How to Keep Your Brain Healthy – In Hindi – मस्तिष्क को कैसे स्वस्थ रखें

How to Keep Your Brain Healthy – मस्तिष्क को कैसे स्वस्थ रखें

आज के भागदौड़ के जीवन में हम समय और अपनी क्षमता के खिलाफ काम करते हैं।अपने टारगेट को कम समय में ही अचीव करना चाहते हैं। इसके कारण हमारे शरीर और मस्तिष्क के बीच रस्साकशी चलना शुरू हो जाता है। एक पॉइंट पर आ कर हमारा शरीर या मस्तिष्क या फिर दोनों ही साथ देना छोड़ देते हैं। हम हतोत्साहित हो धराशाई हो जाते हैं। लेकिन इस संसार में चलने के लिए हमें अपने आप को मजबूत करना ही पड़ेगा।

प्रश्न यह उठता है कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में कैसे संतुलन बनाया जा सके ? इसके लिए हमें अपने संपूर्ण शरीर का विज्ञान समझना पड़ेगा। इसे एक उदाहरण के द्वारा समझा जा सकता है। जिस प्रकार किसी गाड़ी को चलाने के लिए एक ड्राइवर की आवश्यकता होती है उसी प्रकार शरीर को चलाने के लिए मस्तिष्क की आवश्यकता होती है। हम यह मान लें हमारा कि शरीर हम गाड़ी है और मस्तिष्क उसका चालक। शरीर अगर बीमार होगा तो वह ठीक से काम नहीं कर पाएगा लेकिन अगर हमारा मस्तिष्क स्वस्थ नहीं होगा तब कोई भी कार्य नहीं हो पाएगा ।एक बहुत पुरानी कहावत है हेल्दी माइंड लिवस इन अ हेल्दी बॉडी।

हम सब ने गौर किया है कि शरीर को फिट रखने के लिए जिम, फिटनेस क्लब, बैलेंस एंड हेल्दी डाइट के पोस्टर, क्लब,ट्रेनर बहुत कुछ मार्केट में मिल जाते हैं। लेकिन मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए बहुत कम उपाय और इससे संबंधित बहुत कम सेंटर मिलते हैं। मेरा मानना है कि चाहे हम अपने शरीर को जितना भी अच्छा स्वास्थ्य प्रदान कर ले लेकिन अगर हमारा मस्तिष्क शुद्ध और स्वस्थ ना होगा तो हम उत्तम कार्य नहीं कर सकते। मस्तिष्क ही शरीर को नियंत्रित करता है ।मस्तिष्क को स्वस्थ रखे बिना शरीर स्वस्थ नहीं रह सकता। मस्तिष्क की शक्ति को बढ़ाने के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए ।

1  Cultivate Healthy Relationship – मनुष्य सामाजिक प्राणी है। जन्म से मृत्यु पर्यंत उसके अनेकों रिश्ते बनते हैं ।यह रिश्ते पारिवारिक सामाजिक नैतिक और प्रोफेशनल स्तर पर होते हैं। बहुत सारे रिश्तो के बीच में संतुलन बना कर चलना एक कला है। कोई भी रिश्ते में थोड़ी सी भी खटास आ जाए तो हम बुरी तरीके से डिस्टर्ब हो जाते हैं ।और इसका प्रभाव हमारे जीवन के हर एक क्षेत्र पर पड़ता है। मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए रिलेशनशिप को स्वस्थ और संतुलित रखना बहुत उपयोगी सिद्ध होता है।

2 – सब से जुड़े रहना – सबसे पहले हमें खुद से जुड़ना होगा । खुद को जानना और खुद को महत्व देना होगा। तभी हम अन्य लोगो को खुद से जोड़ सकते हैं ।कई बार ऐसा होता है कि हम मेंटली बहुत परेशान होते हैं । अपने मित्रगण या परिजनों से शेयर करके बहुत हल्का महसूस करते हैं और हमें सलूशन मिलने में भी आसानी हो जाती हैं। मैं आपको एक सलाह दूंगी जब आप मानसिक रुप से डिस्टर्ब होते हैं या तनावपूर्ण होते हैं तो अपने लोगों से जरूर शेयर करें। अपने मित्रों या परिजनों के साथ घूमने जाएं |उनसे बातें करें| उनके साथ इंजॉय करें। आपको बहुत खुशी मिलेगी । मानसिक रूप से स्वस्थ और टेंशन मुक्त हो जाते हैं ।हमारे सोचने के दृष्टिकोण में भी फर्क पड़ जाता है।

3 – अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करें – कहते हैं बिना पतवार के नाव सही दिशा में नहीं चल सकता । उसी प्रकार जीवन का लक्ष्य तय न हो तो हम इधर -उधर भटकते रह जाते हैं । लक्ष्य निर्धारित होने से हम सही दिशा में प्रयास करते हैं । जिसके कारण हमारे शारीरिक और मानसिक क्षमता में विकास होता है।अपने लक्ष्य पर फोकस होने के कारण हमारी मानसिक क्षमता बढ़ जाती है ।

4 -शौक -अपने शौक को दबाना मतलब अपने आपको कुंठित करना है या कहे कि दुखी करना है ।अपने होब्बिस को जीवित रखने से हमें ख़ुशी और संतोष मिलता है ।हम अन्य कोइ भी कार्य करके थक जाते हैं लेकिन जिस कार्य में हमारी दिलचस्पी होती है उसे करके आनंद मिलता है ।इससे हम मेंटली फिट होते हैं ।

5 – अपने आपको Treat दें – दूसरों को हम कई बार पार्टी या उपहार देते हैं । अच्छी बात है । लेकिन एक बार मेरा कहा मानके खुद को पार्टी या उपहार देकर देखिए । अपने आपको पैम्पर करें। इससे आपको जो संतुष्टि मिलेगी शायद ऐसी संतुष्टि आपने कभी महसूस न किया होगा ।

6 -संतुलित और पौष्टिक आहार – हमारे बड़ों ने हमेशा कहा है जैसा अन्न वैसा मन और जैसा मन वैसा तन । कहने का तात्पर्य है कि तन मन और अन्न तीनों आपस में जुड़े हुए हैं ।अतः हमें अपने संतुलित और पौष्टिक भोजन का ध्यान रखना चाहिए इससे हमारा मस्तिष्क स्वस्थ रहता है।

7 -सोते समय कभी भारी भोजन ना करें – रात को सोते समय गरिष्ठ या ज्यादा भोजन बिल्कुल नहीं खाना चाहिए। इससे हमारे शरीर में आलस तो आता ही है हमारा मस्तिष्क भी बोझिल हो जाता है।

8 – व्यायाम – एक्सरसाइज करना केवल शरीर के लिए ही नहीं बल्कि मस्तिष्क के लिए सर्वथा उचित है। व्यायाम खुली जगह में करें जहां हवा का आवागमन होता रहे। इससे आप शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का भी लाभ उठा सकते हैं।

9 – अपने अंदर की सहानुभूति करुणा और दया जैसी भावना को प्रकाशित करें – दया करुणा खुशी दुख सहानुभूति ये सारे मानवीय गुण होते हैं। मैं समझती हूं कि ऐसी भावनाएं सभी के अंदर विद्यमान होते हैं। इनको दमित करने से हम खुद को भी दमित और कुंठित कर लेते हैं। इन भावनाओं को प्रकट करने से हमारा हृदय का द्वार खुल जाता है। हम मानसिक रूप से हल्का और अच्छा महसूस करते हैं ।कभी-कभी रोना भी अच्छा होता है। हमारे आंसुओं के सैलाब में हमारी कुंठित भावनाएं धूल जाते हैं और हम प्रसन्नचित हो मानसिक रूप से स्वस्थ हो जाते हैं।

10 – अच्छी नींद – शरीर और मन को स्वस्थ रखने में अच्छी नींद कि बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है। हम अपने दैनिक जीवन में इसे हमेशा महसूस करते हैं। नींद पूरी ना हो तो हमारा शरीर और मन दोनों ही बोझिल रहता है ।कंप्लीट स्लीप होने से हम फिर से हम तरोताजा महसूस करने लगते हैं। हम फ्रेश माइंड से अपना काम कर सकते हैं। स्वस्थ मस्तिष्क के लिए अच्छी नींद का होना अत्यंत आवश्यक है।

11 – प्राणायाम – मानसिक शक्ति को बढ़ाने के लिए प्राणायाम एक शुद्ध और शाश्वत घटक है। इसका अभ्यास हमें प्रतिदिन करना चाहिए। इसे ब्रिदिंग एक्सरसाइज भी कहते हैं। प्राणायाम से धीरे-धीरे हम अपने शरीर और मस्तिष्क पर नियंत्रण करना सीख जाते हैं ।

12  -Meditation  – प्राणायाम का नेक्स्ट स्टेप मेडिटेशन है। इससे हमारी फोकस क्षमता बढ़ जाती है। प्रत्येक दिन मेडिटेशन हम सब को करना चाहिए। इसकी अवधि भले ही छोटी हो लेकिन इस से रेगुलर करने से हमारी हर प्रकार की क्षमता में वृद्धि होती है और हम अपनी इंद्रियों को भी धीरे-धीरे नियंत्रण में ला सकते हैं।

13 = Om Chanting – ओम का उच्चारण करना अर्थात उस सर्वशक्तिमान से प्रेम करना है। मेडिटेशन के दौरान या उसके ठीक बाद ओम का उच्चारण करने से मस्तिष्क को असीम शांति मिलती है। और हम अपने जीवन को उत्तम बनाने में सक्षम होते हैं ।

14 -आभार व्यक्त करना– यह सुनने में या करने में बहुत छोटी बात लगती है लेकिन मानसिक सुकून देने में इसका बहुत बड़ा रोल होता है। जो भी हमारी सहायता करते हैं उन्हें हमेशा आभार व्यक्त करें। इससे आप अपनी मस्तिष्क की शक्ति को अधिक मजबूत कर सकते हैं ।ऐसी भावनाएं हमें अवश्य व्यक्त करना चाहिए।

15 – नकारात्मक सोच वालों से दूर रहना – वास्तव में नकारात्मकता हमें अपना बंधक बना लेता है ।हमारा जीवन नकारात्मक सोच से पंगु बन जाता है। इसके प्रभाव से हम शारीरिक और मानसिक दोनों ही रूप में बीमार हो जाते हैं। इसलिए ऐसे विचारों बालों से कभी भी मेलजोल नहीं बढ़ाना चाहिए।

जीवन एक ईश्वरीय उपहार है इसमें सुख और दुख रूपी पुष्प निकलते हैं ।जहां सुख हमें खुशी प्रदान करता है वही दुख हमें शिक्षा देता है। इन दोनों को सहज रुप में स्वीकार करना ही जीवन का सही मायने में अर्थ है ।

मानसिक स्वस्थ केवल हमारे शरीर को ही स्वस्थ नहीं रखता बल्कि किसी भी सिचुएशन में समरूप और संतुलित रहने का ताकत देता है। हमें प्रसन्न रहने की ताकत देता है। हमारी मानसिक शक्ति और इमोशनल हेल्थ को भी परफेक्ट बनाता है ।स्वस्थ दिमाग जीवन के हर पड़ाव में हमारा मार्गदर्शन करता है इसलिए शरीर को स्वस्थ रखने के लिए मानसिक स्वास्थ्य को अच्छा रखना अति आवश्यक है।

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