Vishnu 20 Avtaar in Hindi – विष्णु के 20 अवतारों का रहस्य

सृष्टि के निर्माण में योगी मानव के रूप में शिव ने सबसे पहले नारायण ( Vishnu ) की उत्पत्ति की और उन के नाभि सरोवर में से कमल की उत्पत्ति हुई जिसमे ब्रह्मा ( Brahma ) को प्रकट किया गया| भगवान का यह स्वरूप जिसमे हज़ारों पैर , भुजाएँ और मुखो के कारण इनका ये स्वरूप बिल्कुल अलग था| इनके सिर पे हज़ारों मुकुट, कुंडल और वस्त्र थे| भगवान का यही स्वरूप नारायण ( Vishnu ) का है| इन्होने समय समय पर सृष्टि और मानवता की रक्षा के लिए 20 विभिन्न अवतार (Vishnu avtaar) लिए |

साधारणतः प्रायः लोगो को नारायण के 10 अवतार ही ज्ञात है, लेकिन यहाँ पर मैं उनके 20 अवतारों के बारें में बता रही हूँ जिसका परिचय श्री भागवत सुधासागर में वर्णित हैं ।

1  नारायण का पहला अवतार – सनक, सनन्दन, सनातन, सनत कुमार
नारायण ने सबसे पहला अवतार इन चार ब्राह्मणो के रूप में लिया और अपने कठिन जीवन में अखंड ब्रहंचर्या का पालन किया| अपने इस अवतार में इन्होने संपूर्ण मानवजाति के कल्याण के लिए वेदो का तीनो लोको में प्रचार प्रसार किया|

2  नारायण का दूसरा अवतार – सूकर रूप
नारायण ने अपने इस अवतार में रसातल में गयी हुई पृथ्वी को बाहर निकाला | जब हीरण्यक्ष पृथ्वी को रसातल में ले गया तब विष्णु ने सूकर का रूप धारण करके उस राक्षस का वध किया और पृथ्वी के बाहर निकाला|

3 नारायण का तीसरा अवतार  – नारद अवतार
इस अवतार में विष्णु ने नारद पाँचरात्र का उपदेश दिया जिससे की मनुस्य को कर्म बंधन से मुक्ति मिल सकें| इस तंत्र में ये भी बताया गया है की मनुस्य की किस प्रकार का कर्म करना चहिए ताकि वह कर्म बंधन में ना बँध सकें|

4 नारायण का चौथा अवतार – नर-नारायण अवतार
इस अवतार में विष्णु ने अपना जीवन बहुत संयम से जिया और कठिन तपस्या करकें अपने संपूर्ण इंद्रियो पर जीत हासिल की|

5 नारायण का पाँचवा अवतार – कपिल अवतार
इस अवतार में विष्णु ने सांख्य शास्त्र को जीवित किया| इस शास्त्र के द्वारा तत्वो का निर्णीय किया जाता है|

6 नारायण का छट्टा अवतार – दत्तात्रेय अवतार
इस अवतार में विष्णु अनुसूया के गर्भ से उत्पन्न हुए थे| इन्होने अलर्क एवं प्रहलाद को ब्रहां ज्ञान का उपदेश दिया|

7  नारायण का  सातवाँ अवतार – यज्ञ अवतार
इस अवतार में इनका जनम अकूती नामक साध्वी से जन्म लिया था और अपने पुत्र याम आदि देवताओ के साथ मन्वन्तर(युग) की रक्षा की|

8 नारायण का ऋषब देव अवतार
इस अवतार में राजा नाभि की पत्नी मेरु देवी के गर्भ से उत्पन्न हुए| इस रूप मे विष्णु ने परमहँसो का मार्गदर्शन किया जो वंदनीय है|

9 नारायण का प्रिथुक अवतार
इस अवतार में पृथ्वी से समस्त औस्धियों का दोहन किया ताकि संपूर्ण पृथ्वी का कल्याण हो सकें|

10 नारायण का मतस्य अवतार
जब तीनो लोक समुद्र में डूब रहा था तब नारायण ने पृथ्वी रूपी नौका में मतस्य रूप में बैठकर वैवस्वत मुनि की रक्षा की|

11 नारायण का कच्छप अवतार
जिस समय देवता और दैत्य समुद्र मंथन कर रहें थे तभी नारायण ने कच्छप रूप धारण करके मन्द्राचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण किया|

12 नारायण का धन्वंतरि अवतार
इस अवतार में विष्णु धन्वंतरि का रूप धारण करके अपने सिर पर अमृत कलश ले कर प्रकट हुए थे|

13 नारायण का मोहिनी अवतार
इस अवतार में विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया था| समुद्र मंथन के बाद जो अमृता निकला था उसे दैत्यो को मोहित करकें देवताओ को अमृत पिलाया था|

14 नारायण का नरसिंह अवतार
इस रूप में विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया और भक्त प्रहलाद को बचाने के लिए दैत्यराज हिरंकश्यप की छाती अपनो नखो से फाड़कर उसका वध किया|

15 नारायण का  वामन अवतार
इस अवतार में विष्णु ने ब्राह्मण रूप धारण करके राजा बलि के यग्ग में पहुँचे और भिक्षा में उन्होने तीन पग ज़मीन माँगी| दो पद में उन्होने तीनो लोक नाप लिया और तीसरा पेर बलि के सिर पर रखकर उसे मोक्ष दिलाई|

16 नारायण का परशुराम अवतार
इस अवतार में उन्होने पृथ्वी से क्षत्रियो का २१ बार नाश किया था क्योंकि ये लोग राजा बनकर ब्राह्मणो के विद्रोही हो गये थे|

17 नारायण का पराशरजी अवतार
इस अवतार में सतयवती के गर्भ से जन्म लिया था| इन्होने वेद की कई शाखाएँ बना दी और इसे सरल बना दिया ताकि साधारण मनुस्य भी वेद को समाज सकें

 18 नारायण का राम अवतार   
 यह अवतार विष्णु ने देवताओ का कार्य सिद्ध करने के लिए राजा राम के रूप में लिया था| श्री राम के रूप में इन्होने अहिल्या का उद्धार किया, बलि और रावण का वध किया|

19 नारायण का कृष्ण अवतार
इस अवतार में विष्णु ने यशोदा के पुत्र कृष्णके रूप में अवतार लिया जो वास्तव में देवकी और वासुदेव के पुत्र थे| इन्होने महाभारत में बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई| ये अर्जुन के सारथि बने और गीता का उपदेश दिया|

20 नारायण का भगवान बुद्ध अवतार
 यह अवतार विष्णु ने कलयुग में लिया| इनका जन्म राजपरिवार में हुआ था लेकिन इन्होने अपना राज्य त्याग कर सन्यास धारण कर लिया और भगवान बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हुए|

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