Essay on Trees in Hindi – वृक्ष पर निबंध

Essay on Trees in Hindi – वृक्ष पर निबंध

हमारे यहां यह चर्चा का विषय है इस पृथ्वी पर पहले पेड़- पौधे की उत्पत्ति हुई या मनुष्य की। यह बड़ी ही दिलचस्प बात है और जानने योग्य भी है। हमारे वेद पुराण में साफ तौर पर कहा गया है कि मनुष्य की उत्पत्ति के पहले नाना प्रकार के पेड़ पौधों की उत्पत्ति की गई है, ताकि उन्हें जीवन यापन में सुविधा हो सके। मनुष्य की उत्पत्ति के पहले ईश्वर ने उनकी सुविधा के लिए जल, पृथ्वी, चांद, सूरज, नदी, पर्वत, झरने, पेड़-पौधे अनेक चीजों की उत्पत्ति की। इन सारी चीजों में सबसे महत्वपूर्ण चीज है तो वह है वृक्ष (Trees), जिससे हमारी सांसे चलती है। ये हमारी जीवनदायिनी हैं। इनके महत्व को समझाते हुए ही हमारे पूर्वजों ने इन्हें अपना पूज्य माना और इनकी पूजा करने का हमें शिक्षा दिया।

संत कबीर दास ने इनके महत्त्व को समझते हुए कहा है –

तरुवर फल नहीं खात हैं,नदी न संचय नीर
परमारथ के कारने, साधून धरा शरीर

Essay on Trees in Hindi

वास्तव में हमारे पूजनीय वही होते हैं जो दूसरों के हित के लिए अपने आप को समर्पित करते हैं। जिनमें लेशमात्र भी स्वार्थ की भावना नहीं होती। हमारे वृक्ष भी किसी संत से कम नहीं है। ये जीवों द्वारा छोड़े गए कार्बन डाई औक्साइड को ग्रहण करते हैं युर औक्सीजन हमें देते हैं । इसतरह ये पर्यावरण में संतुलन बनाए लख्ते हैं । इनके कारण वातावरण स्वच्छ और शुद्ध होता है ।

पेड़-पौधे प्रकृति के सौंदर्य को बढ़ाते हैं । इनकी उपस्थिति में ही हमारी प्रकृति हरी भरी दिखाई देती है । पेड़ तापक्रम को नियंत्रित करते हैं । ये अनेक कीड़े -मकोड़े और पक्षियों को घर प्रदान कर उन्हें संरक्षण देते हैं । बच्चों के लिए वृक्ष अति प्रिय होते हैं । इनकी डालियों को पकड़कर झूला झूलना , इनकी छाया में बैठकर मस्ती करना इन्हें अच्छा लगता है ।

वृक्ष हमारे लिए कई प्रकार से लाभदायक होते है । इनकी पत्तियों , छालों एवं जड़ो से हम विभिन्न प्रकार की औषधियां बनाते हैं । इनसे हमें स्वादिष्ट और अमृत के सामान फल ,फूल ,सब्जियां प्राप्त होते हैं । वृक्षों से प्राप्त लकड़ियों से भवन निर्माण और फर्नीचर बनते हैं । जहाँ वृक्षों की प्रयाप्त मात्रा होती है वहां वृष्टि अच्छी होती है । वृक्षों की कमी से सूखा और भूख मरी की स्थिति आती है । इनसे हमारी बहुत सी जरूरते पूरी होती हैं । वृक्ष हमारी शौक ,सजावट और फैसन में भी सहायक होते हैं । मानव को इनकी आवश्यकता जन्म से लेकर मृत्यु पर्यन्त तक पड़ती है ।

वृक्ष से औद्योगिक विकास भी होता है । इनसे प्राप्त लाभ के कारण ही मनुष्य ने इनका दोहन शुरू कर दिया । वृक्षों की अंधाधुन कटाई होने लगी । मानव अपने लाभ के लिए वनो को बर्वाद करने लगा। साथ में खुद के लिए कब्रिस्तान बनाने लगा। आज व उन्मूलन के कारण पर्यावरण अत्यंत प्रदूषित हो गए । जबकि वृक्ष पर्यावरण को मुक्त रखने में मददगार होते हैं ।

मनुष्य अपने लाभ के लिए फैक्ट्रियां और बिल्डिगों की संख्या में तो निरंतर वृद्धि कर रहा है लेकिन उस अनुपात में पेड़ों को लगाने की ओर तनिक भी ध्यान नहीं दिया । मानव आज अपने स्वार्थ के लिए दानव बन चूका है और प्राकृतिक संपदा को उजाड़ रहा है ।

इसके कुपरिणाम से प्रकृति हमें समय -समय पर जबरदस्त धक्का देती है । पर मानव आज भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है । प्रक्रि अपने विकराल रूप धारण करके हमें अनेक बार चेतावनी देती है । कभी बाढ़ के रूप में ,कभी जंगलो में भीषण आग के रूप में ,कभी सुनामी के रूप में और कभी बादल फटने के रूप में ।हर तवाही में प्रकृति मनुष्य को चेतावनी दे रही है और कह रही है -हे मानव ! अब ठहर जाओ , नहीं तो मैं तुम्हें बर्वाद करने को तैयार बैठी हूँ ।

एक महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन कहते हैं – “एक मेज ,एक कुर्सी, एक कटोरा फल, एक वायलन ; भला खुश रहने के लिए और क्या चाहिए । उन्होंने अपने इस विचार को जिन महत्वपूर्ण चीज़ों से जोड़ा है वे सभी चीज़ें वृक्ष से प्राप्त होते हैं । इसलिए हमे पेड़ -पौधों से प्रेम करना चाहिए , उन्हें अपना हितैषी और सर्वश्रेष्ठ मित्र मानना चाहिए । पेड़ -पौधों और वनोन्मूलन से ग्लोबल वार्मिंग की समस्या उत्पन्न हो गई है । कुछ वर्षों से जलवायु परिवर्तन का संकट गहराने लगा है ।

तापमान में वृद्धि ,मौसम में अचानक परिवर्तन ,वनस्पतियों की प्रजातियां लुप्त होना ,हिमशृंखलन होना ,समुद्री जल स्तर में लगातार वृद्धि होना – ये सारे जलवायु परिवर्तन के परिघटना के सूचक हैं |

मनुष्य अपने विकास के लिए पेड़ों की निरंतर कटाई कर रहा है । इससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है । हमें यह समझना पड़ेगा की पर्यावरण और विकास एक दुसरे के पूरक हैं । वृक्षों की कटाई करके अपना विकास नहीं बल्कि अपना कब्र तैयार कर रहे हैं । आज हमारा अस्तित्व और विकास दोनों खतरे में है ।

हमारा खैरियत इसी में है की हम अपनी प्राकृतिक संपदा का सदुपयोग करें ,उनका दोहन नहीं । सतत विकास ऐसी प्रक्रिया है जिसमें सामाजिक और आर्थिक विकास के साथ -साथ पर्यावरण को भी सुरक्षित रखने का ध्यान रखना अति आवश्यक है ।

वर्ष 2030 तक विश्व की जनसंख्या 8 .3 अरब से भी अधिक होने का अनुमान है । भोजन और ऊर्जा की मांग 5 % से अधिक हो जाएगा और स्वच्छ जल की मांग 30 % से अधिक हो जाएगी । इसकी आपूर्ति के कारण भयंकर संकट उतपन्न हो सकता है ।

इन समस्याओं का संकटमोचन वृक्ष हैं । हम जितना अधिक वृक्ष लगाएंगे हमारा जीवन और विकास उतना ही सुगम और सुरक्षित हो जाएगा । भारत सरकार भी विभिन्न राज्यों में वृक्ष लगाने के लिए अनेक योजनाओं पाए काम कर रही है । इसके आलावा अनेक गैर सरकारी संगठन भी वृक्षारोपण का कार्य कर रहे हैं ।

हमें भी लोगों के बीच जाकर वृक्ष से होने वाले लाभ की चर्चा करनी चाहिए , उन्हें पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित और जागरूक करना चाहिए । कुछ संस्थाएं वृक्षों को गोद लेने का कार्य कर रहे हैं । बच्चों के जन्मदिन पर भी उनके हाथो से पेड़ लगवाकर उनमें पेड़-पौधों के प्रति प्रेम और संरक्षण की भावना जाग्रत कर सकते हैं ।

यदि हम चाहते हैं की हमारा सतत विकास हो , प्रदूषण काम हो , पर्यावरण स्वच्छ रहे , हम स्वस्थ रहें तो हमें अधिक से अधिक लगाने के लिए अग्रसर होना पड़ेगा । इनकी रक्षा करनी होगी । स्कूल ,कॉलेज ,कार्यालय सभी संस्थानों को वृक्ष लगाने के लिए प्रोत्सहति करना चाहिए । शिक्षा के पाठ्यक्रम में भी इसे शामिल किया जाना चाहिए ।

वृक्ष लगाओ जीवन बचाओ
सतत विकास का मार्ग बनाओ

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