Avatars of Shiva – भगवान शिव के अवतार

Avatars of Shiva – भगवान शिव के अवतार

प्रारंभिक काल में ब्रह्मा जी (Brahma) को सृष्टि की रचना में अनेक बाधाएं आ रहे थे। उन्हें शिव (Shiva) के द्वारा सृष्टि की रचना का आज्ञा भी मिला था और उनकी स्वयं ही यह प्रबल इच्छा थी कि सुंदर जगत की रचना की जाए। उन्होंने इसके लिए शिवजी की आराधना की और अपनी इच्छा उनके सामने प्रकट किया। सृष्टि की रचना में आए बाधाओं का भी शिव जी के साथ जिक्र किया। शिव ने उन्हें सांत्वना दिया और कहा कि तुम्हारी सृष्टि की रचना में मैं तुम्हारे साथ हूं।

Avatars of Shiva

उन्होंने अपने 5 अवतार की बात भी कही। जो इस प्रकार है – Avatars of Shiva

1 – श्वेत लोहित कल्प – सर्वप्रथम शिव ब्रह्मा को आशीर्वाद दिया और कहा कि इस शुभ कार्य में मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं। यह उन्नीसवां कल्प था। उन्होंने अपना स्वरूप स्वरूप सद्योत्जात बालक के रूप में प्रकट किया जिनका रंग श्वेत और लालिमा लिए हुए था। उन्होंने अपने शरीर से 4 लड़कों को उत्पन्न किया और कहा कि यह योग शास्त्र की पद्धति को प्रकट करेंगे। इन 4 लड़कों का नाम था- सनंदन, नंदन, विश्विनंद, और उपनंद।

2 -रक्त कल्प – जब बिसवां कल्प आया तो ब्रम्हा का रंग लाल हो गया। उन्होंने लाल वस्त्र और लाल आभूषण पहनकर फिर से सृष्टि की रचना हेतु शिव का आवाहन किया। शिव उनके सामने प्रकट हुए तो उनके दोनों नेत्र लाल थे और लाल रंग के आभूषण उन्होंने भी धारण किया हुआ था। वह एक सलोने बालक के रूप में प्रकट हुए ।उनका नाम बामदेव था। उन्होंने अपने चार शिष्य उत्पन्न किए जिनका रंग और रूप सबकुछ लाल था। शिवजी ने चारों शिष्यों के साथ योग की स्थापना की उनके शिष्यों के नाम थे बिरज , विवाह, विशोक विश्वभावन ।

3 -पितवासा कल्प -इक्कीसवी कल्प में फिर ब्रह्मा जी ने शिव जी का ध्यान सृष्टि उत्पन्न करने के लिए किया । तो शिवजी पीले वस्त्र में पीले अलंकार से सुशोभित होकर स्वयं पीतवर्ण में उनके सम्मुख प्रकट हुए। ब्रह्मा जी शिव गायत्री का जाप करके उनकी स्तुति कर रहे थे। शिवजी तत्पुरुष के रूप में प्रकट हुए और फिर से अपने 4 शिष्य उत्पन्न किए। वे भी पीले रंग के वस्त्र और आभूषण धारण किए हुए थे। शिव ने उनके द्वारा योग शास्त्र उत्पन्न किया। ताकि सृष्टि की रचना धार्मिक दृष्टि से अच्छे से चल सके।

4 -परिवर्त कल्प -अब बाईसवां कल्प आ गया ।इस कल्प में ब्रह्मा जी के आवाहन करने पर शिव काले वस्त्र, काला यगोपवित, काला मुकुट, काला भस्म धारण किए एक सुंदर बालक के रूप में प्रकट हुए। इस समय शिव अघोर अवतार में प्रकट हुए थे। अपनी भुजाओं से 4 शिष्य उत्पन्न किया और तब अघोर योग को संसार में प्रसिद्ध किया।

5 – विश्वरूप कल्प -23वां कल्प जिसे विश्वरूप कल्प कहते हैं। ब्रह्मा की प्रार्थना से सबसे पहले विश्व रूपा भवानी प्रकट हुई। उनके सारे वस्त्र और आभूषण श्वेत थे और उनका शरीर का रंग भी श्वेत था। उसी रंग रूप तथा आभूषण के साथ शिवजी भी प्रकट हुए और अपनी भुजाओं से योगशास्त्र को प्रकट करने के लिए चार शिष्यों को उत्पन्न किया। उनके यह शिष्य श्वेत वस्त्र और आभूषण पहने हुए थे। इनके द्वारा शिव और मां जगदंबा संसार में सृष्टि के बाद सुख शांति और समृद्धि प्रकट करना चाहते थे।

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ब्रह्मदेव को संसार में सुख समृद्धि लाने के लिए शिव जी की तपस्या करनी पड़ी। इसके लिए शिव जी ने आठ अवतार (Shiva Avatars) लिए । इन्हीं आठ रूपों से संसार में प्रसन्नता आंनद और जीवन है । इनके आठ रूप निचे लिख रही हूँ। मेरे प्रिय मित्रों ये जानकारी आपको और कहीं नहीं मिलेगी। ये दुर्लभ जानकारी मैं आपसे Share कर रही हूँ

शिव के आठ अवतार – Shiva Avatars

शर्व – शिव शर्व रूप होकर पृथ्वी का संपूर्ण भार अपने ऊपर लिए हुए हैं और संसार को प्रसन्नता प्रदान करते हैं।

भव– भव रुप होकर शिव जल में निवास करते हैं और सभी प्राणियों के कष्ट दूर करते हैं।

रूद्र– रूद्र रूप होकर शिव अग्नि में निवास करते हैं और अपने प्रकाश द्वारा लोगों को आनंद देते हैं।

उग्र – उग्र रूप होकर शिव वायु में निवास करते हैं जिससे सभी प्राणी जीवन पाते हैं।

भीम– भीम रूप होकर शिव आकाश में निवास करते हैं और पूरे जगत को अपने में समेट लेते हैं।

पशुपति -पशुपति रूप में शिव क्षेत्रज्ञ है जिससे सब लोगों को सुख प्राप्त होता है।

ईशान – इस रूप में शिव सूर्य में स्थित होते हैं जिससे पृथ्वी तथा का संपूर्ण सृष्टि प्रकाशमान और शीतल हो जाता है।

महादेव – महादेव रूप में होकर शिव अपना स्थान चंद्रमा में बनाते हैं और सारे जीव-जंतुओं का पालन करते हैं और सभी को शीतलता आनंद और सुख समृद्धि प्रदान करते हैं।

जब समुद्र मंथन में देवताओं की जीत हुई तो देवताओं में अहंकार की भावना जागृत हो गई। वे सभी शिव को भूल गए। तब शिव अपना वेश बदलकर देवताओं को शिक्षा देने के लिए प्रकट हुए । उन्होंने एक तिनका उठाया और सभी से कहा अगर वास्तव में तुम लोगों में शक्ति है तो इस तिनके को दो टुकड़ों में बांट दो। पहले तो सभी देवता ठठाकर हंसने लगे।उनका मजाक बनाया । फिर एक एक करके सब ने उस तिनके को तोड़ने की कोशिश की मगर कोई भी देवता इसे तोड़ ना सके। शिव अपने सच्चे रूप में प्रकट होकर कहने लगे तुम लोगों में अहंकार की भावना आ गई है। अगर देवतागण ही ऐसा करेंगे तो मनुष्यगण क्या सीखेंगे। इस अहंकार को तोड़ने के लिए ही शिव ने भवानी के साथ 10 अवतार लिए ताकि संसार को संतुलित रूप से चलाया जा सके । शिव जी के दस अवतार

1 – महाकाल -शिव जी का पहला रूप महाकाल का है और महाकाली रूप में मां भवानी है ।

2 – तार – शिव का दूसरा अवतार तार रूप में है जिसकी शक्ति तारा हैं ।

3 – बलि – शिवजी का तीसरा रूप बली है मां भवानी इनके साथ में भुनेश्वरी के रूप में है।

4 – विघ्नेश – शिव का चौथा रूप विघ्नेश है जिसकी शक्ति विद्या है।

5 – भैरव – शिव का पांचवा रूप भैरव है जिनकी शक्ति भैरवी है।

6 – छिन्नमस्तक – शिव का छठा रूप छिन्नमस्तक है जिनकी शक्ति छिन्नमस्तिका देवी है जो अत्यंत ही तेजस्वनी है।

7 – धूमवत – सातवां रूप शिव का धूमावत है इनकी शक्ति धूमावती के रूप में है।

8 – बगलामुख – आठवां रूप शिव का बगलामुखी अवतार है जिनकी शक्ति बगलामुखी है ।

9 – मातंग -शिव का नौवां अवतार मतंग अवतार है जिनकी शक्ति मातंगी कहलाती हैं ।

10 – कमला -शिव का दसवां रूप कमल अवतार है जिनकी सती कमला कहलाती है। इस तरह शिव अपने 10 अवतारों के पूजन और दसों शक्तियों की सेवा श्रद्धा से संसार में सुख समृद्धि लाते हैं।

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