Kailash Satyarthi Biography in Hindi – कैलाश सत्यार्थी का जीवन परिचय

Kailash Satyarthi Biography in Hindi – कैलाश सत्यार्थी का जीवन परिचय

कैलाश सत्यार्थी (Kailash Satyarthi) आज के समय में सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में बड़े ही लोकप्रिय और चर्चित व्यक्ति हैं। ये “बचपन बचाओ” आंदोलन के संस्थापक अध्यक्ष है। बचपन बचाओ आंदोलन में लगभग 70,000 स्वयंसेवक है, जो हमारे नन्हे-मुन्ने मासूमों के जीवन में खुशियों के रंग भरने के लिए कार्य करते हैं। कैलाश सत्यार्थी बचपन से ही कोमल सहयोगी और आत्म शांति प्रिय स्वभाव के व्यक्ति हैं। ये अपने चार भाइयों में सबसे छोटे हैं। इनके पिता राम प्रसाद पुलिस की नौकरी करते थे।

जब यह मात्र 11 वर्ष के थे तभी उन्होंने महसूस किया था कि बहुत से ऐसे बच्चे हैं जो पुस्तकों के अभाव में पढ़ाई छोड़ देते हैं। एक बार की बात है उन्होंने एक ठेला का जुगाड़ किया और पुरानी पुस्तकें इक्कठे करने को गली-गली घूमने लगे। उनके एक मित्र ने देखा तो पूछा यह तुम्हें क्या हो गया है ? क्या तुम्हारे इतने खराब दिन आ गए हैं कि तू अब यह काम करें? उन्होंने कहा, नहीं भाई ऐसी बात नहीं है। मैं तो जरूरतमंद बच्चों के लिए किताबें इकट्ठी कर रहा हूं, ताकि उन्हें पढ़ाई में हेल्प हो सके। ऐसे निस्वार्थ भाव के कर्मठ सत्यार्थी जी को मेरा कोटि-कोटि प्रणाम है ।

Kailash Satyarthi Biography in Hindi

परिचय – कैलाश सत्यार्थी का जन्म मध्यप्रदेश के विदिशा में हुआ था । उनकी जन्म तिथि 11 जनवरी 1954 है ।इनके परिवार में उनकी पत्नी सुमेधा, पुत्र ,पुत्रवधू और उनकी पुत्री हैं। सामाजिक कार्यों में तो ये महान है ही साथ ही पाक कला में भी निपुण है। ये शांतिप्रिय ,संतुष्ट स्वभाव के व्यक्ति है। निस्वार्थ भाव से सेवा करना इनका स्वभाव है। भोपाल गैस त्रासदी राहत अभियान में इन्होंने बहुत काम किया। पिछले 20 से 25 साल से बाल श्रम के विरुद्ध अपनी आवाज उठा रहे हैं। ये पेशे से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर है। उन्होंने कुछ दिन तक अपने कॉलेज में शिक्षक के रूप में भी काम किया, पर उनको इस काम में आनंद नहीं आया। उन्होंने शीघ्र काम छोड़कर बच्चों के लिए कार्य करना शुरू कर दिया।

बचपन बचाओ आंदोलन का प्रारंभ (Bachpan Bachao Andolan) – कैलाश सत्यार्थी जब इंजीनियरिंग कॉलेज में शिक्षक के रूप में पढ़ा रहे थे, तभी उन्होंने यह निर्णय ले लिया था कि वे अपना जीवन समाज सेवा में लगाएंगे। उन्होंने ऐसा ही किया। अपने जीवन का मुख्य उद्देश रखा कि वे असहाय गरीब और जरूरतमंद बच्चों की सहायता करेंगे। उन्हें सभी प्रकार से सुरक्षा प्रदान कर उनके जीवन में ज्ञान और खुशियों का फूल खिलाएंगे। 1980 में उन्होंने अपने टीचिंग कार्य को छोड़ दिया और बोंडेड लेबर लिबरेशन फ्रंट के महासचिव बन गए ।इसके बाद उन्होंने बच्चों के अधिकार के लिए अनेक कार्य किए।

1983 में इन्होने बचपन बचाओ आंदोलन की स्थापना की। इसी समय से उनकी जबरदस्त पहचान बनी। इनके इस पहल से चारों तरफ धूम मच गई। पूरी दुनिया में इनका नाम होने लगा। इनके प्रयास से आज बच्चों को अच्छी शिक्षा और बेहतर जीवन यापन के अवसर मिले हैं। इसके लिए उन्होंने जमीनी स्तर पर काम किया और बाल मजदूरी को खत्म करने का जोरदार अभियान चलाया। जिसका परिणाम बहुत अच्छा आया ।

बाल मजदूरी के विरुद्ध कड़े कानून बनाने की वकालत – इन्होंने कहा, बाल मजदूरी एक बीमारी नहीं बल्कि कई बीमारियों की जड़ है। इसके कारण अनेक जिंदगियां बर्वाद होती हैं। कैलाश सत्यार्थी का मानना है कि हकीकत में कोई काम करना नहीं चाहते ।आज सेवा एक व्यवसाय बन गया है। समस्या को खत्म करने की रुचि किसी में भी नहीं है; अगर होती तो अभी तक ये समस्या समाप्त हो गई रहती ।

दिल्ली ,मुंबई जैसे देश के बड़े फैक्ट्रियों में बच्चों को उत्पीड़न मिलता है, उड़ीसा झारखंड के दूरवर्ती क्षेत्रों से लेकर देश के लगभग हर कोने में यह समस्या है। सत्यार्थी जी कहते हैं यह समस्या इतनी गंभीर है कि बच्चों का बचपन समाप्त हो रहा है। इस समस्या को समाप्त करने के लिए इसके विरोध करें कानून बनाने की सख्त आवश्यकता है।

बाल मजदूरी करवाने वाली फैक्ट्रियों पर सत्यार्थी का छापामारी करवाना – कैलाश सत्यार्थी ने अपनी जान की परवाह ना करते हुए गैर सरकारी संगठनों और कार्यकर्ताओं के सहयोग से हजारों ऐसी फैक्ट्रियों तथा गोदामों पर छापा पड़वाया है जिनमें बच्चों से काम करवाया जाता था। छापामारी के प्रारंभिक प्रयास का फैक्ट्री मालिकों ने इसका कड़ा विरोध किया। कई बार पुलिस ने भी उनका साथ नहीं दिया, किंतु धीरे-धीरे उनके काम की महत्ता को पहचान मिली। लोगों ने इनके नेक इरादे को समझा। काफी लोग इन से जुड़ने लगे। इस पवित्र सामाजिक कार्य में लोगों ने सहयोग करना प्रारंभ कर दिया।

कैलाश सत्यार्थी पर जानलेवा हमला – 17 मार्च 2011 को दिल्ली की एक कपड़ा फैक्टरी पर छापे के दौरान उन पर जानलेवा हमला किया गया। इससे पहले 2004 में ग्रेट रोमन सर के बाल कलाकारों को छुड़ाने के दौरान इन पर जबरदस्त हमला हुआ। पर इनका इरादा लोहे की तरह मजबूत था। अपने दृढ़ इच्छाशक्ति और कर्तव्यनिष्ठा के बल पर आगे बढ़े और बच्चों को आजाद करवाया।

कैलाश सत्यार्थी ने बच्चों की आवश्यक शिक्षा को लेकर महत्वपूर्ण “शिक्षा के पूर्ण अधिकार का आंदोलन” चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जागरूक करना – उन्होंने RUGMARK की शुरुआत की ।यह पहली ऐसी संस्था है जहां उत्पाद के निर्माण से लेकर पैकिंग तथा लेबलिंग तक कहीं बाल श्रम नहीं आते। रग्मार्क दक्षिण एशिया में है। इस पहल से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा करने में काफी सफलता मिली। कैलाश सत्यार्थी ने कई प्रदर्शन, परिकल्पना एवं आंदोलन का नेतृत्व किया लेकिन बहुत ही शांतिपूर्ण ढंग से।

सत्यार्थ प्रकाश जी द्वारा किए गए इन महत्वपूर्ण कार्यों को ध्यान में रखते हुए उन्हें 2014 के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई। यह पुरस्कार उन्हें पाकिस्तान की मलाला यूसुफ़ज़ई के साथ संयुक्त रूप से दिया गया ।

नोबेल पुरस्कार मिलने पर सत्यार्थ प्रकाश ने कहा, “यह सम्मान सवा सौ करोड़ भारतीयों का सम्मान है। यह भारत के लोकतंत्र की जीत है जिसकी वजह से यह लड़ाई भारत से शुरू हुई और आज हम दुनिया में जीत रहे हैं। यह उन बच्चों की जीत है जो अपनी जिंदगी बदलने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे हैं ।”

इस प्रतिष्ठित सम्मान के पहले उन्हें और भी कई सम्मान और पुरस्कार मिल चुके हैं।

कुछ महत्वपूर्ण सम्मान-

* 2009 अमेरिका द्वारा डिफेंडर डेमोक्रेसी अवार्ड
*2008 स्पेन द्वारा अल्फोंसो कोमिन अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार
* 2007 अमेरिका द्वारा आधुनिक दास्ता को समाप्त करने के लिए कार्यरत नायक पुरस्कार
* 2007 इटली द्वारा मेडल ऑफ द इटेलियन सीनेट
* 2006 अमेरिका द्वारा फ्रीडम अवार्ड
*1995 अमेरिका द्वारा राबर्ट ऑफ़ कनेडी इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स अवार्ड
*1999 जर्मनी द्वारा फेड्रिक एबर्ट इंटेरनशनल ह्यूमन राइट्स
* 1999 स्पेन द्वारा ला हॉस्पिटल अवार्ड
*1998 नीदरलैण्ड द्वारा दी गोल्डन फ्लैग अवार्ड
*1995 अमेरिका द्वारा द ट्रम्पेटेर अवार्ड

नोबेल कमेटी ने आधिकारिक बयान में कहा की कैलाश सत्यार्थी ने बहुत से विरोध प्रदर्शन किए लेकिन उन्होंने महात्मा गाँधी की सत्य और अहिंसा की परम्परा को कायम रखा ।

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