Mahananda and Shiva Story in Hindi – महानन्दा शिव के साथ सती क्यों होना चाहती थी ?

महानन्दा ( Mahananda )एक वेश्या थी और शिव (shiva) की परम भक्त थी| वह नंदीग्राम में रहती थी, उसके पास एक बंदर और एक कुत्ता था| वह कोई भी आभूषण धारण नहीं करती थी, स्वयं भी रुद्राक्ष पहनती थी और अपने दोनो पालतुओ को भी रुद्राक्ष पहनाती थी| शिवजी के बारें में चर्चा करना तथा उनकी स्तुति करना उसका पहला कर्तव्या था| वह शिवजी(shiva) के यश का वर्णन करती ना थकती थी| प्रति दिन वह शिव भस्म भी लगाती थी|

 Mahananda and Shiva Story in Hindi

एक बार शिव उसकी भक्ति की परीक्षा लेने के लिए साधारण व्यक्ति के रूप में आए| उनके ललाट पर त्रिपुन्ड बना हुआ था और वे रुद्राक्ष पहने महानन्दा के सामने जय शिव कहते हुए उसके घर जा पहुँचे | महानन्दा ने उनका बड़े प्रेम से आवभगत किया और अपने घर पर ठहराया| जब महानन्दा उस व्यक्ति से प्रेमलाप कर रही थी तो उसकी नज़र उनके हाथ मैं पहने सुंदर कंगन पर पड़ी| वह बोली यह कंगन तो स्त्रियो के पहनने योग्य है, इसे आप मुझे दे दे | शिव ने कहा, मैं तो तुम्हे ये कंगन  दे दूं लेकिन तुम इस के बदले में मुझे क्या दोगी| महानन्दा ने कहा , देखिए महानुभव, हमारें यहाँ पुरुष गमन करना पाप नहीं माना जाता, बल्कि इसे कुल धर्म माना जाता है| यदि आप मुझे ये कंगन दोगे तो मैं तीन दिन तक आप की पत्नी के रूप मैं आप के साथ रहूंगी| शिव ने मुस्करातें हुए कहा मुझे मंजूर है|  शिव ने महानन्दा को स्वर्ण लिंग देते हुए कहा, देखो महानन्दा इसकी रक्षा अच्छे से करना, अगर ये लिंग नष्ट हो गया तो मेरे भी प्राण नहीं बचेंगे, तब महानन्दा ने लिंग को अपने मंदिर में ले जाकर स्थापित कर दिया|

महानन्दा का ये दूसरा दिन था, अचानक से मंदिर में आग लग गयी| आग इतनी भयंकर थी की दोनो ने लिंग को बचाने की कोशिश की पर लिंग जल कर भस्म हो गया लेकिन आश्चर्य की बात ये थी की कुत्ता और बंदर जो उस मंदिर में बैठे थे वो सही सलामत थे | शिव ने कहा अब जब लिंग नष्ट हो गया है तो में अपना प्राण त्याग दूँगा और उन्होने चिता तैयार की और अग्नि के बीच बैठ गये| महानन्दा फुट फुट कर रोने लगी और अपने भाई बंधुओ को बुलाकर पूरी बात बताई और कहा की मैंअपना पत्नी धर्म निभाऊँगी और शिव के साथ सती हो जाऊंगी| जैसे ही वो चिता में प्रवेश करना चाही ठीक शिवजी अपने वास्तविक रूप में  प्रकट हो गये और प्रसन्न मुद्रा में महानन्दा से कहा, मैं तुम्हारी भक्ति और धार्मिकता से अत्यंत प्रसन्न हूँ, तुम जो चाहो वार माँगो|  महानन्दा ने कहा हे प्रभु मुझे अपना भक्त बना लें और हमारें दोनो कुल को मोक्ष प्रदान करें|

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