Gayatri Mantra Meaning in Hindi – गायत्री मंत्र का अर्थ और महिमा

Gayatri Mantra Meaning in Hindi

गायत्री मंत्र का अर्थ और महिमा

गायत्री माता जगत की अधिष्ठात्री देवी है, इनकी माहिमा अनंत है । ये अपने भक्तो को मनवांछित फल प्रदान करती है
सम्पूर्ण वेद गायत्री पूजा तथा मंत्र को सर्वोपरि मानते है। ये देवी धन धान्य,संतान, आरोग्य, मोक्ष सभी कुछ प्रदान करती है ।

इनका मंत्र है – ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेन्यं । भर्गो देवस्य धीमहि, धीयो यो न: प्रचोदयात् ।।

ॐ – सब की रक्षा करने वाला
भू – जो जगत के जीवन का आधार है, प्राण से भी प्रिय और स्वयंभू है
भूव: – जो सब दुखो से रहित , जिस के संग से जीव सब सुखो से छूठ जाते है
स्व: – जो इस जगत में व्याप्त होकर सब को धारण करता है
तत – उसी परमात्मा के स्वरुप को
सवितु – जो सम्पूर्ण जगत का उत्पादक और ऐश्वर्य का दाता है
र्वरेन्यं – जो स्वीकार करने योग्य अतिश्रेष्ठ है
देवस्य – जी सब सुखो का देने वाला है, जिसकी प्राप्ति की कामना हम सब करते है
भर्गो – शुद्ध स्वरुप और पवित्र करने वाला चेतन ब्रह्मस्वरूप है
धीमहि – हम लोग धारण करे , इस का प्रयोजन यह है की
यो – जो सविता देव परमात्मा है
न: – हमारी
धीयो यो – बुद्धियों को
प्रचोदयात् – प्रेरित करे अर्थात बुरे कर्मो से छुड़ाकर अच्छे कर्मो में प्रवृत करें

मंत्र का अर्थ – हे माँ आप सब की रक्षक हो और सृष्टि की प्रत्येक वस्तु में तुम निवास करती हो। आप प्राणो से भी प्रिय सभी का दुख नाशक और सुखदात्री हो। आप सृष्टि को पैदा करने वाली और इसकी संचालक हो । सभी दिव्या गुणों से आप युक्त हो , ऐसी दिव्या ज्योति के प्रकाश पुंज वाली माँ से हमारी प्रार्थना है की हमारी बुद्धि को श्रेष्ट मार्ग पर ले चले |

इस मंत्र का जाप दिन में तीन बार अवश्य करना चाहिए ।

1 प्रातः सूर्य उदय के पहले (ब्रह्म मुहर्त में )
2 तारें निकलने के पहले (गौधूलि बेला)
3 सूर्य अस्त के बाद (संध्या बेला)

गायत्री देवी सूर्य में निवास करती है। इनमे अपरम्पार शक्ति है और ये जल्दी ही अपने भक्तो से प्रसन्न हो जाती है ।

इनकी पूजा में गुड़हल फूल(China rose) या अनार इत्यादि के पुष्प चढ़ाने से माता प्रसन्न होती हैं। इनका जप रुद्राक्ष की माला से करना चाहिए ।

गायत्री मंत्र की महिमा (Gayatri Mantra Significance)

एक समय की बात है इंद्रदेव ने पंद्रह वर्षों तक बारिश नहीं की थी। संसार अत्यंत कठिन कल से गुजर रहा था ।अनावृष्टि के कारण चारो तरफ अकाल पड़ रहा था। लोग बेइंतिहा मर रहे थे। उस समय ब्राह्मणों ने विचार किया कि इस आपातकाल की दशा में गौतम मुनि ही हमारी सहायता कर सकते हैं। माँ गायत्री की उपासना से आज भी उनके आश्रम में ऐसी स्थिति नहीं है। गौतम मुनि इस समय तपस्या के बड़े धनि हैं । अतः हम सबों को उनकी शरण में जाना चाहिए ।
इसतरह समस्त ब्राह्मण ऋषि गौतम के आश्रम पर गए और नम्रतापूर्वक उन्हें अपने कष्ट के बारे में बताया। गौतम मुनि ने कहा आप चिंता न करें हमारे यहाँ रहें आपलोगों का रहने -खाने सब चीज़ की व्यवस्था हो जाएगी। ब्राह्मणों को कहकर वे माँ गायत्री की प्रार्थना करने चले गए। अपने दग्ध ह्रदय से उन्होंने माता से विनती की – हे माँ तुम्हीं महाविद्या वेदमाता और परमेश्वरि हो, तुम्हीं स्वाहा और तुम्हीं स्वधा हो। तुम संपूर्ण कामनाओं को सिद्ध करने में कुशल हो। हे देवी तुमको मेरा कोटिशः प्रणाम है। तुम भक्तों के लिए कल्पलता हो, हे देवी तुम सूर्य मंडल में निवास करती हो। हे माता तुम सम्पूर्ण प्राणियों का उद्धार करने वाली हो।

गौतम ने माता गायत्री (Ma Gayatri) को उत्कट होकर विनती की , कहने लगे हे देवी हमारे आश्रम पर ब्राह्मण अतिथि लोग पधारे है । आप उन सब की रक्षा करें और उनके संकट का निवारण करें ।

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इस प्रकार गौतम मुनि के स्तुति सुनकर माँ गायत्री प्रकट हो गयी और उन्होंने गौतम ऋषि को पूर्ण पात्र दिया ।

भगवती ने उनसे कहा की तुन्हे जिस वास्तु की भी आवश्यकता होगी ये पात्र तुम्हारी हर इच्छा पूर्ण करेगा, ऐसा कहकर माँ गायत्री अंतर्ध्यान हो गयी। भगवती के दिए पात्र से गौतम मुनि का आश्रम अन्न फल वस्त्र यज्ञ सामग्री आदि वस्तुओ का पर्वत के समान ढेर लग गए । गौतम मुनि ने सभी ब्राह्मणो को बुलाकर धन धान्य वस्त्र आदि समर्पित किये । सभी ब्रह्मण गौतम मुनि के साथ गायत्री यज्ञ में भाग लेने लगे ।

गौतम मुनि के ये आश्रम स्वर्ग की तरह हो गया । ब्राह्मण की सभी स्त्रियां श्रीसम्पन्न हो गयी और देवनारियों के सामान लगने लगी ।

इस तरह माँ गायत्री की कृपा से गौतम मुनि ने सारे ब्राह्मणो का भरण पोषण बारह वर्ष तक किया । कुछ समय बाद अकाल का समय समाप्त हो गया । गौतम ऋषि द्वारा किये गए कृत्य का यश माता की कृपा से दसों दिशाओ में पुष्प के सुगंध के तरह फ़ैल गया ।

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