Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi – अटल बिहारी बाजपेयी की जीवनी

Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi – अटल बिहारी बाजपेयी की जीवनी

मौत खड़ी थी सर पर
इसी इंतजार में थी
न झुकेगा ध्वज मेरा
15 अगस्त के मौके पर
तू ठहर इंतजार कर
लहराने दे बुलंद इसे
मैं एक दिन और लडूंगा मौत तेरे से

ठन गई मौत से ठन गई
अटल जी की शक्ति
उनके अंतिम दिन में भी
अपना रंग जमा गई उन्होने
जो अपनी भावना व्यक्त की थी
वह सच्चाई में बदल गई

ऐसे युग पुरुष को मेरा कोटि -कोटि नमन है। उन्हें अपना हृदय से श्रद्धांजलि अर्पित करती हूँ । संपूर्ण भारत के लिए आज का दिन बड़ा ही दुखद है | लंबे समय से वे बीमारी से जूझ रहे थे। 9 वर्षों से मृत्यु को हरा रहे थे; लेकिन 16 . 8 .18 को अटल बिहारी जी (Atal Bihari Vajpayee) दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल में शाम को 5:0 5 मिंट में उन्होंने अंतिम सांस ली। भारत के अनमोल रत्न हम सबों से बिछड़ गए। संपूर्ण देश में सन्नाटा पसर गया । ऐसे महान व्यक्ति को मन से कभी भी विदाई नहीं दी जा सकती। ये तो जन- जन के हृदय में बसते हैं।

Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi

अटल जी अजातशत्रु है। भारत के जननायक हैं। इन्हें महामानव की उपाधि देना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। ऐसे महान मानव जो धर्म, जाति ,राजनीति इन सभी से ऊपर उठ चुके थे। जिन शब्दों का अपने वाक्य में प्रयोग करते थे उसे निजी जीवन में उतारते थे ।उनका कहना था “विचारों का मतभेद हो लेकिन मन का भेद न हो।”

नाम- अटल बिहारी बाजपेयी – Atal Bihari Bajpayee
जन्म – 25 दिसंबर 1994
जन्म स्थान – ग्वालियर
पिता – श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी ( स्कूल अध्यापक और कवि)
माता -श्रीमती कृष्णा देवी
उम्र – 93
मृत्यु – 16अगस्त 2018 (5 .05 pm दिल्ली)

 

प्रारंभिक जीवन– जननायक श्री अटल जी का जन्म 25 दिसंबर 1924 में ग्वालियर के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वे सात भाई बहन थे। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी स्कूल अध्यापक और कवि थे। वाजपेयी जी को कवि हृदय अपने पिता से विरासत में मिला था ।उनकी माता श्रीमती कृष्णा देवी दयालु थी। इन दोनों पति-पत्नी ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि उनकी ये संतान अपने देश के प्रधानमंत्री पद पर सुशोभित होगी और अपने परिवार और देश का नाम रोशन करेगी।

अटल जी एक अच्छे राजनेता, पत्रकार, कवि और प्रखर प्रवक्ता थे। उनके बारे में कुछ भी कहना सूरज को दीपक दिखाने के बराबर है। इनके व्यक्तित्व को शब्दों में बांधना कत्तई संभव नहीं है । उन्हें महसूस किया जा सकता है उनकी महानता और उनके विचारों का अनुकरण किया जा सकता है।

शिक्षा- बाजपेई जी की प्रारंभिक शिक्षा ग्वालियर के सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय में हुई। इसके बाद ग्वालियर के लक्ष्मीबाई कॉलेज से स्नातक किया और कानपुर के डीएवी कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में m.a. की उपाधि ली। उन्होंने कानून की पढ़ाई भी की थी पर उस में मन ना लगने के कारण छोड़ दिया था।

RSS के कार्यकर्ता – श्री वाजपेयी अपने प्रारंभिक जीवन में RSS के सदस्य बन गए थे। उन्होंने आर्य कुमार सभा में सक्रिय भूमिका निभाई थी । ये भारत माता के सच्चे सपूत थे । उन्होंने 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया और इसके तहत उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।

इसके बाद वे भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के संपर्क में आए और अपनी कुशाग्रता और प्रतिभा से राजनीतिक सचिव बन गए ।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता रहते हुए राष्ट्र धर्म पांचजन्य चेतना ,दैनिक स्वदेश , वीर अर्जुन पत्र पत्रिकाओं के संपादक रह चुके थे। अटल बिहारी वाजपेयी संपादक के रूप में जाने जाते थे।वे बहु प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे।

राजनीति की ओर बढ़ते कदम – अपने मार्गदर्शक डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संदेश संपूर्ण देश में अटल बिहारी वाजपेयी ने फैलाया और अपने कृत्यों से उन्होंने भारत की राजनीतिक पटल पर एक अमीट छाप छोड़ा। अटल जी ने 1995 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन इसमें उनको सफलता नहीं मिली। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इन की लोकप्रियता धीरे-धीरे बढ़ने लगी जिसका परिणाम यह हुआ कि ये नौ बार लोकसभा के और दो बार राज्यसभा के सदस्य निर्वाचित हुए।

भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में अटल जी का बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है। कवि हृदय होते हुए भी बेवाक बोलने का कौशल, शब्दों का सही प्रयोग और अपनी चुटीली भाषा का इस्तेमाल करने में इन्हें महारथ हासिल था।बिना किसीको दुःख पहुंचाए अपनी बात वुयक्त कर देना इनके व्यक्तित्व में थी ।

विपक्ष पार्टी के रूप में – प्रधानमंत्री बनने से पूर्व अटल जी ने 40 वर्षों तक विपक्ष के नेता के रूप में अपनी जैसी धाक जमाई और जैसा पहचान बनाया वह बेमिशाल है। एक बार स्वयं पंडित नेहरू ने उनकी वाकपटुता से प्रभावित होकर कहा था कि-” यह नौजवान एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनेगा।” उनका यह कहना शत प्रतिशत सही हुआ। पी वी नरसिंहराव इनको अपना गुरु मानते थे। अटल जी की शख्सियत का कोई जवाब नहीं। भारत को अटल जी के रूप में एक ऐसा प्रधानमंत्री बना मिला जिसने भारत को एक नई ऊर्जा और नई दिशा दी।

प्रधानमंत्री के रुप में -1996 में पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री के रूप में आए लेकिन समर्थन के अभाव में केवल 13 दिन ही इनकी सरकार रही । दूसरी बार 1998 में इनकी सरकार 13 महीने ही चल सकी। तीसरी बार 1999 कमल खिला और अटल जी प्रधानमंत्री बने। तब उन्होंने पूरे 5 साल सफलतापूर्वक अपनी सरकार चलाई। भारतीय राजनीति में यह उपलब्धि दर्ज कराने वाले यह पहले गैर कांग्रेसी नेता थे।

दिल्ली- लाहौर बस सेवा का शुभारंभ – अटल जी का इरादा समुद्र की तरह गहरा और अंबर की तरह ऊंचा था । अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ रिश्तो को नए सिरे से प्रारंभ करने के लिए इन्होंने अपने दिलहरी दिखाई। फरवरी 1999 में एक अद्भुत पहल प्रदर्शित किया। उन्होंने दिल्ली- लाहौर बस सेवा का शुभारंभ किया और स्वयं ही उस बस में बैठकर लाहौर गए। इस पहल को लेकर अटल जी की आलोचना भी हुई थी किंतु आज विरोधी और आलोचक भी इस दूरगामी पहल की प्रशंसा करते हैं।

कारगिल युद्ध – अपना पड़ोसी, पाकिस्तान का धोखा देने में तो कोई जवाब ही नहीं है । कहा जाता है कि सांप का स्वभाव काटना है तो चाहे उसे दूध ही हम क्यों ना पिलाए, फिर भी वह हमें काटेगा ही । वहीं पाकिस्तान ने किया। लाहौर बस सेवा बाजपेयी जी ने 1999 में शुरू किया था और कुछ महीने बाद ही कारगिल युद्ध का बिगुल बजा दिया। अटल जी ने युद्ध की स्थिति को अच्छी तरह संभाला। ऑपरेशन विजय के अंतर्गत हमारे वीर जवानों ने उन्हेंपरास्त कर दिया। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय देशों में यह संदेश गया कि भारत का नेतृत्व एक कुशल और अनुभवी नेता के हाथ में है। वह अपने दुश्मनों को मुंहतोड़ उत्तर देने में सक्षम है।

भारत को परमाणु संपन्न बनाना – अटल बिहारी बाजपेयी बिना किसी के दबाव में आए हुए उन्होंने अपने देश को परमाणु शक्ति संपन्न बनाने में अहम भूमिका निभाई। मई 1998 में पोखरण ii का सफलतापूर्वक परीक्षण हुआ। अमेरिका तथा पाश्चात्य देश कोई भी नहीं चाहते थे कि भारत एक परमाणु संपन्न देश बने; पर अटल जी किसी के दबाव में नहीं आए। उन्होंने निर्णय लिया और उसे सफलतापूर्वक पूर्ण किया।

स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना – उन्होंने ग्रामीण सड़क योजना, स्वर्णिम चतुर्भुज योजना, सर्व शिक्षा अभियान, नदी जोड़ो परियोजना जैसी जन कल्याणकारी योजनाओं का आरंभ किया। निर्विवाद रुप से वर्ष 2000 में 3 नए राज्य -उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और झारखंड के गठन का श्रेय श्री अटल जी को जाता है।

व्यक्तित्व की खासियत – अटल जी 4 भाषाओं के पारंगत ज्ञाता थे। उन्हें हिंदी, मराठी, संस्कृत और अंग्रेजी पर पूरी पकड़ थी । ये अजातशत्रु है। इनके जीवन के विभिन्न आयाम थे जो सभी प्रशंसनीय है। अटल जी एक अच्छे लेखक ,भारत रत्न और इन सबसे ऊपर एक सर्वश्रेष्ठ इंसान थे, जो देवतुल्य थे। सच्चे देशभक्त थे । शब्द को नाप तोल कर बोलना और सार्थक बोलना उनके व्यक्तित्व की खासियत रही ।

इनकी मुख्य कृतियां – मेरी इक्यावन कविताएं, मृत्यु या हत्या, अमर बलिदान, कैदी कविराय की कुंडलियां, न्यू डायमेंशन ऑफ इंडियन फॉरेन पॉलिसी, फोर डिकेट्स इन पार्लियामेंट इत्यादि इनकी मुख्य कृतियां हैं। इन्हें हिंदी भाषा से बेहद लगाव था। यह देश के ऐसे पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने UNO में पहली बार हिंदी में भाषण दिया।

पुरस्कार और सम्मान- डॉ मनमोहन सिंह ने इन्हें भारतीय राजनीति का भीष्म पितामह कह कर संबोधित किया था।

वर्ष 1992 में पद्मभूषण

वर्ष 1994 में लोकमान्य तिलक पुरस्कार

वर्ष 1994 में सर्वश्रेष्ठ सांसद पुरस्कार

वर्ष 1994 में पंडित गोविंद बल्लभ पंत पुरस्कार

1994 सहित 2014 में भारत रत्न सम्मान से इन्हें नवाजा गया ।

अटल बिहारी बाजपेई ने 2005 में राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दी थी। ऐसे योगी तथा संत पुरुष को मेरा कोटिशः नमन है !!!

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