Mahatma Gandhi Biography in Hindi – महात्मा गांधी का जीवन परिचय

Mahatma Gandhi Biography in Hindi – महात्मा गांधी का जीवन परिचय

 

हमारे भारतवर्ष को स्वतंत्र हुए 69 वर्ष हो चुके हैं लेकिन इसे स्वतंत्र कराने में जिन- जिन महापुरुषों ने अपना बलिदान अथवा सहयोग दिया है उनमें से कुछ नाम हमारे दिलो-दिमाग पर इस तरह अंकित हो गए हैं मानो अमिट हो गए। इन महापुरुषों में से सबसे अग्रणी महापुरुष महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) है। सरल,साधारण व्यक्तित्व का व्यक्ति अपने सिद्धांतों का इतना पक्का कि उसके आगे अंग्रेजो ने भी घुटने टेक दिए। महात्मा गांधी ने पूरा जीवन सत्य और अहिंसा का सिद्धांत अपनाया और इन्हीं उसूलों पर चलकर उन्होंने हमें आजादी दिलाई। यद्यपि स्वतंत्रता संग्राम के समय हमारे यहां दो दल हो गए थे जबकि उद्देश्य दोनों का एक ही था। एक नरम दल जिसका नेतृत्व गांधीजी कर रहे थे और दूसरा गरम दल जिसमें सुभाष चंद्र बोस (Subhash chandra bose), भगत सिंह (Bhagat Singh) , चंद्रशेखर आजाद (Chandrasekhar Aazad)  इत्यादि थे । सुभाष चंद्र बोस जब रंगून से रेडियो पर प्रसारण कर रहे थे तो उन्होंने गांधी जी को राष्ट्रपिता कहकर संबोधन किया था और उनसे आशीर्वाद मांगा था। वास्तव में गांधी जी हमारे राष्ट्रपिता है क्योंकि उन्होंने बिना खून खराबे के हमें आजादी दिलाई। उन्होंने सत्याग्रह आंदोलन चलकर एक नई किन्तु सशक्त परम्परा चलाया, जिसका लोहा अग्रेंज भी मानते थे । इस संदर्भ में एक गीत है जिसके बोल हैं – दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।

नाम- मोहनदास करमचंद गांधी
जन्म- 2 अक्टूबर 1869
जन्म स्थान- गुजरात के पोरबंदर क्षेत्र में काठियावाड़ गांव
पिता- करमचंद गांधी
माता- पुतलीबाई
शिक्षा- बैरिस्टर
पत्नी- कस्तूरबा गांधी
संतान- 4 पुत्र- हरिलाल, मणिलाल, रामदास, देवदास
मृत्यु- 30 जनवरी 1948

प्रारंभिक जीवन- महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। इनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 में गुजरात के काठियावाड़ नामक गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम करमचंद गांधी और माता का नाम पुतलीबाई था। इनके पिता अपने गांव के दीवान थे। माता धार्मिक और सरल स्वभाव की महिला थी। माता की धार्मिक प्रवृत्ति का प्रभाव गांधी जी के ऊपर आजीवन रहा। बचपन में मोहनदास बड़े ही डरपोक थे।वे भूत प्रेत और अंधेरा से बहुत डरते थे। उनको निडर बनाने में इनकी धायी माता का हाथ रहा।

बचपन में सत्य हरिश्चंद्र का नाटक देख कर इनके जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा और इस प्रभाव के कारण उन्होंने पूरा जीवन सत्य की राह पर चलना स्वीकार किया। दूसरा श्रवण कुमार की पुस्तक पढ़ कर श्रवण की मातृ पितृ भक्ति से बहुत प्रभावित हुए और वैसा ही सेवा भाव अपने माता-पिता के साथ भी गांधीजी रखते थे। अपने मिलने- जुलने वालों को भी ऐसा ही करने का सलाह देते थे।

विवाह -गांधी जी की शादी बचपन में ही हो गई थी।जब स्वाम 13 वर्ष के थे और कस्तूरबा 14 की थी।कस्तूरबा को हम सब प्यार से ” बा ” भी कहते हैं। कस्तूरबा का धार्मिक विचार इनके पुत्र मोहनदास पर करम चन्द गाँधी पर बहुत अधिक पड़ा था। गाँधी जी के श्रेध्य और इष्ट देव मर्यादा पुरुष श्री राम थे।

इनका प्रिय भजन था -” रघुपति राघव राजा राम पतितपावन सीताराम अल्ला ईश्वर तेरा नाम सबको सुमति दे भगवान “

शिक्षा -पोरबंदर से गांधी जी ने मिडिल परीक्षा पास की। 1887 में राजकोट से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण कर लिया। 1888 में उन्होंने भावनगर के सामल दास कॉलेज से डिग्री प्राप्त की। इसके बाद गांधी जी को बैरिस्टरी की पढ़ाई के लिए उनके माता पिता ने उन्हें लंदन भेज दिया। वहां से बैरिस्टर की पढ़ाई पूरी करके भारत लौटे।

दक्षिण अफ्रीका के लिए प्रस्थान– गांधीजी 1893 में दादा अब्दुल्ला की कंपनी का मुकदमा चलाने के लिए दक्षिण अफ्रीका गए। वहां पर उन्हें अन्याय, अत्याचार, रंगभेद आदि का सामना करना पड़ा। अंग्रेजों द्वारा कई बार अपमानित भी होना पड़ा। फर्स्ट क्लास का टिकट होते हुए भी इन्हें कंपार्टमेंट से बाहर फेंक दिया गया। गांधी जी को भेदभाव तथा उनका अमानवीय व्यव्हार सहन नहीं हो पाया। दक्षिण अफ्रीका में उन्होंने भारतीय लोगों को एकत्रित करके 1894 में “नेशनल इंडियन कांग्रेस” की स्थापना की। उन्होंने अन्याय के विरोध में “अवज्ञा आंदोलन” चलाया और यह आंदोलन पूरा करके वापस भारत लौट आए।

गांधी जी का स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेना- 1915 में गांधी जी जब अपने देश लौटे तो उस समय भारत में अंग्रेजों द्वारा बहुत अत्याचार हो रहे थे। अपने देश के जमींदार भी गरीब लोगों का और किसानों पर तरह तरह के जुल्म ढा रहे थे। भारत में उस समय चारों तरफ गरीबी, गंदगी और बीमारी फैली हुई थी। गुजरात के खेड़ा गांव की स्थिति भी अकाल तथा अंग्रेजों के अत्याचार के कारण अत्यंत दयनीय हो गई थी। गांधी जी ने खेड़ा गांव से ही अग्रेजो के खिलाफ अपना विरोध शुरू किया। उन्होंने वहां के लोगों को एकत्रित किया। वहां एक आश्रम बनाया और अपने समर्थकों के साथ मिलकर गांव की सफाई का कार्य सर्वप्रथम शुरू किया तत्पश्चात गांव में एक स्कूल तथा हॉस्पिटल का भी निर्माण किया।

गांधी जी ने खेड़ा गांव से सत्याग्रह आंदोलन शुरु किया । आंदोलन शुरू होते ही अंग्रेजों ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया । इसके विरोध में गांधीजी के समर्थकों तथा हजारों लोगों ने रैलियां निकाली और उन्हें बिना किसी शर्त रिहा करने की आवाज़ उठाई । अंग्रेज जनता के आगे कुछ ना कर पाए। अंग्रेजों को उन्हें रिहा करना पड़ा ।जमींदारों के खिलाफ भी गांधी जी ने विरोध प्रदर्शन किया जिसका असर सकरात्मा रूप से पड़ा ।

असहयोग आंदोलन- खेड़ा आंदोलन के बाद गांधी जी ने पूरे भारत में 1920 में असहयोग आंदोलन छेड़ दिया और इसका मुख्य हथियार “सत्य और अहिंसा” था । इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य भारतीयों द्वारा अंग्रेजी सरकार की किसी भी तरह से सहायता न की जाए। लेकिन ऐसा करते वक्त यह ध्यान रखना है कि किसी तरह का हिंसा बिल्कुल ना हो। इस आंदोलन में राष्ट्रव्यापी स्तर पर लोग जुड़े और ब्रिटिश सरकार का सहयोग देना बंद कर दिया। इस आंदोलन में भाग लेने के लिए लोगों ने अपनी नौकरी फैक्ट्री कार्यालय सब कुछ छोड़ दिया। लोगों ने अपने बच्चों को सरकारी स्कूल तथा कॉलेज से निकाल लिया। इस समय अपने देश में अनपढ़ की स्थिति हो गई लेकिन लोगों ने आज़ादी की लिए इसको सहन करना ज्यादा सही समझा।

उस समय कुछ ऐसा माहौल बन गया था कि लोगों को ऐसा लग रहा था कि आजादी शायद इस समय हमें मिल जाएगी। आंदोलन चरम सीमा चल रहा था , तभी गांधी जी ने चौरा चौरी नामक स्थान पर एक घटना के कारण इस आंदोलन को वापस लेने का निर्णय ले लिया।

इस घटना के दौरान हुआ यह था कि उत्तर प्रदेश में चौरा चौरी स्थान पर लोग शांतिपूर्ण ढंग से रैली निकाल रहे थे। इसी बीच में अंग्रेजों ने भारतीय लोगों पर गोली चला दी। कुछ लोगों की मौत भी हो गई। उसमें से कुछ लोगों ने गुस्से में आकर पुलिस स्टेशन में आग लगा दी और उनके 22 सैनिकों की हत्या भी कर दी। इसी कारण गांधी जी ने अपना यह असहयोग आंदोलन वापस ले लिया।

सविनय अवज्ञा आंदोलन- 1930 में गांधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ किया। इस आंदोलन में यह था कि अंग्रेजों द्वारा जो भी नियम या कानून बनाए जाएंगे उनका पालन हम भारतीय नहीं करेंगे। उसकी अवहेलना करेंगे। जैसे- अंग्रेजों ने हम भारतीयों को नमक नहीं बनाने का कानून पास किया पर महात्मा गांधी ने 1930 में इस कानून को तोड़ने के लिए दांडी यात्रा शुरू किया। दांडी नामक स्थान पर पहुंच कर उन्होंने नमक बनाया। यह भी राष्ट्रव्यापी आंदोलन बना इससे ब्रिटिश सरकार के नमक बनाने के एकाधिकार पर सीधा प्रहार था ।

26 जनवरी 1930 में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा कर दी। ब्रिटिश सरकार के खिलाफ सविनय अवज्ञा आंदोलन पूर्ण रूप से सफल हुआ ।

भारत छोड़ो आंदोलन- 1940 तक आते-आते तक जनता में आजादी के लिए आक्रोश और ब्रिटिश के लिए गुस्सा बढ़ रहा था। महिला, पुरुष, बच्चे, बूढ़े, जवान सभी में जोश और आक्रोश का सैलाब उमड़ रहा था। गांधी जी इस स्थिति को अच्छी तरीके से भाप रहे थे। इसका सही दिशा में प्रयोग करके उन्होंने बहुत बड़े पैमाने पर 1942 में अंग्रेजों “भारत छोड़ो” आंदोलन शुरू किया। यह आंदोलन सभी आंदोलनों से बहुत अधिक बड़ा और प्रभावशाली रहा। यह अंग्रेजी सरकार के लिए बहुत बड़ी चुनौती थी। लेकिन यह आंदोलन पूर्ण रुप से सफल नहीं हो सका। इसका सबसे बड़ा कारण यह था कि सभी जगहों पर एक साथ शुरू नहीं हुआ । इसके कारण यह आंदोलन कमजोर पड़ गया। यद्यपि यह आंदोलन काफी व्यापक था। इसमें विद्यार्थी,किसान व्यापारी हर क्षेत्रों के लोग हिस्सा ले रहे थे लेकिन कमनीकेशन गैप के कारण यह आंदोलन अधूरा रह गया ।

गांधी जी का सामाजिक जीवन– गांधी जी ने अपने देश के लिए निस्वार्थ रूप से आजीवन कार्य किया। इसके साथ ही उन्होंने समाज के लिए भी बहुत कुछ किया। उन्होंने गंदगी और गरीबी हटाने के लिए अथक प्रयास किया। स्वयं आधी धोती पहनते थे, कुर्ता भी नहीं पहनते थे, एक समय का ही खाना खाते थे। उनका मानना था कि जब हमारे देशवासियों के पास तन ढकने को पूरा वस्त्र होगा, भरपेट खाने को भोजन होगा तभी मैं भी उस तरीके से जिऊंगा। उन्होंने कई लघु एवं कुटीर उद्योग लगाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया। हस्त कार्य पर गांधीजी बहुत जोर देते थे, जैसे सूत कातकर कपड़े बुनना, बेत तथा बांस से घर की चीजें बनाना, जूट का कार्य करना इत्यादि । उनका मानना था कि इस तरह के कार्य करने से हमारा देश बेरोजगार मुक्त हो जाएगा। घर के सभी सदस्य इस कार्य में अपना भागीदारी दे सकेंगे। उन्होंने गांव-गांव में छोटे-छोटे कारखाने जैसे चीनी मिल, कपड़े के कारखाने इत्यादि लगाने पर जोर दिया।

समाज से छुआछूत मिटाने की के लिए उन्होंने हर संभव प्रयास किया। उन्होंने पिछड़ी जनजातियों को सम्मान देने के लिए उन्हें हरिजन नाम दिया। जीवन पर्यंत उनके लिए उन्होंने कार्य किए।

मृत्यु- 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने इनकी गोली मारकर हत्या कर दी। कहा जाता है कि उनके मुंह से निकले अंतिम शब्द हे राम ! थे ।उनकी मृत्यु के बाद दिल्ली में राजघाट पर उनका समाधि स्थल बनाया गया।

गांधी जी के कुछ रोचक तथ्य –

1 -गांधीजी आत्मिक शुद्धि के लिए लंबे और कड़े उपवास करते थे। वे निराजल व्रत रखते थे। इसके कारण उनमे आत्म सयंम बहुत था ।

2 -गांधी जी की मृत्यु पर एक अंग्रेज अफसर ने कहा था जिस आदमी को हमने इतने वर्षों तक कुछ ना होने दिया। उस गांधी को स्वतंत्र भारत ने 1 वर्ष भी उन्हें जीवित न रख पाया।

3 -गांधी जी ने स्वदेशी आंदोलन चलाया। इसमें विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने की मांग की और स्वदेशी वस्त्र तथा चीजों को बढ़ावा देने के लिए स्वयं चरखा चलाया।सूत बनाया और कपड़े भी तैयार किए।

4 -गांधीजी कहते थे बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, और बुरा मत कहो।

5 -गांधी जी को राष्ट्रपिता का खिताब भारत सरकार ने नहीं बल्कि सुभाष चंद्र बोस ने राष्ट्रपिता कहकर इन्हें संबोधित किया था।

6 -गांधी जी एक महान व्यक्ति थे। उन्होंने हमारे देश के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए। इन की सबसे बड़ी ताकत “सत्य और अहिंसा” दो हथियार थे।

इनकी महानता का महत्व पूरा भारत ही नहीं संपूर्ण विश्व मानता है इनके बताएं नक्शे कदम पर पूरा विश्व चलना चाहता है |

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