Bael Fruit Benefits in Hindi – बेल के फायदे

Bael Fruit Benefits in Hindi – बेल के फायदे

हिंदू सनातन धर्म में बेल (Bael Fruit) वृक्ष का बहुत महत्व है। यह वृक्ष शिव को अति प्रिय है। माना जाता है कि बेल वृक्ष में शिव का निवास होता है । शिव पूजन में बेलपत्र तथा इसका फल ” बेल ” अर्पित करना शुभ माना जाता है। बेलपत्र शिव को अति प्रिय है। इसके तीनों पत्ते आपस में संयुक्त होते हैं। ये सत,रज और तम के रूप में माना जाता है। बिल्व पत्र पत्ते कभी-कभी चार या पांच पत्तों में भी होता है ।

यह वृक्ष भारत के प्रायः सभी प्रदेशों में पाया जाता है। इसकी अधिकतम ऊंचाई 25 से 30 फीट होती है। यह छायादार वृक्ष विशाल वृक्ष पत्तों से ढका होता है। इसके पुष्प श्वेत रंग के होते हैं। बेल के पत्तों की भीनी- भीनी खुशबू मन को भाव विभोर कर देती है। इसकी शाखाएं कांटेदार होती हैं।

यह वृक्ष औषधीय गुणों से भरपूर होता है। बेल फल शुरू में हरा होता है, पक जाने के बाद यह पीले रंग का हो जाता है। गुदा के बीच बीच में बीज और एक तरह का लिसलिसा पदार्थ होता है।

बेल वृक्ष एक ऐसा वृक्ष है जो धार्मिक रूप से हमारे मन को तो संतुष्ट करता ही है साथ ही आयुर्वेदिक रुप में हमें कई रोगों से मुक्त करता है ।ऐसा लगता है मानो भोलेनाथ ने इस वृक्ष की उत्पत्ति मानव कल्याण के लिए ही की हो। इस वृक्ष के फल, फूल, पत्ते, छाल, जड़ सभी अत्यंत उपयोगी होते हैं।

बेल के पत्ते जहां कफ, गैस और दर्द विनाशक होते हैं, वहीं इसके फूल दस्त तथा उल्टी से निजात दिलाते हैं ।इसके बीज से जो तेल निकलता है वह जोड़ों के दर्द और सूजन में लाभदायक होता है।

बेल का गूदा अत्यंत स्वादिष्ट ,स्निग्ध ,मधुर और सुपाच्य होता है । इसका गुदा ऐसे भी खा सकते हैं और शरबत बनाकर भी सेवन कर सकते हैं । यह पेट के कब्जियत को दूर करता है और पेट ठंडा रखता है । इसका मुरब्बा जितना लजीज होता है उतना ही निरोगी भी होता है ।

बेल के पोषक तत्व
बेल में अनेक पोषक तत्व पाए जाते हैं । जैसे – Calcium, Phosphorus, Fibre, Protein, Iron, Vitamin , Carbohydrates, Organic compounds etc .

Bael Fruit benefits – बेल के फायदे

1) बेल कफ में फायदा करता है – बेल का गूदा 25 से 30 ग्राम पानी में धीमी आंच पर उबाल लें । जब आधा पानी बचे तो छानकर थोड़ा सा केसर, चुटकी भर जायफल चूर्ण मिलाकर उसका सेवन करें। थोड़ा-थोड़ा करके पीना यह अत्यंत लाभकारी होता है। सारा कफ धीरे- धीरे निकल जाता है और खांसी भी ठीक हो जाता है।

2) बेल चेचक में लाभकारी होता है – चेचक होने पर रोगी को शरीर में जलन और बेचैनी होती है। इसके आराम के लिए बेल के रस में मिश्री मिलाकर पीने से बहुत राहत मिलता है। इसके पत्तों का पंखा बनाकर हवा करने से भी बहुत आराम मिलता है ।

3) बेल खून की कमी को दूर करता है – पके हुए बेल को सुखाकर इसे गर्म राख में भून लें। इसका चूर्ण बनाकर एक चम्मच प्रतिदिन गर्म दूध और मिश्री के साथ लें। इसे लगातार एक महिना प्रयोग करें। चमत्कारी लाभ होता है ।

4) बेल कांटा निकालने में सहायक होता है – इसके पत्तों की पोटली बनाकर जहां पर कांटा चुभा हो बांधे। दो-तीन दिन के अंदर ही कांटा अपने आप गल जाता है और आराम मिलता है ।

5) बेल पेट दर्द में फायदेमंद होता है – बेल के पत्तों को थोड़ी सी काली मिर्च के साथ पीसकर मिश्री मिलाकर सेवन करें। दिन में दो तीन बार करें । इससे पेट दर्द ठीक हो जाता है ।

6) बेल जले हुए स्थान पर लगाने से फायदा करता है – बेल के पत्तों का रस जले हुए पर लगाने से जलन में तुरंत आराम मिलता है और घाव भी नहीं होने देता ।

7) बेल Diabetes को नियंत्रित करता है – बेल के पत्तों को कूटकर रस निकाल कर 10 ग्राम प्रतिदिन सेवन करने से डायबिटीज में अत्यंत फायदा नजर आता है।

8) बेल उल्टी में लाभकारी सिद्ध होता है – बेल को पीसकर चावल के पानी ( माड़ ) के साथ मिलाकर पीने से उल्टी बंद हो जाता है। यह नुस्खा गर्भावस्था में अधिक फायदा करता है।

9) बेल बुखार के लिए लाभदायक होता है – बेल का पका हुआ गूदा खाने से बुखार में लाभ होता है। इसके अलावा बेल के जड़ का क्वाथ बनाकर पीने से ज्वर नष्ट हो जाता है।

10) बेल बवासीर में लाभदायक होता है – बेल का चूर्ण और पानी के साथ मिश्री मिलाकार दिन में दो से तीन बार लेने से बाबासीर में लाभकारी सिद्ध होता है ।

11) बेल आमाशय और आंतों की गर्मी को दूर करता है – बेल का मुरब्बा प्रतिदिन सुबह-शाम लेने से आमाशय तथा आंत की गर्मी दूर हो जाती है साथ में अगर पेट में अल्सर हो तो उसमें भी बेल अत्यंत लाभकारी होता है।

12) बेल सिर दर्द में रामबाण का काम करता है – बेल की जड़ को पानी से घिसकर इसका लेप ललाट पर लगाएं । दर्द गायब हो जाएगा।

13) बेल कब्जियत को दूर करता है – बेल के पत्तों का रस में काली मिर्च एक चुटकी मिलाकर सेवन करने से कब्जियत दूर हो जाता है । इसका गुदा का सेवन करने से भी कब्जियत में फायदा करता है।

14) बेल लू से बचाता है – बेल के पत्ते जल से पिस ले। उसे पैर के तलवे में तथा हाथ के हथेली में मेहंदी की तरह लेप लगाएं। सारी पीड़ा और जलन समाप्त हो जाता है।

15) बेल दस्त में लाभदायक होता है – ऐसे समय में बेल का मुरब्बा का प्रयोग करना अति उत्तम होता है।

16) बेल हृदय की पीड़ा को हरता – बेल के पत्तों के रस में गाय का घी मिलाकर सेवन करने से हृदय की पीड़ा में अत्यंत लाभकारी होता है।

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