Hanuman Stories in Hindi -हनुमान को अपनी अमोघ शक्ति की याद कैसे आयी

Hanuman Story in Hindi – हनुमान को अपनी अमोघ शक्ति की याद कैसे आयी

सीता जी की अपहरण की बात जब सम्पूर्ण वानर सेना को पता चला तो वह सभी आपस में बैठ कर विचार विमर्श करने लगे कि श्री राम (Ram) की सहायता कि लिए सबसे पहले समुद्र को कैसे पार किया जाए। उनके सामने ये सबसे बड़ी समस्या थी।
800 मिल चौड़ी समुद्र को पार करना आसान नहीं था। बाली कि पुत्र अंगद (Angad) पूरी वानर सेना के मुख्य थे। उन्होंने वानर के सभी सेनापतियों से अपने अपने बल और शक्ति का परिचय देने को कहा।
वानर वीर “गज” ने कहा – मैं दस योजन की छलांग लगा सकता हूँ।
उसी तरह “गवाक्ष” वानर ने कहा – 20 योजन तक छलांग लगा सकता हूँ।
वानर सरभ ने 30 योजन कही, उसी तरह द्विद ने कहा मैं 70 योजन छलांग लगा सकता हूँ, शुषेण ने 80 कहा।
सारी बातें सुनकर सेनापति जांबवान ने कहा मैं वृद्ध होकर भी 90 योजन का छलांग लगा सकता हूँ।
अंगद ने 100 योजन तक छलांग लगाने की बात कही, लेकिन लौटते समय वो दुबारा इतना लगा पाएंगे, ये शक्ति उनमें नहीं थी।
जांबवान जी ने हनुमान (Hanuman) को देखा, जो चुप चाप एक कोने में शांत होकर बैठे थे। उन्होंने हनुमान (Hanuman) को आवाज़ लगाई। कहा – हे वीर हनुमान तुम इस तरह चुप चाप क्यों बैठे हो? तुम कुछ किन नहीं बोल रहे हो? क्या तुम्हे याद नहीं की तुम्हारा जन्म ही श्री राम के कार्य को पूरा करने के लिए हुआ है। तुम वायु पुत्र हनुमान हो। तुम अपने पिता के सामान ही बलवान हो। तुममें बल, बुद्धि, विवेक, संयम और शील में सर्वश्र्ष्ठ हो। तुम अपनी शक्ति का स्मरण करो। तुमने तो अपने बचपन में ही ऐसे ऐसे अद्भुत कार्य किये हैं जो दूसरों के लिए असंभव है। तुम्हारे लिए ये 800 मिल का समुद्र पार करना कौन सी बड़ी बात है।

जांबवान जी  के ऐसे उत्साहपूर्ण वचन सुनकर हनुमान जी पुरे उत्साह से भर गए। हनुमान जी ने अपने शरीर को जमीं से आकाश तक बड़ा कर लिया। इनके इस रूप से धरती काँप उठी। उनकी आवाज़ में ऐसे सिंह नाद था मानो संपूर्ण ब्रह्माण्ड हिल गया हो।

वे वहां पर सभी वानरों को सम्बोधित करके कहने लगे, हे वानरों – आप सभी चिंता मुक्त हो जाएँ। मैं समुद्र को पार कर लंका जाऊँगा और सीता माँ का पता लगाऊंगा। लंका को भस्म कर दूंगा। रावण को उसके कुल सहित मार डालूंगा।
उन्हें अपनी शक्ति का पूर्ण अहसास हो चूका था। हनुमान (Hanuman) जी समुद्र पार करने के लिए महेंद्र पर्वत के शिखर पर पहुँच गए।
श्री राम (Shri Ram) का स्मरण करते हुए अपने शरीर को सिकोड़ कर, अपने गर्दन और सर को ऊँचा उठाया और एकाग्रचित्त होकर छलांग लगा दी।  हनुमान जी के वेग को देख कर वानरों में ख़ुशी के लहर दौड़ गयी।
मनुष्य अपनी अंदर की प्रतिभा पहचान ले तो वह महावीर हनुमान की तरह अपने पराक्रम, वीरता और विश्वास से अपने लक्ष्य को भेद सकता है।

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