Malala Yousafzai Biography in Hindi – मलाला यूसुफ़ज़ई का जीवन परिचय

Malala Yousafzai Biography in Hindi – मलाला यूसुफ़ज़ई का जीवन परिचय

मलाला यूसुफ़ज़ई (Malala Yousafzai) बच्चों के अधिकारों की तथा लड़कियों की शिक्षा की पक्षधर हैं । ये बच्चों की कार्यकर्ता के रूप में जानी जाती हैं । अपनी छोटी -सी उम्र में ही उन्होंने आतंकी तालिबानियों (Taliban) के विरुद्ध जो अदम्य सहस का परिचय दिया है वो काविले तारीफ है । इस उम्र के बच्चे तो सही और गलत में फर्क करना भी नहीं जानते और इन्होने इतने बड़े काम का बीड़ा उठा लिया । तभी तो आज ये विश्व में सबसे छोटी उम्र की नोबेल पुरस्कार पाने वाली प्रथम महिला हैं ।

परिचय – मलाला का जन्म 12 जुलाई 1997 को पाकिस्तान में खैबर – पख्तूनख्वाह प्रान्त में स्वात जिले के मिंगोरा में हुआ था । उनके पिता का नाम जियाउद्दीन यूसुफ़ज़ई है । ये वहां स्कूल चलाते थे । मिंगोरा पर तालिबान ने 2007 से मई 2009 तक कब्ज़ा कर लिया था ।

Malala Yousafzai Biography in Hindi

बाल्यावस्था में शिक्षा के लिए संघर्ष – स्थिति ऐसी भयावह हो गई थी की तालिबानियों के भय से लड़कियों ने स्कूल जाना बंद कर दिया था । मलाला का संघर्ष यहीं से शुरू हो गया । इन्होने अपनी 11 साल की उम्र में डायरी लिखनी शुरू कर दी । मात्र 13 वर्ष की आयु में उन्होंने तालिबान शासन के अत्याचारों के बारे में एक छद्म नाम “गुल मकई” से बीबीसी के लिए एक ब्लॉगिंग की और तभी से मलाला लोगों की नायिका बन गई । अपनी डायरी में मलाला ने लिखा था ,” आज स्कूल का आखरी दिन था, इस लिए फिल्ड में कुछ ज्यादा देर खेलने का फैसला किया। मेरा मानना है की एक दिन स्कूल खुल जाएगा लेकिन जाते समय स्कूल की इमारत को इस तरह देखा जैसे मैं यहां फिर कभी नहीं आऊंगी ।”

मलाला ने जब से ब्लॉग और मीडिया में तालिबान के आतंक के बारे में लिखना शुरू किया, ये लोग उसके जान के पीछे पड़ गए। उसे मारने के लिए लगातार धमकियां मिलने लगी । उन दिनों तालिबान ने लड़कियों के स्कूल जाने पर पाबंदी लगा दी थी। लड़कियों को TV देखने पर भी रोक लगा दिया था, लेकिन मलाला ने अपनी डायरी के माध्यम से अपने क्षेत्र के लोगों को न केवल जागरुक किया बल्कि तालिबान के विरुद्ध खड़ा भी किया।

तालिबानियों ने स्वात को 2007 में अपने कब्जे में ले लिया था। यहां तक की कार में म्यूजिक से लेकर बाहर खेलने कूदने तक पर लड़कियों की पाबंदी लगा दी थी। अपने अनुभवों के आधार पर मलाला ने बीबीसी उर्दू सेवा (BBC Urdu) के लिए जनवरी 2009 में एक डायरी लिखी थी। जिसमें उन्होंने लिखा था कि ” TV देखने पर रोक लगाने के कारण वह अपना पसंदीदा भारतीय सीरियल राजा की आएगी बारात नहीं देख पाती थी।

तालिबानियों का मनाला पर अटैक– 2009 में न्यूयॉर्क टाइम्स ने मलाला पर एक फिल्म बनाई इसमें स्वात में तालिबानियों के आतंक का वर्णन किया गया। तालिबान का आतंक और महिलाओं की शिक्षा पर प्रतिबन्ध के विषय पर बनी इस फिल्म के दौरान मलाला खुद को रोक ना पाई और कैमरे के सामने फूट-फूटकर रोने लगी। वह डॉक्टर बनना चाहती थी; जिस पर तालिबानियों ने पानी फेर दिया था।

9 अक्टूबर 2012 को जब वह अपने कुछ दोस्तों के साथ स्कूल से परीक्षा देकर लौट रही थी, तभी तालिबानियों ने उन पर हमला कर दिया। उसके सिर में गोली लगी थी, जिसके कारण वह बेहोश हो गई थी। मलाला को इलाज के लिए ब्रिटेन के क्वीन एलिज़ाबेथ अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों के अथक प्रयास से उसे बचा लिया गया। तालिबानी हमले के बाद मलाला के लिए विश्व भर में दुआ की गई। इसके बाद भी मलाला को मारने की काफी कोशिश की गई। फिर तालिबानियों ने इनको मारने के लिए फतवा जारी किया। पर मलाला तनिक भी न डरी। उसने कहा, “गोली लगने से मेरा डर मरा है, मैं नहीं ।”

मलाला की आत्मकथा – “I am Mlala : The girl who stood up for education and shot up by taliban” का लंदन में 8 अक्टूबर 2013 को विमोचन किया गया। अपनी आत्मकथा में उन्होंने अपने अनुभवों का उल्लेख किया है । उस समय मलाला बर्मिंघम के एजबेस्टन हाई स्कूल में पढ़ रही थी।

मलाला के पिता को वर्मिंघम में पाकिस्तान दूतावास में नौकरी दी गई तथा उनका पूरा परिवार ब्रिटेन में रह रहा था।

मलाला का पाकिस्तान लौटना– 9 मार्च 2018 को मलाला अपने स्वदेश लौटी और वहां के प्राइम मिनिस्टर शाहिद खान अब्बासी से मिली। वहां एक emotional स्पीच भी दिया। उन्होंने कहा मैं 5 वर्षों से अपनी मातृभूमि लौटने का प्रतीक्षा कर रही थी। आज अपनी मातृभूमि पर आकर मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा है ।

मलाला के स्वस्थ होने के बाद उन्हें कई पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

पुरस्कार और सम्मान

* 2011 में पाकिस्तान का राष्ट्रीय युवा शांति पुरस्कार- 19 दिसंबर 2011 को पाकिस्तानी सरकार द्वारा पाकिस्तान का प्रथम युवाओं के लिए राष्ट्रीय शांति पुरस्कार मलाला को मिला।

* 2011 में अंतरराष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार के लिए नामांकन- अंतर्राष्ट्रीय बच्चों की वकालत करने वाले समूह किड्स राइट फाउंडेशन मलाला को अंतरराष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया ।

* 2013 में मेक्सिको में समानता पुरस्कार घोषित किया गया ।

* 2013 में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार का सम्मान मलाला को मिला।

* 2013 में ससारोव पुरस्कार

* नोबेल शांति पुरस्कार

मलाला को 2014 का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की गई। यह पुरस्कार उन्हें भारत के कैलाश सत्यार्थी के साथ संयुक्त रूप से दिया गया। मलाला सबसे कम आयु के नोबेल पुरस्कार विजेता बन गईं हैं । उन्होंने मात्र 17 वर्ष की आयु में इस पुरस्कार को प्राप्त किया।

* 2017 में U N का शांतिदूत मलाला को बनाया गया है। अब तक की सबसे कम उम्र में शांति दूत बनने वाली महिला है।

* उनको सम्मान देते हुए एस्टरॉयड 316201 का नाम 316201 मलाला रखा गया है।

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