Akbar Birbal ki Kahani – आदमी एक और चार काम

Akbar Birbal ki Kahani – आदमी एक और चार काम

बीरबल की चतुराई, हाजिरजवाबी,सूझबूझ और बुद्धि से अकबर जहां प्रसन्न रहते थे, वहीं उनके दरबार के अन्य मंत्रीगण बीरबल से काफी ईर्ष्या करते थे। वे लोग हमेशा बीरबल को बादशाह के सामने नीचा दिखाने की कोशिश करते थे ।उन्हें ऐसा लगता था कि अकबर ने बीरबल को बिना मतलब ही ऊंचा पद और निजी सलाहकार बना दिया है। वे लोग इस मौके की तलाश में रहते थे की कब ऐसा मौका मिले और बीरबल की शिकायत लगाई जाए।

एक बार बीरबल की गैरहाजिरी में बादशाह अकबर के कान भरने वाले लोगों ने कहा- जहांपनाह आज तक हमें यह बात समझ में नहीं आई कि हम सबों में क्या कमी है ? बीरबल को इतना महत्व क्यों दिया जाता है ? क्या वह हम सबों से ज्यादा बुद्धिमान और विद्वान है ?

बादशाह अकबर ने कहा -“तुमलोगो में और बीरबल में बहुत फर्क है। ” उनलोगों ने कहा -हुज़ूर हमसब जानने की इच्छा रखते हैं ।
बादशाह ने कहा -“आपको फर्क दिखाया जाएगा । समय का इंतजार करें ।” बादशाह ने कहा अभी तुरंत बीरबल को सूचना दिया जाए कि वह सात दिनों के लिए छुट्टी पर चला जाए ।वह सात दिनों तक दरबार में न आए ।

फिर उन्होंने कहा -“तुमलोगों में से जो सबसे चतुर या बुद्धिमान हो वह बीरबल कि जगह पर काम करें । उनकी कुर्सी पर विराजमान हो जाओ । एक हफ्ते में हम फर्क का एहसास करादेंगे।

ऐसा ही किया गया । उनलोगों में जो सबसे चतुर था उसे बिबल के स्थान पर नियुक्त किया गया । बीरबल कि हफ्ते भर कि छुट्टी कर दी गई । बादशाह उनलोगों की परीक्षा लेने के लिए उचित अवसर की तलाश कर रहे थे । करीब छह -सात दिन ख़त्म होने को आए । इसी बिच बादशाह ने उनके चुने हुए बुद्धिमान व्यक्ति को बुलाया । उन्होंने कहा ,हमारे महल के पीछे वाले हिस्से में कुत्ते के बच्चे जैसी आवाज आती है । देखकर आ जाओ माजरा क्या है ?

बहुत अच्छा हुज़ूर ! वह कहकर चला गया । थोड़ी देर बाद वह लौटा ।

बादशाह ने पूछा -“क्या माजरा है ?”

कुतिया ने बच्चे दिए हैं हुज़ूर ! वे ही कूं…कूं करते रहते हैं । व्यक्ति ने कहा ।

कितने बच्चे हैं ? बादशाह ने पूछा ।

हुज़ूर ! मैंने तो गिने नहीं ।

जाओ गिन कर आओ ।

वह व्यक्ति आज्ञा पाकर दोबारा गया ।थोड़ी देर बाद लौटा । आते ही बोला जहाँपनाह ! उसने पांच बच्चे दिए हैं हुज़ूर ! मैं खुद गिनकर आया हूँ ।

अकबर ने कहा -गिन आए । हाँ हुज़ूर !

तो तुमने यह भी देखा होगा कि उनमें कितने नर हैं और कितने मादा ? बादशाह ने मुस्कुराकर कहा

वह चकरा गया ,बोला-हुज़ूर ये तो देखा ही नहीं ।

देखकर आओ -बादशाह ने कहा ।

व्यक्ति तीसरी बार गया और यह देखकर आया कि कितने नर हैं और कितने मादा ?
हुज़ूर दो नर हैं और तीन मादा हैं ।

अच्छा ! ये बताओ -जो नर हैं उनके रंग क्या हैं ?

वह व्यक्ति फिर चकरा गया ,कहा हुज़ूर माफ़ी चाहता हूँ मुझे ठीक- ठीक याद नहीं है ।मैं एक बार फिर देख कर आता हूँ । वह व्यक्ति चौथी बार गया । आकर बताया ,हुज़ूर नर में एक का रंग कला- सफ़ेद है और एक बादामी रंग का है । मादा में दो काली और एक बादामी है ।
बादशाह ने कहा – “बैठ जाइए ।”वह बैठ गया ।

बादशाह ने आदेश दिया कि बीरबल को बुलाया जाए । बीरबल ने आते ही कहा, हुज़ूर ! अभी तो एक दिन बाकी है मैं परसो अपनेआप ही आ जाता। कोई ज़रूरी काम है, बादशाह ने कहा । सेवा बताइए हुज़ूर !

बीरबल , हमारे महल के पीछे वाले हिस्से से बड़ी अजीब सी आवाज़ आती है । कभी कुतिया कि भौंकने की, कभी उसके बच्चे की कूं कूं की ,कभी गुर्राने की । देख कर आओ, माजरा क्या है ? जरा जल्दी लौटना ।

ठीक है हुज़ूर ! कहकर बिरबल चले गए ।बीरबल जब लौटे तो अकबर ने प्रश्न किया क्या माजरा है ? बीरबल ने कहा हुज़ूर ! कुतिया ने पांच बच्चे दिए हैं ,वे ही कूं कूं करते हैं ।

जब अपनी माँ की बात नहीं सुनते तब वह गुर्राती और भौंकती है ।वैसे और कोई खास बात नहीं है । बादशाह ने पूछा ,पांच बच्चे हैं तो उनमें नर और मादा कितने हैं ? बीरबल ने कहा, दो नर और तीन मादा हैं हुज़ूर ! आगे बादशाह ने पूछा ,उनका रंग कैसा है ? बीरबल ने तुरंत कहा हुज़ूर ! एक नर कला -सफ़ेद और दूसरा बादामी रंग का है । मादाएं दो काली हैं और एक बादामी है ।

बीरबल के उत्तर से बादशाह प्रसन्न हो गए । उन्हें अपने ऊपर गर्व महसूस हुआ कि उन्हें एक बुद्धिमान व्यक्ति मिला है , जो उनके साथ है । उन्होंने अपनी प्रसन्नता को छिपाते हुए उनलोगों से कहा ,अब आपलोग समझ गए होंगे कि आपलोगों में और बिरबल में क्या फर्क है ? क्यों श्रीमान जी ? सही कहा न हमने ।
जी , व्यक्ति का सर शर्म से झुक गया । जिस काम को वह चार बार में और ढाई घंटे में कर सका ,वही काम बीरबल ने आधे घंटे में एक बार में ही कर दिया ।

बीरबल ने जो मान-सम्मान पाया वह अपनी योग्यता के बल पर पाया ।

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