।मेढ़क चहकते हुए बोला अरे मामा ये कहाँ ले आए हो ?ये तो हमारे प्रिय देवता शिव का मंदिर हैं । कौआ जोर से चिल्लाया ,ये कोई शिव का मंदिर नहीं हैं ।ये तेरी मौत का मंदिर हैं । मेढ़क ने कहा मेरी बात मानो अगर मुझे छूने की भी कोशिश की तो भोले बाबा तुमको भस्म कर देगें। कौए ने पता लगाया तो वास्तव में यह शिव मंदिर ही था।

अब तो कौए को भूख के मारे जान निकल रही थी। पर करे तो क्या करे ? उसने मेढ़क को बड़ी जोरसे पकड़ा और कहा मैं तुझे वहीं खाऊंगा जहाँ से लेकर आया था । मेढ़क बोला बहुत खूब मामा । आप सच में बहुत बुद्धिमान हो । कौए ने वहां पहुंच कर पेड़ के ऊपर से मेढ़क को गिरा दिया और झट से उसके ऊपर बैठ गया । मेढ़क बोला अरे मामा थोड़ा तो धैर्य रखो । मारने से पहले मरने वाले की इच्छा पूछी जाती हैं नहीं तो उसका श्राप लगता हैं । आपने मुझे खाने के लिए इतना कष्ट किया हैं,थोड़ा और कर लो प्लीज़। कौए ने कहा बताओ तुम्हारी अंतिम इच्छा क्या हैं ?

मेढ़क ने बड़े प्यार से कहा मामा, आपकी चोंच बिलकुल BLUNT कृपया इसे SHARP कर लें । कौआ खुश होकर बोला ,ये तो एक मिंट का काम हैं । तू यहां से कहीं मत जाना । मैं यूं गया और यूं आया । मेढ़क ने कहा ठीक हैं, मैं आपका इंतजार करता हूँ । इधर कौआ गया और इधर मेढ़क अपने तालाब में ।

पानी में जाते ही मेढ़क चिल्लाया दुष्ट कौए अपनी चोंच नहीं दिमाग SHARP कर ले । टा…..टा ………..बाय……….बाय ! THANK YOU कौआ मामा !

मेरे प्यारे मित्रों इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती हैं की मुसीबत के समय हमारा विवेक ही मित्र होता

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