Akbar and Birbal Stories in Hindi – सब से बड़ी चीज गरज़

Akbar and Birbal Stories in Hindi – सब से बड़ी चीज गरज़

अकबर बादशाह मजाकिया स्वभाव के थे। उन्हें जोक सुनना और सुनाना दोनों ही पसंद था । विनोदी स्वभाव होने के कारण पहेलियां, कविता , शायरी इत्यादि से उन्हें बेहद लगाव था। इन चीजों में अकबर को बीरबल का साथ खूब मिलता था। अकबर की हर पहेली का जवाब बीरबल के पास होता था। बीरबल की हाज़िरजवाबी अकबर को बहुत भाता था।

एक दिन की बात है बीरबल दरबार में अनुपस्थित थे । उनके दुश्मनों या यूं कहें कि उनके दिलजलों को बादशाह के कान भरने का शुभ अवसर मिल गया था। वे लोग बीरबल की तरह- तरह से बुराइयां कर रहे थे। बीरबल के खिलाफ सुनते-सुनते अकबर के कान पक गए थे। उन्होंने कहा- तुम लोग बीरबल की ख्वामखाह बुराइयां कर रहे हो।

सच्चाई यह थी कि अकबर बीरबल को बहुत चाहते थे। उन्हें दिल से प्यार करते थे और उनकी बुद्धिमानी की कदर करते थे ।उन्होंने उन लोगों से कहा- वास्तव में बीरबल तुम लोगों से कहीं अधिक चतुर और बुद्धिमान है ।वह विद्वान भी है ।

अकबर ने लोगों के मुंह पर ही ऐसा कह दिया ,तो वे लोग कहने लगे बादशाह सलामत आप बीरबल को बहुत तवज्जो देते हैं ।उन्हें हम लोगों से ज्यादा प्यार करते हैं। यह बिल्कुल हमें गवारा नहीं है।

एक दिन की बात है कि जब सभा समाप्त होने का वक्त आया तो अकबर बादशाह ने उन चार व्यक्तियों को अपने निकट बुलाया, जो बीरबल के बारे में बहुत अधिक बोल रहे थे। कहा- “देखो आज बीरबल तो यहां उपस्थित नहीं है। मुझे एक सवाल का जवाब चाहिए। तुम चारों मेरे प्रश्नों का उत्तर दो। यदि तुम चारों ने मेरे प्रश्नों का उत्तर सही-सही नहीं दिया तो तुम चारों को फांसी की सजा मिलेगी।”

बादशाह की यह बात सुनकर चारों ही घबरा उठे। उनमें से एक ने हिम्मत दिखाई और कहा- “प्रश्न पूछा जाए हुज़ूर !”
बादशाह ने पूछा -“संसार में सबसे बड़ी चीज़ क्या है ?”
अकबर का प्रश्न सुनकर चारों चुप हो गए । उनलोगों को इस प्रश्न का उत्तर समझ में नहीं आया । कुछ देर के बाद एक ने कहा -“सरकार खुदा की खुदाई सबसे बड़ी है ।”
दुसरे ने कहा -“बादशाह सलामत की सल्तनत सबसे बड़ी है ।”
उनके बेतुके उत्तर सुनकर बादशाह ने कहा -“अच्छी तरह सोच -समझ कर उत्तर दो वार्ना मैं कह चूका हूँ कि तुमलोगों को फांसी पर चढ़ा दूंगा ।तीसरे ने कहा- “हुज़ूर ! हमें कुछ दिनों कि मोहलत दी जाए । ”
बादशाह ने कहा -“मैं तुमलोगों को एक सप्ताह का समय देता हूँ ।”

वे चारों सभा से मुंह लटका कर बाहर निकल गए ।उनका चेहरा एकदम पीला पड़ गया था। चारों ही फांसी के नाम से डरे हुए थे। छह दिन बीत गए लेकिन उन्हें इस प्रश्न का उत्तर सही-सही नहीं मिल पाया। तब उन चारों ने आपस में विचार किया कि इस प्रश्न का उत्तर केवल बीरबल ही दे सकता है। वही हम सबों को इस मुसीबत से बचा सकता है।

चारों निश्चय करके बीरबल के पास पहुंचे और सारी घटना का वृतांत कह सुनाया। चारों ने बीरबल से अनुनय-विनय किया कि कृपा करके इस प्रश्न का उत्तर हमें बता दें और फांसी से हमें बचा लें ।

बीरबल उनका प्रश्न सुनकर मुस्कुराए और कहा- “मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर दे दूंगा, लेकिन मेरी एक शर्त है।”

वे बोले- आप एक शर्त की बात करते हैं हमें आपकी हजार शर्तें भी मंजूर है। बताइए क्या शर्त है ? बीरबल ने अपनी शर्त बताते हुए कहा- “तुम चारों मेरी चारपाई अपने कंधों पर रखकर महल तक चलो, उसके साथ ही तुम में से एक मेरा हुक्का पकड़ेगा जिसे मैं पीता हुआ चलूंगा और दूसरा मेरी जूतियां अपने हाथ में लेकर चलेगा।”

अगर किसी अन्य समय बीरबल उनको यह सब कहते तो वे ऐसा कदापि नहीं करते लेकिन अब जब उन्हें फांसी लगने का डर था तो वे फौरन उनकी बात मानने को तैयार हो गए । अब तो जान के लाले पड़े थे ।

चारों ने बीरबल समेत उनकी चारपाई अपने कंधे पर उठाए और उनका हुक्का और जूतियां उठाई और चल पड़े । बीरबल शान से हुक्का पीते हुए चले जा रहे थे। रास्ते में लोग आश्चर्य से इस नजारे को देख कर देख रहे थे। उन चारों ने बीरबल की चारपाई बीच दरबार में रख दिया।

बीरबल ने चारपाई से उतरकर कहा- “बादशाह सलामत आपको आपके प्रश्न का उत्तर मिल गया होगा।”

संसार में सबसे बड़ी चीज गरज़ है । अकबर बादशाह जोर-जोर से हंसने लगे और बीरबल को गले से लगा लिया।

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