Madhu Kaitabha Story in Hindi – मधु कैटभ की उत्पत्ति और उसका वध

Madhu Kaitabha Story in Hindi – मधु कैटभ की उत्पत्ति और उसका वध

मधु और कैटभ के जन्म की कथा (Madhu Kaitabha Story) हमारे वेदों और पुराणों में मिलती है। इन दोनों के जन्म और वध की कथा दुर्गा सप्तशती (Durga Saptashati) में भी पढ़ा जा सकता है। ये दोनों बड़े ही बलवान और शक्तिशाली दानव थे। इनका अहंकार भी बहुत अधिक था।

प्राचीन समय की बात है कि जब विष्णु क्षीर सागर में शेषनाग की शय्या पर सोए हुए थे तब उनके कान से मधु और कैटभ (Madhu Kaitabha) दो दानव उत्पन्न हुए। यह बड़े ही प्रतापी दानव थे । ये दोनों समुद्र में ही धीरे-धीरे बड़े होने लगे और जल में ही रहकर खेलने कूदने लगे। एक बार खेलते हुए उन दोनों भाइयों के मन में विचार आया, हमारा जन्म कैसे हुआ ? और यह जल किस पर टिका हुआ है ? उन लोग आपस में सोचने लगे कि बिना कार्य का कारण नहीं हो सकता। उन दोनों के मन में बहुत सारे प्रश्न जानने की जिज्ञासा होने लगी। दोनों ने मिलकर बहुत सोचा पर इसका कोई सटीक निष्कर्ष ना निकल सका।

Madhu Kaitabha Story in Hindi

उसका भाई मधु सोच विचार कर बोला- कैटभ, मां भगवती ही इस जगत की आद्यशक्ति है । उनकी इच्छा के बिना कुछ भी नहीं हो सकता। वही संपूर्ण जगत की सृष्टा है। हम दोनों की उत्पत्ति हो या इस जगत की उत्पत्ति या फिर इस जल का आधार। भगवती की इच्छा से ही सब कुछ निर्मित हुआ है।

जब दोनों भाई इस विषय पर चर्चा कर ही रहे थे कि तभी देवी का बीज मंत्र आकाशवाणी के द्वारा सुनाई पड़ा। उन्हें आकाश में प्रत्यक्ष रुप से इस मंत्र का दिव्य प्रकाश के साथ उदय होता हुआ दिखाई पड़ा । फिर दोनों भाई उस बीज मंत्र का एकाग्रचित होकर जाप करने लगे। माता की इन दोनों भाइयों ने मिलकर कठोर तपस्या की। इनकी तपस्या से माता प्रसन्न होकर उनके सामने प्रकट हो कहने लगी तुम अपनी इच्छा से वर मांगो। दोनों ने मां की अनेक तरह से स्तुति की और उन्हें प्रसन्न किया। कहा हे माँ! हम दोनों को इच्छा मृत्यु का वर देने की कृपा करो। देवी ने कहा ठीक है। जब तुम चाहोगे तब भी तुम्हारी मृत्यु होगी। बिना चाहे तुम्हारी मृत्यु नहीं हो सकती है।

देवी का ऐसा वरदान पाकर दोनों दानव् अत्यंत प्रसन्न हुए। उनके अहंकार का तो कोई सीमा ही ना रह गया। बात भी सही है । कोई भी अपनी इच्छा से मृत्यु क्यों चाहेगा। दोनों बलवान सांड की तरह तीनों लोकों में विचरण करने लगे और उनके रास्ते जो भी आता उनको मार डालते।

यह भी पढ़े – Navadurga Names in Hindiनव दुर्गा के नाम और उनकी कथाएं

ऐसे ही विचरण करते हुए एक बार उनकी दृष्टि ब्रह्मा पर पड़ी जो अपने लाल कमल पर विराजमान थे। वे दोनों उनके निकट गए और कहने लगे हे ब्राह्मण तुम इस लाल कमल पर बैठ कर क्या कर रहे हो? हम दोनों तुम्हारे साथ युद्ध करना चाहते हैं ।चलो युद्ध करो। उन दोनों ने ब्रह्मा को ललकारते हुए कहा- अरे जाओ तुम में तो हमारे सामने कोई शक्ति ही नहीं है। एक काम करो यहां से छोड़कर कहीं और चले जाओ। यह कह कर दोनों जोर-जोर से हंसने लगे। ब्रह्मा उन दोनों को देखकर बड़े भयभीत हुए। देखने में बड़े ही भयानक और विशाल लग रहे थे। ब्रह्मा सोचने लगे यह दोनों दानाव् कितने बलशाली हैं , इनकी ताकत का बिना मुआयना इन से युद्ध करना खतरे से खाली नहीं है। उन्होंने सोचा इस समय हमारी मदद सिर्फ विष्णु ही कर सकते हैं।

ब्रह्मा विष्णु के पास गए और वहां देखा कि विष्णु तो नींद में विभोर है। फिर उन्होंने निंद्रा देवी से प्रार्थना की। उन्होंने बड़े द्रवित हृदय से निंद्रा देवी को गुहार लगाई, कहा माता आप कृपा करो। मैं अभी बड़ी संकट में हूं। किसी तरह नारायण को नींद से जगा दो । कृपया कर मेरी सहायता करो मां। ब्रह्मा की प्रार्थना सुनकर विष्णु से विग्रह होकर उनके बगल में बैठ गईं ।

विष्णु उठ बैठे । उनकी नजर ब्रह्मा पर पड़ी। उनको देखकर विष्णु ने कहा – आप यहां क्या कर रहे हो? इतने परेशान क्यों लग रहे हो? मुझे लगता है आप को किसी से डर भी लग रहा है। ब्रह्मा ने उनको सारी स्थिति बताते हुए उन दोनों दुष्टों की ओर इशारा करके पूरी कहानी बताया ।तब तक दोनों भाई वहां आ पहुंचे और ब्रह्मा जी को धमकाते हुए बोले अच्छा तो डर के मारे यहां छुप कर बैठा है। चल युद्ध कर। तभी विष्णु बोले रूको, पहले मुझसे युद्ध करो बाद में ब्रम्हा से करना।
दोनों बोले ठीक है।

ब्रह्मा और देवी आकाश से विष्णु और मधु कैटभ का युद्ध देख रहे थे। विष्णु थक जाते थे पर वे दोनों थकने का नाम ही नहीं लेते। फिर विष्णु ने कहा देखो भाई मुझे थोड़ा विश्राम चाहिए तुम दो हो और मैं अकेला। इस बात पर दोनों राजी हो गए। विष्णु सोचने लगे आखिर इस युद्ध का क्या परिणाम होगा ? 5000 वर्षों से लगातार युद्ध कर रहा हूं। ना तो ये मरते हैं और ना ही थकते हैं। ऐसा जान पड़ता है कि इन पर भगवती की विशेष कृपा है।

विष्णु ने भगवती से प्रार्थना की और कहा कि इनकी मृत्यु कैसे हो सकता है ? आप हमारी सहायता करें । वह बोली उन दोनों को इच्छा मृत्यु का वरदान मिला है ।आप ऐसा करें कि इन दोनों से युद्ध करना प्रारंभ करें। मैं अपनी मनमोहिनी दृष्टि इन पर डालूंगी जिसके प्रभाव से यह दोनों स्वयं ही बोलेंगे कि मेरा वध कर दो ।उनको मारने का बस यही एक यही उपाय है।

विष्णु तुरंत ही युद्ध करने के लिए उठे और दोनों महाबली भी वहां पर आ गए। दोनों ओर से युद्ध शुरू हो गया। भगवान विष्णु ने मां को अपने कातर भाव से मन ही मन प्रार्थना करने लगे। तभी मां अपनी मनमोहिनी दृष्टि लिए उन दोनों दानवों के बीच खड़ी हो गई ।उनकी दृष्टि और मनमोहनी छवि देखकर दोनों दानव घायल हो गए। मधु और कैटभ मां की इस कटाक्ष दृष्टि पर मोहित हो गए।

विष्णु देवी की अभिप्राय को समझ गए की दैत्य माँ पर मोहित हो चुके हैं । दानवों की आंखें देवी पर टिकी हुई थी। वे कहने लगी आज तुम मुझे मुझसे कुछ भी मांगो मैं वह देने के लिए तैयार हूं। वे बोलो तुम्हें क्या चाहिए तभी विष्णु ने कहा बस मेरी एक इच्छा है वह पूरी कर दो। तुम दोनों अपनी इच्छा से अपनी मृत्यु दे दो। विष्णु ने अपने दोनों जांघों को चट्टान की भांति जोड़ दिया और उस पर उनके सिर रखकर काट डाला। इस प्रकार मां के सहयोग से मधु और कैटभ की उनकी इच्छा के अनुसार मृत्यु हुई।

More Mythological Stories in Hindi | पौराणिक कथाएं

1 – 51 Shakti Peeth list in Hindi51 शक्ति पीठ
2 – Solah Somvar Vrat Katha in Hindiसोलह सोमवार व्रत कथा
3 – Navratri in Hindi नवरात्री पूजा विधि और इसका महत्त्व
4 – Gayatri Mantra Meaning in Hindiगायत्री मंत्र का अर्थ और महिमा
5 – Hanuman Stories in Hindiवायु पुत्र मारुती का नाम हनुमान कैसा पड़ा
6 – Navadurga Names in Hindiनव दुर्गा के नाम और उनकी कथाएं
7 – Navagraha Mantra – नवग्रह क्या हैं? ये ग्रह मनुष्य के जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं ?
8 – 12 Jyotirlinga Name & Place in Hindi 12 ज्योतिर्लिंग के नाम और विवरण
9 – Satya Harishchandra Story in Hindiसत्यवादी राजा हरिशचंद्र की कथा
10 – Meaning of Om in Hindi ऊँ क्या है इसके स्वरूप का रहस्य क्या है
11 – Vaman Avatar Story in Hindi – विष्णु के वामन अवतार की कथा
12 – Ganga River History in Hindi – Ganga Nadiगंगा जी की उत्पत्ति कैसे हुई
13 – Shiv Ardhnarishwar Story in Hindiशिव अर्धनारीश्वर के रूप में कब प्रकट हुए
14 – Vishnu 20 Avtaar in Hindiविष्णु के 20 अवतारों का रहस्य
15 – Tulsi Story in Hindiतुलसी की महिमा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here