Akbar Birbal Story in Hindi – Birbal ki Khichdi – बीरबल की खिचड़ी

Akbar Birbal Story in Hindi – Birbal ki Khichdi – बीरबल की खिचड़ी

बीरबल की खिचड़ी (Birbal ki Khichdi) – एक बार अकबर अपने दरबार में नवरत्नों के साथ बैठे थे। सभी किसी विशेष विषय पर विचार विमर्श कर रहे थे। सर्दी का मौसम था। तभी अचानक अकबर का ध्यान अपने महल के बाहर झील पर पड़ा। पानी ऐसा लग रहा था मानो जम गया हो। बाहर दांत किटकिटाने वाली ठंड हो रही थी ।अकबर के मन में आया कि अपने नगर के लोगों के धैर्य की परीक्षा ली जाए। उस ने बीरबल से कहा कि कल नगर में घोषणा करवा दो कि इस झील में जो भी व्यक्ति पूरी रात खड़ा होगा उसको अगली सुबह 10000 सोने की अशर्फियां दी जाएंगी। बीरबल ने आज्ञानुसार वैसा ही किया। इतनी ठंड में कोई भी शर्त मानने को तैयार नहीं हुआ ।

एक परिवार था। उसमें एक बहुत ही वृद्ध व्यक्ति थे, जो अपनी तीन पोतियों के साथ रहते थे। बड़ी वाली की शादी करनी थी पर पैसों के अभाव में भी नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने सोचा मेरा क्या है? आज मरुँ या कल मरुँ । इतना बुड्ढा हो चुका हूं कि मेरी जिंदगी और कितनी बची है? मैं यह शर्त स्वीकार कर लेता हूं। अगर बच गया तो अशर्फियाँ मिल जाएंगी जिससे मैं अपनी पोती का ब्याह कर पाऊंगा। मर गया तो कोई बात नहीं। ऐसा सोचकर वह बीरबल के पास गया और बोला मुझे यह शर्त मंजूर है कल से मैं पानी में पूरी रात खड़ा रहूंगा। बीरबल ने कहा ठीक है बाबा।

वृद्ध व्यक्ति इस कटकटाती हुई ठंड में पूरी रात झील में खड़ा रहा। ईश्वर की कृपा से जिंदा भी था। सुबह-सुबह उसे अकबर के आदमी महल में ले गए ।कहने लगे महाराज यह पूरी रात झील में खड़ा रहा। अकबर को उस वृद्ध पर बड़ा आशचर्य हुआ । उसने ने पूछा अच्छा आप यह बताओ कि पूरी रात आप इस बर्फ जैसे पानी में कैसे खड़े रहें। आपको किस चीज से प्रेरणा मिली ।

वृद्ध बोला, महाराज प्रेरणा वाली बात तो मुझे पता नहीं, पर आपके महल के गुंबद पर लगी छोटी सी बल्ब देख कर मैं पूरी रात खड़ा रहा । टकटकी बांधकर देखता रहा और इस तरह से मेरी पूरी रात कट गई। कुछ लोग कहने लगे महाराज यह तो धोखा हुआ। उस बल्ब की रोशनी से जो गर्मी निकल रही थी ,उसके ताप के कारण यह बूढ़ा खड़ा रहा। अकबर ने कहा हां यह बात तो सही है। तुम्हें यह इनाम नहीं दिया जा सकता है। यह तो धोखा है। दरबार में बीरबल भी बैठा था । वृद्ध व्यक्ति बहुत मायूस हो गया । बीरबल को भी बहु बुरा लगा । पर वह उस समय कुछ न बोला।चुपचाप दरबार से निकल गया ।

उस वृद्ध से बोला मैं आपका ये हक दिलवाकर ही रहूंगा । भले ही थोड़ा समय लग जाए । अगले दिन से बीरबल दरबार जाना बंद कर दिया।

करीब 1 सप्ताह हो गया तो अकबर को चिंता होने लगी ।अपने कुछ आदमियों को बीरबल के पास उन्होंने भेजा कि देखकर आओ कि आखिर बीरबल का दरबार में ना आने का क्या कारण हो सकता है। सभी लोग बीरबल के पास पहुंचे। देखा बहुत ऊंचे पेड़ पर एक छोटी- सी हंडी लटक रही है और नीचे भूमि पर बीरबल ने थोड़ा सा आग जला रखा है। उन लोगों ने पूछा, बीरबल आप यह क्या कर रहे हैं? आप दरबार क्यों नहीं आ रहे हैं ? बीरबल ने कहा, मैं खिचड़ी बना रहा हूं। यह पक जाएगी तभी मैं दरबार में आऊंगा। आप सभी अकबर को जाकर बोल दें।

सभी लोग आश्चर्य चकित हो रहे थे । यह कैसी खिचड़ी बीरबल बना रहा है? 15 से 20 फीट ऊंचा पेड़ पर एक हंडी लटका रखी है और नीचे भूमि पर बिल्कुल थोड़ा सा आग रख रखा है। यह तो एक युग में भी खिचड़ी ना पकने वाली है। आपस में इसी तरह बात करते हुए अकबर के पास सभी लोग पहुंच गए और बीरबल की पूरी कहानी बताई। अकबर ने सोचा अचानक बीरबल ऐसी हरकत क्यों करने लगा ?जरूर कोई बात है।

अगले दिन अकबर अपने अन्य मंत्रियों के साथ बीरबल के पास पहुंचा ।अकबर देखकर हैरत में था। उसने बीरबल से कहा तुम्हारे खिचड़ी के पीछे जरूर कोई राज है। कल तुम दरबार में आओ फिर बात करते हैं ।अगले दिन दरबार में बीरबल पहुंचा। अकबर के पूछे जाने पर उसने कहा महाराज जब आपके महल से 15 फीट की ऊंचाई पर लगा बल्ब उस वृद्ध को गर्मी दे सकता है तो मेरी यह खिचड़ी क्यों नहीं सकती। अकबर को सारी बात समझ में आ गई। उस वृद्ध को सम्मान के साथ राजदरबार में बुलाया गया। उसे 10000 सोने की अशर्फियाँ दी गई। अपना नाम पर अत्यधिक खुश था बीरबल को उसने बहुत-बहुत धन्यवाद दिया|

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