51 Shakti Peeth list in Hindi – 51 शक्ति पीठ

51 Shakti Peeth list in Hindi – 51 शक्ति पीठ

सनातन हिंदू धर्म के अनुसार सती के मृतक शरीर के जहां-जहां अंग और उनके गहने इस पृथ्वी लोक पर गिरे वह अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी बन गया। ऐसे स्थान को ही शक्तिपीठ कहा गया है

यह बात उस समय की है जब प्रजापति दक्ष एक महान यज्ञ करने जा रहे थे। उन्होंने इस यज्ञ में आने का निमंत्रण सभी देवी- देवताओं, ऋषि-मुनियों को दिया पर अपने दामाद शिव को नहीं दिया क्योंकि वे उनसे रुष्ट थे। प्रजापति दक्ष जानबूझकर शिव की उपेक्षा करना चाहते थे । सती इस बात को नहीं समझ पाई और शिव के लाख मना करने पर भी वह अपने मायके चली गई ।

उन्होंने देखा कि परिवार के सभी लोग उसकी उपेक्षा कर रहे हैं, केवल उनकी माता ही उन्हें देखकर प्रसन्न हुई। सती ने जब अपने पिता से शिव को निमंत्रण न देने की बात पूछी तो प्रजापति दक्ष उन्हें अनाप-शनाप शिव के बारे में बोलने लगे। माता सती अपने पति का अनादर बर्दाश्त नहीं कर पाईं और यज्ञ कुंड में अपने आप को समाहित कर लिया। शिव जी को जब अपनी पत्नी की मृत्यु के बारे में पता चला तो वह अत्यंत व्यथित और क्रोधित हो गए। उन्होंने संसार को प्रलय करने के लिए ठान लिया। सती को अपनी भुजाओं में उठाकर तांडव नृत्य करने लगे। सारे संसार में हाहाकार मच गया| पृथ्वी पर कहीं से आग की लपटें निकल रही थी तो कहीं पृथ्वी जल मय हो गई थी। कहीं पहाड़ की चट्टानें पृथ्वी पर टूट – टूट कर गिर रहे थे| ऐसी भयंकर स्थिति देखकर विष्णु ने अपना सुदर्शन चक्र चला दिया। इससे सती के अंग विखंडित होकर पृथ्वी के अनेक हिस्सों में गिरे । जहां -जहां सती के अंग और गहने गिरे सभी स्थान शक्ति पीठ कहलाए ।कहते हैं मानव अपने जीवन काल में पांच शक्ति पीठ का भी दर्शन कर ले तो उसका और उसके परिवार का कल्याण निश्चित होता है ।
मित्रों मैं इन 51 शक्तिपीठों की जानकारी आपको विस्तार से दे रही हूं जिसे पढ़कर आपका ह्रदय प्रसन्नता से भर उठेगा।

1 – नैना देवी – यह शक्तिपीठ (Shakti Peeth) हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर नामक गांव में स्थित है। कहा जाता है कि यह पीठ मां के 51 पीठों में से एक महत्वपूर्ण पीठ है। कहा जाता है की यहां पर मां के नेत्र गिरे हैं। इन्हें महिषमर्दिनी या नैना देवी के नाम से जाना जाता है। और भैरव नाथ क्रोधीश के रूप में इनकी रक्षा करते हैं।

2 – ज्वाला देवी – यह शक्तिपीठ (Shakti Peeth) भी हिमाचल प्रदेश में है जो कांगड़ा नामक गांव में स्थित है। यहां पर मां की जिह्वा गिरी था । मां यहां पर अंबिका के रूप में विराजमान हैं और अपने भक्तों का कष्ट हरण करती हैं। भैरव यहां पर उन्मत्त भैरव कहलाते हैं जो दसों पहर शक्तिपीठ की रक्षा करते हैं।

3 -सुगंधा शक्तिपीठ – यह मंदिर बांग्लादेश में शुक्कर स्टेशन के निकट शीकार पुर गांव में है। यह पवित्र मंदिर सोंध नदी के तट पर स्थित है। कहा जाता है कि इस स्थान पर मां का नाक गिरा था ।सती माता यहां सुनंदा देवी से पूजी जाती हैं और भैरव यहां त्रयंबकम नाम से पूजे जाते हैं ।

4 -सुचिंद्रम शक्तिपीठ – यह शक्तिपीठ (Shakti Peeth) तमिलनाडु के कन्याकुमारी में स्थित है। यहां पर मां सती नारायणी के रूप में पूजी जाती है और भैरव यहां पर संघार रूप में अवस्थित है। माना जाता है कि यहां पर मां का ऊपरी दांत का हिस्सा गिरा था।

5 -हिंगलाज मंदिर- यह शक्तिपीठ पाकिस्तान से करीब 125 किलोमीटर उत्तर पूर्व में कराची में है। माता यहां हिंगलाज महारानी या कोटटरी माता के रूप में पूजी जाती हैं। इस स्थान पर मां का ब्रह्मरंध्र, सिरका ऊपरी हिस्सा भी कहते हैं, गिरा था। भैरव यहां भीम लोचन के रूप में पूजे जाते हैं।

6 -महामाया शक्तिपीठ- यह शक्तिपीठ बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। यह शक्तिपीठ पहलगांव कश्मीर में है। माता का यहां गला गिरा था। मां सती यहां महामाया के रूप में प्रतिष्ठित है और भैरवनाथ भीमलोचन कहलाते हैं।

7 -अंबाजी मंदिर – यह शक्तिपीठ गुजरात में है। मां का यहाँ पर हृदय गिरा था।इस जगह माता अंबाजी के रूप में और भैरव बटुक भैरव के नाम से पूजे जाते हैं। ये शक्तिपीठ की रक्षा चारों ओर से करते हैं।

8 -त्रिपुर मालिनी – ये शक्तिपीठ पंजाब के जालंधर नामक नगर में स्थित है ।यह छावनी स्टेशन के देवी तालाब के निकट बसा हुआ है। माता यहां पर त्रिपुरमालिनी के रूप में सुविख्यात हैं और भैरव भीषण के रूप में शक्तिपीठ की रक्षा करते हैं। कहा जाता है कि इस स्थान पर मां का बायाँ वक्ष गिरा था।

9 – मानसा शक्तिपीठ – यह बहुत ही पावरफुल पीठ माना जाता है। मानसरोवर के कैलाश पर्वत पर स्थित है मां सती यहां दाक्षायणी या मनसा माता के रूप में विराजमान होकर भक्तों का कल्याण करती हैं । इन्हें मोक्षदायनी कहा जाता है ।यहां पर मां का दायाँ हाथ गिरा था। भैरव नाथ यहाँ अमर के नाम से विख्यात हैं ।

10 – गुजयेश्वरी मंदिर –  यह पीठ नेपाल में स्थित है। नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर के निकट यह शक्तिपीठ है। कहा जाता है कि यहां पर माता के दोनों घुटने गिरे थे। मां यहां महाशिरा के रूप में और भैरव कपाली के रूप में विराजमान है।

11 -विरजा मंदिर शक्तिपीठ – यह मंदिर उड़ीसा के उत्कल गांव में है। यह स्थान हिंदुओं के लिए बड़ा ही पवित्र स्थान माना जाता है। यह भुवनेश्वर से करीब 125 किलोमीटर उत्तर दिशा की ओर है। इस स्थान पर मां का नाभि गिरा था। माता सती यहां विमला के रूप में पूजी जाती हैं और भैरव जगन्नाथ के रूप में पूजनीय है। यह पीठ महाशक्ति पीठ कहलाता है।

12 -कामाख्या मंदिर – इसे कामगिरी भी कहते हैं। यह शक्तिपीठ जो लाखों करोड़ों लोगों का संताप हरणी स्थल है| वह असम गुवाहाटी के नीलांचल पर्वत पर स्थित है। यहां माता की पूजा कामाख्या देवी के रूप में होती है यहां पर इनकी योनि गिरा था। यहाँ भैरव उमानंद / भयानन्द के नाम से इस सकती पीठ की रक्षा करते हैं ।

13 -त्रिपुर सुंदरी मंदिर – यह भारत के उत्तर पूर्वी सीमा पर स्थित है। यह भारत का बहुत ही छोटा राज्य है। त्रिपुरा की राजधानी अगरतला है। यह शक्ति पीठ माताबढ़ी पर्वत पर स्थित है ।माना जाता है कि माता का दाया पैर यहाँ गिरा था ।माता यहां पर त्रिपुर सुंदरी के नाम से विख्यात है और भैरवनाथ त्रिपुरेश के नाम से पूजे जाते हैं।

14 – मंगल चंद्रिका मंदिर – यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिला में उज्जनी नामक एक छोटा सा गांव में स्थित है। यहां पर मां मंगल चंद्रिका के रूप में स्थित है और भैरव कपिलाम्बर के रूप में पूजे जाते हैं। इस स्थान पर माता सती का दाया कलाई गिरा था।

15 – मुक्तिनाथ मंदिर – यह मंदिर नेपाल के पोखरा नामक गांव में है। यह स्थान गंडकी नदी के तट पर है इसलिए यहां पर मां गंडकी चंडी के रूप में विख्यात हैं। और भैरवनाथ चक्रपानी के रूप में विराजमान हैं। इस स्थान पर मां का मस्त गिरा था।

16 -भ्रामरी देवी मंदिर -यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में एक गांव जिसका नाम सालबाढ़ि गांव है, वहीं पर यह शक्तिपीठ है। यहां पर मां जगदंबा भ्रामरी देवी के रूप में विराजमान हैं और भैरव अंबर के रूप में सुविख्यात है। यहां पर माता का बायां पैर गिरा था।

17 -बहुला माता मंदिर -यह मंदिर पश्चिम बंगाल वर्धमान जिले के केतुग्राम नामक गांव में है। यहां पर मां का बाया हाथ गिरा था। मां यहां देवी बाहुला के नाम से विख्यात है और भैरवनाथ भीरूक के नाम से पूजे जाते हैं।

18 – भवानी शक्तिपीठ- यह मंदिर बांग्लादेश में है। यहां का छत्राल गांव में यह शक्तिपीठ है जो चंद्र पर्वत शिखर पर स्थित है ।इसलिए माता को चंद्रानी भी कहा जाता है। यहां पर माता भवानी के रूप में और भैरव चंद्रशेखर के रूप में प्रतिष्ठित हैं। कहा जाता है कि मां का यहां दाया भुजा गिरा था।

19 -कालीपीठ- इस शक्तिपीठ का अत्यधिक महत्व है। यह पश्चिम बंगाल कोलकाता में काली घाट पर स्थित है। यहां पर मां का दाया पैर का अंगूठा गिरा था। यहां माता कालिका के रूप में अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं और भैरव नकुलीश के रूप में विराजमान हैं।

20 -जुगाडया शक्तिपीठ – यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिला के खीरग्राम में स्थित है। यहां पर मां का बाएं पैर का अंगूठा गिरा है। माता यहां जुगाडया देवी के नाम से विख्यात है और भैरवनाथ क्षीरखंडक के नाम से विराजमान होकर इस शक्तिपीठ की रक्षा करते हैं।

21 -ललिता शक्तिपीठ – ये मंदिर उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद प्रयाग में है। माता यहां ललिता भवानी के नाम से सुविख्यात हैं और भैरवनाथ भव के नाम से पूजे जाते हैं। माना जाता है कि इस स्थल पर मां के हाथ की अंगुलियां गिरी थी।

22 -श्रीलंका– यह शक्ति पीठ ट्रिंकोमाली में है। माता सती यहां इंद्राक्षी और भैरव राक्षेष्वर के नाम से विराजमान है ।यहां पर मां का दाया पायल (गहना) गिरा था।

23 -अट्टहास शक्तिपीठ -यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिला में पड़ता है। जगह का नाम अट्टहास है जो लालपुर स्टेशन से करीब 2 किलोमीटर पर है। माता यहां पर फ़ुल्लारा देवी के नाम से प्रसिद्ध है और भैरवनाथ विश्वेश के नाम से विख्यात हैं । वे इस शक्तिपीठ की रक्षा करते हैं। ऐसा कहा गया है कि यहां पर, मां का नीचे का ओष्ठ गिरा था।

24 -दुर्गा शक्तिपीठ– यह शक्तिपीठ कर्नाटक में है । यह दुर्गा शक्ति पीठ से प्रसिद्ध है ।यहां पर मां के दोनों कान गिरे हैं । माता रानी यहां जय दुर्गा के नाम से विराजमान हैं और भैरवनाथ अभीरू के नाम से प्रसिद्ध है ।

25 -वक्रेश्वर मंदिर– यह मंदिर बीरभूम जिला पश्चिम बंगाल के हिस्से में आता है। यह मंदिर पापहर नदी के किनारे स्थित है ।यहां पर माता का भूमध्य भाग (दोनों आखों के बिच का भाग ) गिरा है। सती माता यहां महिषमर्दिनी के नाम से पूजी जाती हैं और भैरव नाथ वक्र नाथ के नाम से पूजे जाते हैं।

26 -अंबिका मंदिर– यह शक्तिपीठ राजस्थान के विराट नामक गांव में है। यहां पर मां अंबिका के रूप में प्रतिष्ठित हैं और भैरव अमृतेश्वर के नाम से विख्यात है। माना जाता है की मां का यहां पर बाएं पैर की अंगुली गिरी थी।

27 -नंदिनी शक्ति– यह मंदिर पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिला में नंदीपुर नामक गांव में स्थित है। इस स्थान पर मां सती नंदिनी माता के रूप में और भैरवनाथ नंदिकेश्वर के रूप में विराजते हैं। कहा जाता है कि इस स्थान पर मां के गले का हार गिरा था।

28 -कोटी लिंगेश्वर मंदिर– यह शक्तिपीठ (Shakti Peeth) आंध्र प्रदेश के राजमहेन्द्री नगर में है। यह गोदावरी नदी के किनारे बसा हुआ है। माता यहां विश्वेश्वरी के नाम से तथा भैरवनाथ दंडपाणि के नाम से विख्यात है। ऐसा माना जाता है कि इस स्थान पर माता रानी का गाल (chick ) गिरा था।

29 – कुमारी शक्तिपीठ– इस शक्ति पीठ की अधिक मान्यता है। यह पश्चिम बंगाल के रत्नाकर नदी के किनारे बसा हुआ है।यह हुगली में पड़ता है। माता यहां कुमारी भैरव तथा भैरवनाथ शिवा के नाम से पूजे जाते हैं। माता का इस स्थान पर दाया कंधागिरा था।

30 -उमा शक्तिपीठ – यह बहुत प्रसिद्ध पीठ माना जाता है। यह भारत नेपाल की सीमा पर जनकपुर के निकट मिथिला नामक ग्राम में बसा है। यहां पर माता उमा के नाम से तथा भैरव महोदर के नाम से विराजमान है। कहा जाता है कि इस स्थान पर मां का बायां कंधा गिरा था।

31 -सोमनाथ मंदिर- यह शक्तिपीठ गुजरात के जूनागढ़ जिला, प्रभास नामक गांव में है। यह वेरावल स्टेशन से मात्र 4 किलोमीटर की दूरी पर है ।इस स्थान पर मां सती का उदर ( पेट) गिरने की बात कही जाती है। इस स्थान पर मां सती चंद्रभागा के रूप में विख्यात है और भैरवनाथ वक्रतुंड नाम से प्रसिद्ध है ।यहां पर भैरव अपने रूप में प्रतिष्ठित होकर इस शक्तिपीठ की चारों दिशाओं से रक्षा करते हैं।

32 -सूची तीर्थम शिव मंदिर– यह मंदिर तमिलनाडु तिरुवंतपुरम मार्ग पर कन्याकुमारी के एक छोटे से कस्बे में जिसका नाम सूची है, वहां पर स्थित है। माना जाता है कि माता का इस स्थान पर ऊपरी दांत का हिस्सा गिरा था। मां यहां पर नारायणी के रूप में विराजमान होकर अपने भक्तों पर दया बरसाती है वह और भैरव जी संघार रूप में पूजे जाते हैं ।

33 -अवंती शक्तिपीठ– यह शक्तिपीठ मध्यप्रदेश के उज्जैन में क्षिप्रा नदी के किनारे भैरव पर्वत पर स्थित है। इस स्थान पर मां का ऊपरी ओष्ठ गिरा था। माता रानी यहां अवंती रूप में और भैरव नाथ लंबकर्ण रूप में प्रतिष्ठित है ।

34 -भूतेश्वर महादेव मंदिर– यह मंदिर उत्तर प्रदेश के वृंदावन में है। इस शक्तिपीठ को महाशक्ति पीठ भी कहते हैं ।यहां पर मां के केश गुच्छ गिरे थे। यहां पर माता उमा के नाम से पूजी जाती हैं और भैरव भूतेश के नाम से स्थापित है ।इस जागरूक पीठ की रक्षा भैरवनाथ दसों दिशाओं से करते हैं।

35 -अर्पण शक्ति पीठ -यह शक्ति पीठ बांग्ला देश के भवानी पुर गाँव में है ।यहाँ पर मां अर्पण के रूप में विराजमान हैं और भैरव वामन रूप में विराजमान होकर इसकी रक्षा करते हैं ।इस स्थल पर मां का बयां पायल गिरा था ।

36 -काली शक्तिपीठ –  यह पीठ मध्य प्रदेश के अमरकंटक के सोन नदी तट पर स्थित एक गुफा में है। यहां पर मां सती काली के रूप में प्रतिष्ठित है और भैरवनाथ असितांग के रूप में विराजमान होकर इनकी रक्षा करते हैं यहां पर माता का बायां नितंब गिरा था।

37 – नर्मदा शक्तिपीठ– यह शक्तिपीठ मध्यप्रदेश के नर्मदा नदी के उद्गम स्थान पर स्थित है। यहां पर मां का दायाँ नितंब गिरा था। मां इस स्थान में नर्मदा देवी के नाम से विख्यात हैं और भैरव नाथ भद्रसेन के रूप में विराजमान है।

38 – शिवानी मंदिर– यह शक्तिपीठ उत्तर प्रदेश चित्रकूट के रामगिरी ग्राम में स्थित है। शक्तिपीठ मैं मां भवानी शिवानी के रूप में सुविख्यात है और भैरव चंद्र के रूप में प्रतिष्ठित है। ऐसा माना जाता है कि माता का यहां दया वक्ष गिरा था।
39 – भद्रकाली मंदिर – यह मंदिर तमिलनाडु के कन्या आश्रम में है। माना जाता है कि यहां पर मां का पीठ गिरा था। माता यहां श्रवणी के नाम से पूजी जाती हैं और भैरवनाथ निमिष के नाम से पूजे जाते हैं।

40- सावित्री मंदिर – यह शक्तिपीठ हरियाणा के कुरुक्षेत्र में स्थित है।इस शक्तिपीठ अत्यधिक मान्यता है। यहां पर माता का दाया एड़ी गिरा था। माता यहां सावित्री के रूप में विराजमान हैं और भैरवनाथ स्थान के रूप में पूजे जाते हैं।

41 -अस्थि मंदिर– यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिला के कांची नाम के गांव में स्थित है। ऐसा माना जाता है कि इस स्थान पर मां का कंकाल गिरा था। इस स्थल पर मां देवगर्भ रूप में पूजी जाती हैं और भैरव नाथ रुरु के रूप में विराजमान होकर इस शक्तिपीठ की रक्षा करते हैं।

42 -जयंती मंदिर– यह शक्तिपीठ बांग्लादेश में है। कालाजोर जिला के भोरभोग गांव में यह मंदिर स्थित है। यहां पर मां का बायां जांघ गिरा था। मां सती यहां पर जयंती माता के रूप में जानी जाती हैं और भैरव क्रमादिशवर के रूप में माने जाते हैं ।

43 -कपालिनी शक्तिपीठ– यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जिला के विभाषक नामक ग्राम में स्थित है। यहां पर मां का बाया एड़ी गिरा था । माता यहां मां कपालिनी रूप में विख्यात है और भैरवनाथ सर्वानंद के रूप में स्थापित होकर इस शक्तिपीठ की रक्षा करते हैं।

44 – मणिकर्णिका शक्तिपीठ– यह शक्तिपीठ उत्तर प्रदेश के वाराणसी में है। इस शक्तिपीठ को महत्वपूर्ण शक्तिपीठ के रूप में गिना जाता है। वाराणसी को काशी भी कहते हैं और यह पीठ यहां के मणिकर्णिका घाट पर स्थित है। यहां माता विशालाक्षी या मणिकर्णिका के रूप में विराजमान है तथा भैरव कालभैरव के रूप में विख्यात है। माना जाता है कि इस स्थान पर माता का कान का कुंडल (earring ) गिरा था।

45 -विमला माता मंदिर– पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में किरीटकोंन ग्राम में यह शक्तिपीठ स्थापित है। इस स्थान पर मां का मुकुट गिरा था। यहां पर मां, विमलाभैरव के नाम से और भैरवनाथ साँवरत के नाम से विख्यात है।

46 -गायत्री माता शक्तिपीठ– यह शक्तिपीठ मंदिर अजमेर पुष्कर के निकट गायत्री पर्वत पर स्थित है। माना गया है कि इस स्थान पर माता के दोनों हाथों का मणिबंध गिरा है। यहां पर माता, गायत्री और भैरव सर्वानंद के रूप में विराजमान हैं।

47 -मंगल चंद्रिका मंदिर– यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के हिस्से में आता है। ये मंदिर वर्धमान जिला के गुस्कर स्टेशन के निकट है ।माना जाता है कि इस जगह पर मां का कलाई गिरा था ।माता रानी इस स्थान पर मंगल चंद्रिका के रूप में और भैरवनाथ कपिलाम्बर के रूप में स्थापित होकर इस शक्तिपीठ की रक्षा करते हैं।

48 – वाराही मंदिर– यह शक्तिपीठ पंच सागर के निकट है। इस स्थान पर मां का निचला ठुड्डी गिरा था। यहां पर माता रानी वाराही के रूप में और भैरवनाथ महारुद्र के रूप में प्रतिष्ठित है।

49 -श्रीसुंदरी माता का मंदिर– इस शक्तिपीठ की मान्यता बहुत अधिक है। यह आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम नामक स्थान पर स्थित है। कुछ लोग इस शक्तिपीठ को लद्दाख के श्री पर्वत पर भी मानते हैं। यहां पर माता का बाया भुजा गिरा था ।यहां माता श्री सुंदरी और भैरव सुंदरानन्द के रूप में विराजमान है।

50 -यशोरेश्वरी मंदिर– यह शक्तिपीठ बांग्लादेश के हिस्से में आता है। यह खुलना जिला के ईश्वरी पूर्व ग्राम में स्थित है। यहां पर मां का बाया कलाई तथा हाथ पैर का कुछ भाग गिरा था। सती माता यहाँ यशोरेश्वरी के रूप में पूजी जाती है और भैरव चंदा के रूप में विख्यात है।

51 – तारापीठ– यह शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल का बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर है। यहां पर माता तारा के रूप में और भैरव तार के रूप में सुविख्यात हैं ।यहां पर माता के नेत्र के अंदर का काला वाला हिस्सा जिसे रेटिना कहते हैं गिरा था। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में जो भी भक्त अपनी कामना लेकर जाते हैं उनकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।

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