Hindi Poem on Unity – अनेकता में एकता

Hindi Poem on Unity
Hindi Poem on Unity

Hindi Poem on Unity

हाथ की पांच उँगलियाँ
पांचों अलग अलग
नज़र हटा कर देखो तो
सब हैं अगल बगल

 

एक अकेले कुछ कर नहीं पाती
पांचों मिल कर धूम मचाती
जब इनकी मुठ्ठी बन जाती
दुश्मन की छुट्टी कर जाती
मित्रों के संग हाथ मिला कर
बाय बाय ओर टाटा करती

 

भारत की नाना भाषाएं
नाना रूप और रंग
अलग अलग है वेश भूषा
रहन सहन अलग
रीति रिवाज़ अलग अलग हैं
परमपराएँ अनेक
त्योहारों की भरमार यहाँ
पर सत्य कसौटी एक

 

कोई माने बुद्ध को
और कोई माने ईसा
कोई पूजे राम को और कोई पूजे अल्लाह
भारत माँ का मंदिर यह
समता का संवाद है
हम सब भारत वासी हैं
ये अपनी पहचान हैं

 

बिखरे हुए फूलों का
तुच्छ होता है मोल
धागे में पिरो दो तो
बन जाए अनमोल

 
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