Hanuman Stories in Hindi – वायु पुत्र मारुती का नाम हनुमान कैसा पड़ा

Hanuman Story

इस पृथ्वी लोक में हनुमान (Hanuman) ही ऐसे देवता हैं जो प्रत्यक्ष रूप में देखे जाते हैं। यह अजर और अमर हैं ।इनको ये वरदान माता सीता ने उस समय दिया था जब वे राम जी का दूत बनकर उनसे मिलाने गए थे ।ये बुद्धि बल विद्या तीनों में ही उत्कृष्ट हैं । इनका मुकाबला तीनों लोको में कोई नहीं कर सकता ।मारूति भगवान का मुकाबला कोई नहीं कर सकता ।

Hanuman Stories in Hindi

एक बार की बात है जब वो बहुत छोटे थे, तब इनकी माता अंजना देवी अपनी कुटिया में सुलाकर लकड़ियां लेने जंगल में गयी थी। इस बीच में उन्हें बहुत भूख लगी। अचानक उनकी दृष्टि आकाश में उगते सूरज पर पड़ी। उगते हुए सूरज की लालिमा को देख कर लगा की इतना सुन्दर लाल फल है खाने में अत्यंत स्वादिष्ट होगा। वे एक छलांग में आकाश में पहुँच गए और सूरज को अपने मुँह में दबा लिया। ठीक उसी समय राहु सूर्य को ग्रहण लगाने आ रहा था। मारुती ने सोचा ये भी कोई कला कला खाने वाला फल है। तभी हनुमान उसकी ओर झपटे ।राहु अपनी जान बचाकर भागने में सफल हो गए । राहु किसी तरह जान बचाकर राजा इंद्र के पास पहुँचा और कहा प्रभु आज आपने कौन सा दूत भेजा है जो सूर्य को निगल गया और मुझे भी निगलने को झपटा पर मैं जान बचाकर बचने में सफल हो गया । यह सुनकर इंद्र देव को बड़ा आश्चर्य हुआ, वह तुरंत अपने सफ़ेद ऐरावत हाथी पर बैठ हाथ में वज्रा लेकर बहार आये । उन्होंने देखा एक वानर बालक सूर्य को अपने मुँह में दबाकर आकाश में खेल रहा है । यह सब देखकर इंद्र बड़े क्रोधित हो गए । उन्होंने सूर्य को छुड़ाने के लिए मारुती की ठुड्डी ( hanu) पर वज्र का तेज प्रहार किया जिससे उनकी ठुड्डी टूट गयी और वह बेहोश होकर पृथ्वी पर गिर पड़े। उनके पिता वायुदेव ने जब देखा तो अपने पुत्र को हृदय से लगा लिया और इंद्र पर आगबबूला होने लगे। उसी समय मारुती की माता आ गयी और अपने पुत्र की हालत देखकर रोने लगी।

वायुदेव को बहुत गुस्सा आया और इन्होने वायु प्रवाह करना बंद कर दिया जिससे चारों और बेचैनी छा गयी। पशु पक्षी देवता और मनुष्य सभी हवा के बिना व्याकुल हो गए। ये सब देखकर ब्रह्मा इंद्र सहित अन्य देवताओ के साथ वायुदेव के पास आये। उन्होंने अपने हाथों से मारुती को स्पर्श किया तो वह जीवित हो गए । ब्रह्मा ने वायुदेव से प्रार्थना की हे प्रभु आप अपना गुस्सा त्याग दें और तुरंत बहना शुरू कर दें , अगर थोड़ी भी देर हो गयी तो पूरी पृथ्वी मृत्यु के मुहं मैं चली जाएगी । सभी के प्राण संकट में है। ब्रह्मा ने वायुदेव से कहा में आज सभी देवता की और से बालक को वरदान देता हूँ की इस पर किसी तरह के कोई अस्त्र शस्त्र का प्रभाव नहीं पड़ेगा, मेरे ब्रह्मास्त्र का भी प्रभाव नहीं पड़ेगा । इंद्र ने कहा मेरे वज्र का प्रभाव भी अब इस पर नहीं पड़ेगा, इस बालक की हनु मेरे वज्र से टूट गयी थी इसलिए आज से इनका नाम हनुमान (Hanuman) होगा । ब्रह्मा ने कहा की आप का यह पुत्र आगे चलकर भगवान् श्री राम का सबसे प्रिय होगा । इनका जो भी मनुष्य ध्यान करेंगे उनका सारे संकट दूर हो जायेंगे । ये संकट मोचन भी कहलायेंगे । वायदेव प्रसन्न होकर फिर से बहने लगे और तीनो लोको को प्राणी प्रसन्न हो उठे ।

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