Baba Ramdev Biography in Hindi – बाबा रामदेव की जीवनी

Baba Ramdev Biography in Hindi – बाबा रामदेव की जीवनी

आज के समय में स्वामी बाबा रामदेव (Baba Ramdev) एक ऐसे व्यक्तित्व के धनी इंसान हैं जो किसी परिचय के मोहताज नहीं है। इन्होंने अपनी मेहनत और विवेक के बल पर जो मुकाम हासिल किया है, वे विरले लोग ही कर पाते हैं। उन्होंने ना केवल अपना बल्कि योग और आयुर्वेद के माध्यम से पूरे विश्व में भारत को गौरान्वित करने का कार्य किया है ।

बाबा रामदेव (Baba Ramdev) को योग गुरु के नाम से हम सभी जानते हैं। इन्होंने योग और आयुर्वेद के माध्यम से करोड़ों लोगों को अपना अनुयायी बनाया है। आयुर्वेद और योग के माध्यम से उन्होंने भारत तथा दुनिया के कई देशों के लोगों की कई बीमारियां ठीक की है। आज ये योग शक्ति के रूप में उभरे और विश्व प्रसिद्ध योग गुरु बन गए।

Baba Ramdev Biography in Hindi

परिचय – रामदेव बाबा का जन्म हरियाणा राज्य के महेंद्रगढ़ जिले के अली सय्यद नामक गांव में हुआ था। इनका जन्म 25 दिसंबर 1965 को मध्यवर्गीय किसान परिवार में हुआ था। इनकी माता का नाम गुलाबो देवी और पिता का नाम रामनिवास यादव है। इनका वास्तविक नाम रामकृष्ण यादव है जो सन्यास ग्रहण करने के बाद आज यह स्वामी रामदेव के नाम से जाने जाते हैं।

शिक्षा – इन्होंने आठवीं तक की शिक्षा शहजादपुर के सरकारी स्कूल से ली थी। इसके बाद उन्हें लकवा मार गया था । माता पिता को एलोपैथिक इलाज करने का सामर्थ न था । निरंतर योगासन के अभ्यास और जड़ी -बूटी से तैयार औषधि से अद्भुत प्रभाव हुआ और वे पूर्ण रूप से स्वस्थ हो गए । इसके बाद उन्होंने खानपुर के गुरुकुल में प्रद्युमन आचार्य और योगाचार्य बलदेव जी से संस्कृत एवं योग की शिक्षा ली ।

उन्होंने युवा अवस्था में ही सन्यास रहने का निर्णय ले लिया था । सन्यास की शिक्षा इन्होने स्वामी शकर देव जी से ग्रहण की । तब से ये स्वामी रामदेव के नाम से प्रसिद्द हुए । जब खुद गुरुकुल में शिक्षा लेते थे तभी से अपने आस – पास के लोगों को निःशुल्क योग का प्रशिक्षण देते थे । इसके बाद वे उत्तराखंड के हरिद्वार चले आए। यहां आकर उन्होंने अपने आपको spritualy बहुत उन्नत बनाया । यहां पर स्वामी जी ने आत्म अनुशासन, अध्यात्म ज्ञान तथा मैडिटेशन का अभ्यास किया । इन्होने गुरुकुल कांगरी विश्वविद्यालय में भारत के प्राचीन ग्रंथों की कई साल तक अध्ययन किया ।

सार्वजनिक जीवन में प्रवेश- 1995 में रामदेव बाबा ने दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट की स्थापना की। अभी तक रामदेव बाबा को कोई भी नहीं जानता था। 2003 में आस्था TV ने बाबा रामदेव के योग कार्यक्रम को रोज दिखाना शुरू किया। इससे बहुत लोग जुड़ने लगे। लोगों के बीच बहुत जल्दी ही इनकी ख्याति बढ़ने लगी। देश -विदेश की बड़ी बड़ी हस्तियां इनके योग शिविर में शामिल होने लगे। बाबा रामदेव के शिविर में अमिताभ बच्चन और शिल्पा सेट्टी जैसे सेलिब्रिटी भी जुड़ने लगे। इसके कारण इनके योग शिविर में लोगों की संख्या बड़ी तेजी से बढ़ने लगी ।उन्होंने उत्तर प्रदेश के देवबंद में मुस्लिम समुदाय को पहली बार संबोधित किया। इतना ही नहीं संयुक्त राष्ट्र के जनरल सेक्रेटरी कोफी अन्नान ने इन्हें गरीबी उन्मूलन के लिए भाषण देने को आमंत्रित किया था।

पतंजलि योग पीठ की स्थापना (Patanjali Peeth)– फिर उन्होंने योग और आयुर्वेद के माध्यम से लोगों को स्वस्थ रखने तथा अपनी स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पतंजलि योगपीठ की स्थापना की। पतंजलि योगपीठ हरिद्वार में तो है ही साथ में UK नेपाल, कनाडा और मॉरिशस,यूएसए जैसे देशों में भी विस्तृत है । ब्रिटेन में भी इन्होंने 2006 में योग और आयुर्वेद का बढ़ावा देने के लिए पतंजलि ट्रस्ट की स्थापना की।

बाबा रामदेव के प्रमुख कार्य – 2006 में इन्होंने आचार्य बालकृष्ण के साथ मिलकर पतंजलि आयुर्वेद कंपनी की स्थापना की । आज इनकी दवाइयां तथा घरेलू उपयोग में आने वाली अनेक वस्तुएं भारत के घर- घर में जाने लगी है। इन्होंने पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट (Patanjali Yogapeeth Trust) के अलावा अत्याधुनिक औषधि निर्माण इकाई पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड (Patanjali Auyrved Limited) के नाम से दो सेवा प्रोजेक्ट की स्थापना की है। जिसके माध्यम से शिक्षा, प्राणायाम, योग अभ्यास तथा वैदिक शिक्षा इत्यादि का प्रचार प्रसार किया जाता है।

योग शिविर आयोजन – अपनी योग शिविर के द्वारा स्वामी जी भारतीय संस्कृति और योग के महत्व को देश-विदेश में जन -जन तक पहुंचा रहे हैं। अपने इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने आस्ट्रेलिया का दौरा किया और वहां भारतीय संस्कृति और योग का प्रचार प्रसार किया। वहां के लोग इससे काफी प्रभावित हुए। बाबा का एक संकल्प है कि हमारा पूरा देश स्वस्थ हो। इस कड़ी को बढ़ाने के लिए उन्होंने सेना के जवानों को भी योग सिखाना शुरू किया; जिसकी शुरुआत उन्होंने जैसलमेर के जवानों को योग सिखा कर किया । इन्होंने दिल्ली में भी सैनिकों को योग की शिक्षादी । इससे भारतीय संस्कृति को देश-विदेश में बढ़ावा मिला।

प्राचीन समय में हमारे ऋषि- मुनि अपने योग साधना तथा प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा अनेक रोग ठीक करते थे। उसी प्रकार रामदेव जी भी अपने योग के प्रयास से प्राचीन भारत के उसी गौरव को पुनः स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं।

भ्रष्टाचार के खिलाफ– इन्होंने काले धन को स्वदेश वापस लाने की मांग करते हुए भारत की 1,00,000 किलोमीटर की यात्रा की। भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबा रामदेव जी ने अपनी आवाज बुलंद की । उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान में भी अपनी प्रमुख भूमिका निभाई।

बाबा रामदेव ने 27 फरवरी 2011 को रामलीला मैदान में जनसमूह को संबोधित किया उसमें स्वामी अग्निवेश और अन्ना हजारे भी पहुंचे। 4 जून 2011 से दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन के साथ सत्याग्रह की घोषणा कर दी। इस दिन प्रातः 7:00 बजे सत्याग्रह आरंभ हुआ। रात को बाबा अपने सहयोगियों के साथ पंडाल के मंच पर सो रहे थे तभी अचानक चीख – पुकार सुनकर मंच से नीचे कूद पड़े। 5 जून 2011 को बाबा को लेकर कई अफवाहें चलती रही । हरिद्वार पहुंचने के बाद पतंजलि योगपीठ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपने बचकर निकलने की उन्होंने पूरी कहानी सुनाई ।

सम्मान –

* बरहमपुर विश्वविद्यालय द्वारा स्वामी जी को डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की गई।
* इंडिया टुडे पत्रिका तथा देश के अन्य शीर्ष पत्रिकाओं द्वारा रामदेव जी को सबसे ऊंचे ,शक्तिशाली और
असरदार 50
प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया गया ।
* राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय तिरुपति आंध्र प्रदेश द्वारा स्वामी जी को महामहोपाध्याय की मानद उपाधि से
अलंकृत किया
गया ।
* ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय द्वारा स्वामी जी को ऑनररी डॉक्ट्रेट प्रदान किया गया।
* डी वाई पाटिल यूनिवर्सिटी के द्वारा 2010 में इन्हें डी एससी (ऑनर्स) इन योग की उपाधि दी गई।
* बाबा रामदेव को 2011 में महाराष्ट्र के राज्यपाल, के शंकर नारायण द्वारा चंद्रशेखरानंद सरस्वती अवार्ड प्रदान
किया
गया।

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