Maharshi Dadhichi Story in Hindi – महिर्षि दधीचि का त्याग

Maharshi Dadhichi Story in Hindi

भारत के ऋषि मंडल में महिर्षि दधीचि (Maharshi Dadhichi ) का नाम ठीक उसी प्रकार चमक रहा है जिस प्रकार आकाश में सूर्य । इनका स्थान अन्य कोई भी ऋषि मुनि नहीं ले सकता । अपनी आवश्यकतानुसार अनेक ऋषियों ने कठोर तपस्या कीये  । ऋषि दधीची अथरवा ऋषि और शान्ति के पुत्र थे । ये महा तेजस्वी और त्याग के मूर्ति थे। वे शिव (shiv) के परम भक्त थे और शिव की अवहेलना नहीं सह सकतें थे।

Maharshi Dadhichi Story in Hindi

एक बार महिर्षि दधीचि बड़ी घनघोर तपस्या कर रहे थे , उनकी तप से इंद्रा का सिंघासन हिलने लगा। इंद्र (Indra) ने सोचा महिर्षि दधीचि स्वर्ग पर अधिकार करना चाहते है । दधीचि को ध्यान से विरक्त करने के लिए इंद्र ने कामदेव और एक अप्सरा को भेजा पर महिर्षि दधीचि पर इसका कोई  असर नहीं पड़ा ।

 वह दोनों असफल होकर लौट आये । फिर इंद्र (Indra)अपने अन्य देवताओ के साथ अस्त्र शस्त्र ले कर दधीचि (Dadhichi) को मारने को गए पर इसका भी कोई प्रभाव उनपर नहीं पड़ा। वह सब हार के लौट आये । दधीचि अपने तपस्या में लगे रहे । उधर तीनो लोको  में एक बहुत ही दुष्ट वृतासुर नाम का राक्षस  अपना आतंक फैला रहा था और उसने स्वर्ग से सभी देवताओ को हटा दिया और स्वर्ग पर कब्ज़ा कर लिया । उसपर किसी भी तरह के अस्त्र शस्त्र का कोई प्रभाव नहीं पढ़ रहा था ।

देवताओ को यह पता चला की दधीचि की हड्डियां वज्र की है और यह वरदान उन्हें शिव से प्राप्त हुआ था।

इसके पीछे की कहानी यह है की सती को एक दैत्य से बचाने के लिए ऋषि दधीचि ने राक्षस से युद्ध किया और गंभीर रूप से उनकी हड्डियां टूट गयी थी ।  इसी बिच में शिव ने आकर राक्षस को मारा और सती और  दधीचि (Dadhichi) की रक्षा की। शिव दधीचि से बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने वरदान दिया की आज से तुम्हारी हड्डियां वज्र की हो जाएँगी ।

यह जानकार सभी देवता गण महिर्षि दधीचि  के पास आकर उनसे विनती करने लगे की हे ऋषि सिर्फ आप ही हमे दैत्य वृतासुर से बचा सकतें है । वृतासुर पर किसी भी अस्त्र और सशत्र का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है । अगर आप अपनी हड्डियां दें दें तो उससे अस्त्र शस्त्र बना कर वृतासुर को मारा जा सकता हैं।  इन सभी की विनीत वचन सुन कर मुनि ने कहा मरना तो एक दिन सभी को है, यह देह किसी के काम आजाये इससे अच्छी बात क्या होंगी । हमारी हड्डियां आप के उपकार में लग जाएँ , मैं अपना शरीर अवस्य त्याग दूंगा । आप लोग मेरी हड्डियां लेकर कार्य सिद्ध करें ।
महिर्षि  दधीचि ने सांस ऊपर चढ़ा कर समाधी लगायी और अपना शरीर छोड़ दिया । उनकी हड्डियों से विश्वकर्मा ने वज्र बनाया और उस वज्र से वृतासुर को मारा गया ।  किसी के उपकार के लिए त्याग की पराकाष्ठा है ।

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