Ahilya Story in Hindi – श्रीराम के द्वारा गौतम पत्नी अहिल्या का उद्धार

Ahilya Story in Hindi

विश्वामित्र (Vishwamitra) मुनि के साथ श्री राम (Ram) और लक्ष्मण (Laxman) जब मिथिला पहुंचे तो वहां की प्राकृतिक शोभा देखकर अत्यंत प्रसन्न हुए । मिथिला राजा जनक की नगरी थी , यह नगर इतना रमणीक था मानो विश्वकर्मा जी ने अपने हाथों से बनाया हो।

राम लक्ष्मण ने दैत्य शुभाऊ और मारीच को मारकर ऋषि विश्वामित्र के अनुष्ठान को सफल बनाया । उसके बाद उन सब को पता चला की राजा जनक (Janak) के यहाँ एक बहुत बड़ा अनुष्ठान हो रहा है । इस के लिए ऋषि विश्वामित्र के पास भी निमंत्रण आया । राजा जनक के पास शिव(Shiv) जी का दिया हुआ धनुष था । राजा जनक अपनी पुत्री सीता (Sita) के लिए स्वयंवर रचा था । उनका कहना था की जो भी व्यक्ति इस धनुष को उठाकर इस पर प्रत्यंचा चढ़ा देगा वही हमारी बेटी का वर होगा । विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को लेकर मिथिला की और चल पड़े ।

Ahilya Story in Hindi

रास्तें में जातें हुए राम की दृष्टि एक सुनसान कुटिया पर पड़ी । राम ने पूछा गुरूजी ये कैसा स्थान है । बाहर से देखने में तो अत्यंत सुन्दर है लेकिन कुटिया में आतें जातें कोई ऋषि नहीं दिखाई देतें । इस आश्रम का क्या रहस्य है, कृपया हमें बताये ।

विश्वामित्र ने कहा पुत्र इस कुटिया की बड़ी दुखद कथा है । पूर्व समय में इस आश्रम में एक महान तेजस्वी ऋषि अपनी पति व्रत पत्नी अहिल्या (Ahilya) के साथ रहते थे । उनका नाम गौतम (Gautam) था । गौतम ऋषि भगवान् शिव के बहुत बड़े उपासक थे और कठिन तप कर रहे थे। इंद्र ने जब देखा की गौतम के तप से चारों और उनका तेज फैल रहा है तो वह डर गए । वह सोचने लगे गौतम देवताओं से स्वर्ग छीनकर खुद उसका लाभ उठाएंगे ।

एक बार जब गौतम ऋषि गंगा के तट पर तपस्या करने चले गए तो इंद्र उनके घर पीछे से आएं और गौतम ऋषि के रूप धारण करके अहिल्या (Ahilya) के सतीत्व को नष्ट कर दिया । संयोग के बात है की इंद्र धड़ फड़ करके जैसे ही निकल रहे थे , गौतम मुनि उसी समय वापस आ रहे थे । उनकी अव्यवस्थित हालत देख कर गौतम मुनि सबकुछ समझ गए । उन्होंने इंद्र को भयंकर शाप दिया और पत्नी को शापित करके बोले की आज से मैं तुम्हारा परित्याग करता हूँ । तुम यहीं शिला बनकर रहोगी । जब श्री राम मिथिला आकर इस कुटिया में प्रवेश करेंगे और इस शिला को स्पर्श करेंगे तभी तुम्हे मुक्ति मिलेगी । ये कहकर वह हिमालय के शिखर पर तप करने चले गए।

विश्वामित्र ने कहा हे राम अब तुम इस पुण्य काम करके इस आश्रम और अहिल्या (Ahilya) का उद्धार करों । विश्वामित्र के साथ राम और लक्ष्मण आश्रम में प्रवेश किये और वहां जाकर उन्होंने देखा की शिला सूर्य के सामान चमक रहा है । इस शिला के नीचे माता आजतक तपस्या करती रही । इस अवस्था में इन्हे कोई न देवता देख सकता था न कोई दैत्य । गौतम मुनि के शाप के कारन अहिल्या का दर्शन होना तीनो लोको के प्राणियों के लिए असंभव था । श्री राम ने अपने पाव से शीला को जैसे ही स्पर्श किया, अहिल्या (Ahilya) अपने पूर्ववत रूप में आ गयी । वह अपने सभी पापों से मुक्त हो गयी। चारों और हर्षनाद होने लगे , दोनों भाइयों से उनके चरण स्पर्श करके वहां से विदा हो गए ।

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